United Nations के ‘Correct the Map’ Resolution के पक्ष में भारत ने किया Vote, लेकिन साफ की Red Line—किसी खास Map या Border को मंजूरी नहीं; नए नक्शे में Africa बड़ा और Europe-North America अपेक्षाकृत छोटे क्यों दिखेंगे?
नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: दुनिया के नक्शे को लेकर United Nations में शुरू हुई एक नई पहल के बीच भारत ने अपनी सीमा और संप्रभुता को लेकर बेहद स्पष्ट संदेश दिया है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उस resolution के पक्ष में vote किया है जिसका उद्देश्य दुनिया के देशों और महाद्वीपों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने वाले Equal-Area World Maps को बढ़ावा देना है।
लेकिन इसके साथ ही नई दिल्ली ने एक महत्वपूर्ण शर्त साफ कर दी है—
भारत के sovereign territory, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं, उन्हें भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए।
किसी भी inaccurate या misleading depiction को भारत स्वीकार नहीं करेगा।
यह मामला केवल जम्मू-कश्मीर या सीमा विवाद का नहीं है।
इसके पीछे दुनिया के उस नक्शे को लेकर दशकों पुरानी बहस है जिसे हम स्कूल, किताबों, वेबसाइटों और दीवारों पर देखते आए हैं।
UN में आखिर हुआ क्या?
United Nations General Assembly ने 4 सितंबर 2026 को एक resolution अपनाया।
इसका नाम है—
“Correct the Map: Rebalancing Global Cartographic Representation and Promoting Equitable Representation of the World’s Regions, Particularly Africa.”
इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ऐसे map projections के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है जिनमें महाद्वीपों और देशों का relative area वास्तविकता के ज्यादा करीब दिखाई दे।
Resolution को Togo ने sponsor किया था और इसके पीछे Africa के representation का मुद्दा प्रमुख रहा।
Voting में 164 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया।
United States ने इसके खिलाफ vote किया, जबकि छह देशों ने abstain किया।
भारत उन 164 देशों में शामिल था जिन्होंने resolution के पक्ष में vote किया।
फिर भारत को आपत्ति किस बात पर है?
यहीं इस खबर को ठीक से समझना जरूरी है।
भारत ने UN resolution का विरोध नहीं किया है।
भारत Equal-Area Cartographic Representation के principle का समर्थन करता है।
लेकिन भारत ने यह स्पष्ट किया कि resolution के समर्थन को किसी particular world map, map projection या international boundary के endorsement के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
Ministry of External Affairs के spokesperson Randhir Jaiswal ने कहा कि resolution किसी particular map को adopt या authenticate नहीं करता और political cartography, international boundaries, disputed territories या place names पर फैसला नहीं देता।
इसके बाद भारत ने अपनी territorial position स्पष्ट की।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सहित भारत के sovereign territory को India के official map के मुताबिक ही दिखाया जाना चाहिए।
भारत के मुताबिक कोई inaccurate या misleading representation स्वीकार्य नहीं होगा।
आखिर World Map बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
यह इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है।
हम जिस flat world map को देखते हैं, उसमें गोल पृथ्वी को एक सपाट सतह पर दिखाना पड़ता है।
और यहीं mathematical problem शुरू होती है।
किसी sphere को बिना distortion के पूरी तरह flat map में बदलना संभव नहीं है।
इसलिए अलग-अलग map projections अलग चीजों को प्राथमिकता देते हैं।
दुनिया में लंबे समय से सबसे प्रसिद्ध projections में से एक Mercator Projection रहा है।
इसे 16वीं शताब्दी में navigation के लिए विकसित किया गया था।
इस projection में direction और angles जैसी चीजें navigation के लिए उपयोगी रहती हैं, लेकिन जैसे-जैसे हम Equator से poles की तरफ जाते हैं, जमीन का आकार visually बड़ा दिखाई देने लगता है।
यहीं Africa को लेकर बड़ी बहस पैदा होती है।
Africa नक्शे में वास्तविकता से छोटा क्यों लगता है?
