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नेपाल में भारी बारिश के बाद कोसी का जलस्तर बढ़ा, सीमांचल में बाढ़ के खतरे को लेकर बढ़ी चिंता

Published: 24/06/2026, 11:41:30 am7 viewsSeemanchal Live

कोसी और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन की नजर, कटिहार और पूर्णिया सहित कई जिलों में सतर्कता बढ़ाई गई सीमांचल क्षेत्र एक बार फिर मानसून की चुनौती का…

नेपाल में भारी बारिश के बाद कोसी का जलस्तर बढ़ा, सीमांचल में बाढ़ के खतरे को लेकर बढ़ी चिंता
कोसी और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन की नजर, कटिहार और पूर्णिया सहित कई जिलों में सतर्कता बढ़ाई गई सीमांचल क्षेत्र एक बार फिर मानसून की चुनौती का सामना करने की तैयारी में जुट गया है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कोसी नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बाद बिहार के सीमांचल क्षेत्र में बाढ़ को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने कटिहार, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज सहित कई जिलों में निगरानी बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल में होने वाली बारिश का असर कुछ दिनों बाद बिहार की नदियों में दिखाई देता है। यही कारण है कि सीमांचल के लोग हर वर्ष मानसून के दौरान कोसी, महानंदा और परमान जैसी नदियों के जलस्तर पर नजर रखते हैं। इस बार भी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बिहार के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके कारण नदियों में जलस्तर और बढ़ सकता है। कटिहार और पूर्णिया जिलों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने अभी से जरूरी सामान जुटाना शुरू कर दिया है। किसानों के लिए यह बारिश फायदेमंद भी है क्योंकि धान की रोपाई का समय चल रहा है। लेकिन अत्यधिक बारिश फसलों और जनजीवन दोनों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। प्रशासन की ओर से बाढ़ नियंत्रण कक्ष सक्रिय किए जा रहे हैं। संवेदनशील तटबंधों की निगरानी बढ़ाई गई है और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन सतर्क रहना आवश्यक है। सीमांचल के लोगों के लिए मानसून हमेशा उम्मीद और चिंता दोनों लेकर आता है। एक तरफ बारिश खेती के लिए जरूरी है, दूसरी तरफ बाढ़ का खतरा लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकता है। आने वाले कुछ दिन इस क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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