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India

रांची में रैयतों का बड़ा आंदोलन: नौकरी और मुआवजे की मांग पर रेलवे लाइन जाम, कोयला रैक रोकी गई

मैक्लुस्कीगंज/रांची: झारखंड के रांची जिले के मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र में सोमवार सुबह रैयतों और विस्थापित परिवारों का आंदोलन तेज हो गया। नौकरी, उचित मुआवजा और…

रांची में रैयतों का बड़ा आंदोलन: नौकरी और मुआवजे की मांग पर रेलवे लाइन जाम, कोयला रैक रोकी गई

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मैक्लुस्कीगंज/रांची: झारखंड के रांची जिले के मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र में सोमवार सुबह रैयतों और विस्थापित परिवारों का आंदोलन तेज हो गया। नौकरी, उचित मुआवजा और लंबित मांगों को लेकर आंदोलनकारियों ने मैक्लुस्कीगंज-पिपरवार रेलवे लाइन (राजधर साइडिंग लाइन) को जाम कर दिया, जिससे कोयला परिवहन और रेल परिचालन प्रभावित हो गया। आंदोलन का नेतृत्व Raiyat Visthapit Morcha के बैनर तले किया जा रहा है। हेसालौंग गंझूटोला के पास रोकी गई कोयला रैक आंदोलनकारियों ने फेज-वन के तहत हेसालौंग गंझूटोला के निकट रेलवे ट्रैक पर धरना शुरू कर दिया। इसी दौरान राजधर साइडिंग की ओर जा रही एक कोयला रैक को सुबह करीब छह बजे रोक दिया गया। धरना स्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक राजधर साइडिंग के लिए किसी भी रैक का परिचालन नहीं होने दिया जाएगा। अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग धरना दे रहे रैयतों और विस्थापित परिवारों ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों से लंबित नौकरी और मुआवजे के मामलों का समाधान अब सिर्फ बैठकों और आश्वासनों से नहीं होगा। वे चाहते हैं कि सक्षम अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचकर लिखित और ठोस निर्णय लें। आंदोलन जारी रखने की चेतावनी रैयत विस्थापित मोर्चा की रोहिणी करकट्टा ओसीपी शाखा के अध्यक्ष Shivnarayan Lohra ने कहा कि प्रभावित परिवारों को न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि कई परिवार दशकों से रोजगार और उचित मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। उनका कहना है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन यदि मांगों की अनदेखी की गई तो इसे और व्यापक रूप दिया जा सकता है। 35 वर्ष पहले अधिग्रहित हुई थी जमीन स्थानीय लोगों के अनुसार लगभग 35 वर्ष पहले नावाडीह, हेसालौंग, गंझूटोला, मायापुर और महुलिया समेत कई गांवों की जमीन राजधर साइडिंग रेलवे लाइन के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उस समय कुछ प्रभावित परिवारों को नौकरी दी गई, लेकिन बड़ी संख्या में रैयत और उनके आश्रित आज भी रोजगार और उचित मुआवजे से वंचित हैं। कई दौर की बैठकें, लेकिन समाधान नहीं प्रभावित ग्रामीणों, सीसीएल पिपरवार प्रबंधन, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच वर्षों में कई बैठकें हो चुकी हैं। हालांकि आंदोलनकारियों का कहना है कि इन बैठकों में केवल आश्वासन मिले, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। उनका आरोप है कि बार-बार वादे किए गए, लेकिन प्रभावित परिवारों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। कोयला परिवहन पर पड़ा असर रेलवे लाइन जाम होने के कारण राजधर साइडिंग से जुड़े कोयला परिवहन कार्य प्रभावित हो गए हैं। यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो इसका असर औद्योगिक गतिविधियों और कोयला आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। वार्ता पर टिकी हैं निगाहें फिलहाल धरना जारी है और आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन और संबंधित प्रबंधन के साथ निर्णायक वार्ता नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब सभी की नजरें प्रशासन, Central Coalfields Limited प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि रेल परिचालन और कोयला परिवहन कब तक प्रभावित रहेगा।

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