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India-Nepal: नेपाल पहुंचे भारतीय सेना प्रमुख, क्या फिर खुलेगा गोरखा भर्ती का रास्ता? तीन दिन का दौरा बेहद अहम

Published: 17/08/2026, 01:02:35 pm2 viewsSeemanchal Live

नई दिल्ली/काठमांडू: भारत और नेपाल के रिश्तों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ सोमवार, 17 अगस्त को तीन…

India-Nepal: नेपाल पहुंचे भारतीय सेना प्रमुख, क्या फिर खुलेगा गोरखा भर्ती का रास्ता? तीन दिन का दौरा बेहद अहम
नई दिल्ली/काठमांडू: भारत और नेपाल के रिश्तों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ सोमवार, 17 अगस्त को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर नेपाल पहुंचे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दोनों पड़ोसी देश रक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ भारतीय सेना में नेपाली गोरखा युवाओं की भर्ती जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। जनरल सेठ का नेपाल दौरा 17 से 19 अगस्त 2026 तक निर्धारित है। इस दौरान नेपाल के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के साथ उनकी मुलाकात होने की उम्मीद है। गोरखा भर्ती पर हो सकती है अहम चर्चा भारतीय सेना में नेपाल के गोरखा युवाओं की भर्ती दोनों देशों के सैन्य संबंधों की सबसे पुरानी परंपराओं में शामिल रही है। लेकिन भारत में अग्निपथ योजना लागू होने के बाद नेपाल से गोरखा युवाओं की भर्ती का मामला अटका हुआ है। अब सेना प्रमुख के दौरे के दौरान इस विषय पर बातचीत की संभावना जताई जा रही है। यही कारण है कि जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा को सामान्य सैन्य दौरे से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, गोरखा भर्ती दोबारा शुरू करने को लेकर अभी किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। क्यों रुकी नेपाली गोरखाओं की भर्ती? भारत सरकार ने वर्ष 2022 में सशस्त्र बलों के लिए अग्निपथ भर्ती योजना शुरू की थी। इसके तहत भर्ती होने वाले सैनिकों को 'अग्निवीर' कहा जाता है और भर्ती की सेवा शर्तें पुरानी व्यवस्था से अलग हैं। नेपाल ने नई व्यवस्था के तहत अपने नागरिकों की भारतीय सेना में भर्ती को लेकर कई सवाल उठाए थे। इसके बाद नेपाली युवाओं की गोरखा रेजिमेंट में नई भर्ती आगे नहीं बढ़ सकी। यह मुद्दा तभी से दोनों देशों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। भारतीय सेना से गोरखाओं का पुराना रिश्ता भारतीय सेना और नेपाली गोरखा सैनिकों का संबंध बेहद पुराना है। गोरखा सैनिक अपनी बहादुरी, अनुशासन और युद्ध कौशल के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। आजादी के बाद भी नेपाल के नागरिकों की भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंटों में भर्ती जारी रही। भारत में बड़ी संख्या में पूर्व गोरखा सैनिक और उनके परिवार भी सेना से जुड़े पेंशन तथा अन्य लाभ प्राप्त करते रहे हैं। इसी वजह से गोरखा भर्ती का मामला केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-नेपाल के सामाजिक और ऐतिहासिक संबंधों से भी जुड़ा हुआ है। Nepal Army के शीर्ष अधिकारियों से होगी बातचीत तीन दिवसीय यात्रा के दौरान भारतीय सेना प्रमुख की नेपाल सेना के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बैठकें महत्वपूर्ण रहेंगी। इन बैठकों में दोनों सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, रक्षा सहयोग और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर बातचीत होने की उम्मीद है। भारत और नेपाल की सेनाएं लंबे समय से कई स्तरों पर एक-दूसरे के साथ सहयोग करती रही हैं। भारत-नेपाल में एक खास सैन्य परंपरा भारत और नेपाल के सैन्य संबंधों की एक बेहद खास परंपरा भी है। दोनों देशों में एक-दूसरे के सेना प्रमुख को मानद जनरल की रैंक देने की पुरानी परंपरा रही है। इसे दोनों सेनाओं के बीच विश्वास और ऐतिहासिक रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। जनरल धीरज सेठ के मौजूदा दौरे में भी यह सैन्य परंपरा चर्चा में है। सीमा सुरक्षा भी दोनों देशों के लिए अहम भारत और नेपाल के बीच करीब 1,750 किलोमीटर लंबी खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा है। बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम नेपाल की सीमा से जुड़े हैं। बिहार के लिए यह सीमा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य के कई जिले सीधे नेपाल से लगते हैं। खुली सीमा दोनों देशों के लोगों को व्यापार, रोजगार और पारिवारिक संबंधों में बड़ी सुविधा देती है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी बनी रहती हैं। तस्करी, अवैध गतिविधियों और बिना वैध दस्तावेज आवाजाही रोकने के लिए भारतीय सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) तैनात है। स्वतंत्रता दिवस से पहले बिहार-नेपाल सीमा पर बढ़ाई गई थी सुरक्षा हाल ही में 15 अगस्त को देखते हुए बिहार से लगती भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई थी। SSB ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ सीमा चौकियों को अलर्ट पर रखा था। सीमावर्ती क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों और वाहनों की जांच भी बढ़ाई गई थी। भारत-नेपाल की खुली सीमा को देखते हुए दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है नेपाल नेपाल भारत का केवल पड़ोसी देश नहीं है। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता, खुली सीमा, धार्मिक-सांस्कृतिक जुड़ाव और व्यापक आर्थिक संबंध हैं। इसके अलावा हिमालयी क्षेत्र में नेपाल की भौगोलिक स्थिति उसे भारत की रणनीतिक और सुरक्षा नीति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। भारत और चीन दोनों के बीच स्थित होने के कारण नेपाल में होने वाले राजनीतिक और रणनीतिक बदलावों पर नई दिल्ली की करीबी नजर रहती है। क्या फिर शुरू होगी गोरखा भर्ती? जनरल धीरज सेठ के तीन दिवसीय दौरे का सबसे दिलचस्प पहलू गोरखा भर्ती का मुद्दा रहने वाला है। अगर भारत और नेपाल इस मामले में किसी स्वीकार्य समाधान की तरफ बढ़ते हैं तो लंबे समय से भारतीय सेना में भर्ती का इंतजार कर रहे नेपाली गोरखा युवाओं के लिए रास्ता खुल सकता है। फिलहाल किसी अंतिम फैसले की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि भर्ती तुरंत शुरू होने जा रही है। लेकिन 17 से 19 अगस्त तक चलने वाला भारतीय सेना प्रमुख का नेपाल दौरा दोनों देशों के रक्षा संबंधों और गोरखा भर्ती के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डिस्क्लेमर: गोरखा भर्ती पर संभावित बातचीत से जुड़ी जानकारी मौजूदा रिपोर्टों पर आधारित है। भर्ती दोबारा शुरू करने को लेकर भारत या नेपाल की ओर से किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक घोषणा होने तक इसे निश्चित फैसला नहीं माना जाना चाहिए।

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