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Bihar

हिरासत से छूटते ही तेजस्वी यादव का सरकार पर हमला, बोले- छात्रों को न्याय मिलने तक जारी रहेगी लड़ाई

पटना में लोक भवन मार्च के दौरान वाटर कैनन और हिरासत के बाद सियासत तेज; RJD ने राज्यपाल के नाम सौंपा छह सूत्री ज्ञापन पटना: बिहार में छात्रों, प्रतियोगी…

हिरासत से छूटते ही तेजस्वी यादव का सरकार पर हमला, बोले- छात्रों को न्याय मिलने तक जारी रहेगी लड़ाई
पटना में लोक भवन मार्च के दौरान वाटर कैनन और हिरासत के बाद सियासत तेज; RJD ने राज्यपाल के नाम सौंपा छह सूत्री ज्ञापन पटना: बिहार में छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं और पुलिस कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक टकराव थमता दिखाई नहीं दे रहा है। बुधवार को पटना में राष्ट्रीय जनता दल के लोक भवन मार्च के दौरान हिरासत में लिए गए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को बाद में पुलिस ने रिहा कर दिया। रिहाई के बाद उन्होंने साफ किया कि छात्रों के मुद्दे पर उनकी पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा। तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब तक छात्रों से जुड़े मामले में जवाबदेही तय नहीं होती, RJD पीछे हटने वाली नहीं है। लोक भवन मार्च में क्या हुआ था? बुधवार को RJD ने पटना के जेपी गोलंबर से लोक भवन तक मार्च निकाला था। इसका नेतृत्व तेजस्वी यादव कर रहे थे। पार्टी ने कथित पेपर लीक, बेरोजगारी और छात्रों से जुड़े मुद्दों के साथ सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा AK-47 इस्तेमाल किए जाने की घटना को प्रमुख मुद्दा बनाया। बड़ी संख्या में RJD कार्यकर्ता और समर्थक मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारी पुलिस की बैरिकेडिंग पार करते हुए इनकम टैक्स गोलंबर की तरफ बढ़े, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। तेजस्वी समेत 88 लोगों को लिया गया हिरासत में मार्च के दौरान तेजस्वी यादव के साथ RJD सांसद मीसा भारती, संजय यादव समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार कुल 88 नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। पुलिस कार्रवाई के दौरान पटना के डाकबंगला, बेली रोड और आसपास के इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ। रिहाई के बाद तेजस्वी ने फिर खोला मोर्चा पुलिस हिरासत से बाहर आने के बाद तेजस्वी यादव ने संकेत दिया कि बुधवार का प्रदर्शन इस आंदोलन का अंत नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। तेजस्वी ने छात्रों की नई पीढ़ी का भी जिक्र किया और कहा कि सरकार को युवाओं की भावनाओं को समझना होगा। आखिर सीवान का AK-47 विवाद क्या है? इस पूरे आंदोलन की एक बड़ी वजह 25 जुलाई को सीवान में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी ने AK-47 का इस्तेमाल किया। RJD इस मामले में जवाबदेही और जांच की मांग कर रही है। इसी मुद्दे को प्रतीकात्मक रूप से दिखाने के लिए पटना के प्रदर्शन में कुछ कार्यकर्ता डमी AK-47 और नकली वर्दी के साथ भी दिखाई दिए। यहां यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि प्रदर्शन में दिखाई गई राइफलें वास्तविक हथियार नहीं बल्कि प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल की गई replicas थीं। पेपर लीक और बेरोजगारी को भी बनाया मुद्दा RJD ने आंदोलन को केवल सीवान की घटना तक सीमित नहीं रखा। पार्टी ने बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, भर्ती व्यवस्था, बेरोजगारी और छात्रों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया है। तेजस्वी यादव का कहना है कि बार-बार परीक्षा विवाद सामने आने से मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य पर असर पड़ता है। यही कारण है कि RJD अब अपनी राजनीतिक रणनीति में छात्र और युवा मुद्दों को प्रमुखता देती दिखाई दे रही है। छह सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद RJD का एक प्रतिनिधिमंडल आगे बढ़ा। वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह को छह सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। इस तरह RJD ने सड़क पर प्रदर्शन करने के साथ अपनी मांगों को औपचारिक रूप से भी प्रशासन तक पहुंचाया। BJP ने मार्च को बताया 'फ्लॉप शो' RJD के आंदोलन पर सत्ता पक्ष ने भी पलटवार किया है। BJP ने लोक भवन मार्च को “फ्लॉप शो” बताते हुए दावा किया कि इससे तेजस्वी यादव की घटती राजनीतिक अपील दिखाई देती है। RJD का दावा इससे बिल्कुल अलग है। पार्टी इस प्रदर्शन को छात्रों और युवाओं की समस्याओं को सरकार के सामने मजबूती से उठाने वाला आंदोलन बता रही है। इस तरह छात्र मुद्दों पर शुरू हुआ विवाद अब सीधे RJD बनाम NDA की राजनीतिक लड़ाई में बदलता दिखाई दे रहा है। प्रशांत किशोर की भी आई प्रतिक्रिया बिहार की राजनीति में तेजी से उभरे प्रशांत किशोर ने भी तेजस्वी यादव के मार्च पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम ही सरकार के खिलाफ जनता के मुद्दे उठाना है और इस तरह के आंदोलन विपक्ष को नियमित रूप से करने चाहिए। इस बयान के भी राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं क्योंकि बिहार में सत्ता पक्ष और मुख्य विपक्ष के अलावा दूसरे राजनीतिक खिलाड़ी भी युवा और रोजगार के मुद्दों को प्रमुखता दे रहे हैं। बिहार की राजनीति में युवा बन रहे बड़ा मुद्दा इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बिहार के छात्र और युवा मतदाता हैं। प्रतियोगी परीक्षाएं, सरकारी भर्ती, पेपर लीक, बेरोजगारी और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दे सीधे लाखों युवाओं से जुड़े हैं। यही कारण है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में रोजगार और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मुकाबला और तेज हो सकता है। RJD इस असंतोष को राजनीतिक आंदोलन में बदलने की कोशिश कर रही है, जबकि सरकार के सामने परीक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की चुनौती है। अब आगे क्या? लोक भवन मार्च खत्म हो चुका है और हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर दिया गया है, लेकिन राजनीतिक विवाद खत्म नहीं हुआ। तेजस्वी यादव ने संकेत दिया है कि जवाबदेही तय होने तक आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि RJD अगला आंदोलन कब और किस रूप में करती है तथा राज्य सरकार छात्रों और सीवान की घटना से जुड़े आरोपों पर आगे क्या कदम उठाती है।

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