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Trump की ईरान को लेकर बड़ी चेतावनी: मदद करने वाले देशों पर भी आर्थिक कार्रवाई की धमकी, Hormuz संकट से दुनिया की बढ़ी चिंता

अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच ट्रंप ने अपनाया सख्त रुख; Strait of Hormuz पर गतिरोध जारी, वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर वॉशिंगटन/दुबई:…

Trump की ईरान को लेकर बड़ी चेतावनी: मदद करने वाले देशों पर भी आर्थिक कार्रवाई की धमकी, Hormuz संकट से दुनिया की बढ़ी चिंता

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अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच ट्रंप ने अपनाया सख्त रुख; Strait of Hormuz पर गतिरोध जारी, वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर वॉशिंगटन/दुबई: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक और सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि जो भी देश अपने वित्तीय संस्थानों, कारोबार, हवाई अड्डों या सरकारी संस्थाओं के जरिए ईरान को किसी तरह की सहायता उपलब्ध कराएगा, उसे अमेरिका की ओर से गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष करीब छह महीने से जारी है और दुनिया की नजर Strait of Hormuz पर टिकी हुई है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया में कारोबार किए जाने वाले तेल का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था। ट्रंप ने क्या कहा? ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान को आर्थिक या संस्थागत स्तर पर सहारा देने वाले देशों को अमेरिका की ओर से “Economic Warfare and Isolation” का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई देश अपने banks, businesses, airports या government entities के जरिए ईरान को सहायता देता है तो उस देश के खिलाफ भी बड़े आर्थिक कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि अमेरिका इन कदमों को वास्तव में किस रूप में लागू करेगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। करीब छह महीने से चल रहा संघर्ष Reuters के मुताबिक अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू किए जाने के बाद संघर्ष करीब छह महीने से जारी है। इस दौरान हजारों लोगों की जान गई है और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई है। संघर्ष का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रभाव तेल और समुद्री व्यापार पर पड़ा है। ईरान ने Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने की अपनी क्षमता दिखाई है, जिससे global oil supply को लेकर लगातार अनिश्चितता बनी हुई है। दो बार Ceasefire की कोशिश, दोनों बार टूटी अमेरिका और ईरान के बीच इस साल अप्रैल और जून में दो बार ceasefire agreements की घोषणा हुई थी। इनका उद्देश्य सैन्य तनाव कम करना और Hormuz के रास्ते shipping को सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ना था। लेकिन दोनों समझौते जल्द ही कमजोर पड़ गए। इजरायल ने बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष लड़ाई से दूरी जरूर बनाई है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है। Hormuz पर अमेरिका और ईरान आमने-सामने सबसे बड़ा विवाद Strait of Hormuz की स्थिति को लेकर है। ट्रंप का कहना है कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग shipping के लिए खुला है। लेकिन ईरान इससे सहमत नहीं है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि Hormuz पूरी तरह सामान्य रूप से नहीं खोला गया है और इसे दोबारा खोलने के लिए अमेरिका को कुछ शर्तें माननी होंगी। इन शर्तों में ईरानी बंदरगाहों की blockade समाप्त करना, तेल प्रतिबंध हटाना, frozen Iranian assets जारी करना और सैन्य कार्रवाई की धमकी खत्म करना शामिल बताया गया है। जहाज पर हमले ने बढ़ाई चिंता Hormuz की स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मंगलवार को इस क्षेत्र से निकल रहे एक जहाज पर अज्ञात projectile से हमला होने की रिपोर्ट सामने आई। United Kingdom Maritime Trade Operations के मुताबिक हमले से जहाज के engine room को नुकसान पहुंचा और चालक दल का एक सदस्य हताहत हुआ। Oman Coast Guard ने बाकी crew की सहायता की। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि Hormuz के आसपास commercial shipping के लिए जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। UAE ने भी ईरान पर लिया बड़ा फैसला ईरान के साथ तनाव के बीच United Arab Emirates (UAE) ने भी सख्त कदम उठाया है। UAE ने ईरान के साथ सभी financial और economic transactions को अगली सूचना तक निलंबित करने का फैसला किया है। UAE ने इसके पीछे ईरान की ओर से missile threat और सैन्य तनाव को कारण बताया है। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि UAE और ईरान के बीच लंबे समय से व्यापारिक संबंध रहे हैं। ऐसे में आर्थिक लेन-देन रोकने का फैसला क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है। दुनिया के लिए Hormuz इतना महत्वपूर्ण क्यों? Strait of Hormuz फारस की खाड़ी को Arabian Sea और आगे global shipping routes से जोड़ता है। Saudi Arabia, UAE, Kuwait, Iraq और दूसरे खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और LNG का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से गुजरता है। इसलिए Hormuz में किसी तरह का लंबा disruption होने पर इसका असर केवल Middle East तक सीमित नहीं रहेगा। तेल महंगा होने से transport, aviation, manufacturing और महंगाई तक पर असर पड़ सकता है। भारत पर भी पड़ सकता है असर भारत के लिए यह घटनाक्रम खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा crude oil आयात करता है। खाड़ी क्षेत्र भारत के प्रमुख energy suppliers में शामिल है। यदि Hormuz के रास्ते oil shipping लंबे समय तक प्रभावित होती है तो international crude prices और freight costs पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर भारत में fuel prices और दूसरी वस्तुओं की लागत तक पहुंच सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संकट कितने समय तक रहता है और वैश्विक तेल आपूर्ति किस हद तक प्रभावित होती है। फिलहाल बातचीत के संकेत कमजोर इस संकट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच तत्काल बातचीत की संभावना कमजोर दिखाई दे रही है। 18 अगस्त को ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ फिलहाल कोई बातचीत नहीं चल रही और कोई नई वार्ता निर्धारित भी नहीं है। दूसरी ओर ईरान ने कहा है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन दबाव में आत्मसमर्पण स्वीकार नहीं करेगा। यानी दोनों पक्ष बातचीत का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं कर रहे, लेकिन शर्तों को लेकर बड़ा अंतर बना हुआ है।

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