Traditional Mercator map में northern regions disproportionately बड़े दिखाई दे सकते हैं।
इससे Africa का visual size उसकी वास्तविक विशालता को ठीक तरह से महसूस नहीं करा पाता।
इसी distortion को सुधारना UN resolution के पीछे मुख्य विचारों में से एक है।
Equal-area projection का लक्ष्य यह है कि किसी country या continent का area दूसरे landmass की तुलना में ज्यादा realistic proportion में दिखाई दे।
इसलिए नए प्रकार के map में—
Africa ज्यादा विशाल दिखाई देगा,
जबकि
Europe और North America का visual dominance कम हो सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि किसी देश का वास्तविक क्षेत्रफल बदल रहा है।
बदलता केवल यह है कि spherical Earth को flat surface पर कैसे represent किया जाता है।
Equal Earth Map क्या है?
इस debate में Equal Earth projection खास चर्चा में है।
इसे 2018 में cartographers Bojan Šavrič, Bernhard Jenny और Tom Patterson ने विकसित किया था।
इसका उद्देश्य दुनिया को visually recognizable रखते हुए landmasses के relative areas को ज्यादा सही proportion में दिखाना है।
यानी अगर Africa वास्तव में Greenland से कई गुना बड़ा है तो map देखने वाले व्यक्ति को भी उस difference का ज्यादा वास्तविक अंदाजा मिल सके।
लेकिन भारत के लिए एक अलग सवाल भी सामने आता है—
Map में national boundaries कैसे दिखाई गई हैं?
Jammu-Kashmir और Ladakh क्यों बने मुद्दा?
Equal Earth projection के कुछ widely circulated versions में भारत की northern frontiers को उस तरह नहीं दिखाया गया है जैसा भारत अपने official map में दिखाता है।
Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित Equal Earth depiction में Jammu-Kashmir और Ladakh के कुछ हिस्सों को Pakistan और China की boundaries के भीतर दिखाने का मुद्दा सामने आया है।
यही भारत की red line है।
नई दिल्ली का कहना है कि cartographic projection बदलने और political boundary बदलने को एक चीज नहीं समझा जा सकता।
भारत area representation में सुधार का समर्थन कर सकता है—
लेकिन territorial representation पर अपनी official position से समझौता नहीं करेगा।
क्या UN ने नया World Map अनिवार्य कर दिया?
नहीं।
यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है।
UN resolution का मतलब यह नहीं है कि कल से दुनिया के सभी स्कूलों, Google Maps, सरकारी कार्यालयों और publishers को अपना world map बदलना पड़ेगा।
Resolution non-binding है।
यह equal-area projections के इस्तेमाल को encourage करता है।
इसका practical impact इस बात पर निर्भर करेगा कि governments, educational institutions, publishers और digital platforms भविष्य में इन map projections को किस हद तक अपनाते हैं।
इसलिए “UN ने दुनिया का नक्शा बदल दिया” कहना पूरी तरह सही नहीं होगा।
ज्यादा सही बात यह है—
UN General Assembly ने दुनिया को ज्यादा proportionate तरीके से दिखाने वाले Equal-Area Maps को बढ़ावा देने वाला resolution अपनाया है।
क्या भारत ने किसी विवादित Map को मंजूरी दी?
नहीं।
MEA की clarification में यही सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारत ने स्पष्ट किया है कि resolution के पक्ष में vote करने का मतलब किसी specific map, projection या depiction of national boundaries का endorsement नहीं है।
यानी अगर भविष्य में कोई संस्था UN resolution का हवाला देकर ऐसा map इस्तेमाल करती है जिसमें Jammu-Kashmir या Ladakh भारत के official map के अनुरूप नहीं हैं, तो भारत के समर्थन को उस map की स्वीकृति नहीं माना जा सकता।
अमेरिका ने क्यों किया विरोध?
Voting pattern भी दिलचस्प है।
164 देशों ने resolution के पक्ष में vote किया जबकि United States अकेला देश था जिसने इसके खिलाफ vote किया।
Estonia, Georgia, Lithuania, Moldova, Serbia और Ukraine ने मतदान से दूरी यानी abstention का रास्ता चुना।
यह दिखाता है कि equal-area representation के principle को व्यापक international support मिला है।
लेकिन map projection जैसे technical दिखने वाले विषय के पीछे geography के साथ geopolitics भी मौजूद है।
क्योंकि जैसे ही world map की बात होती है, international borders और disputed territories का सवाल सामने आ सकता है।
भारत का संदेश क्या है?
भारत की position को तीन हिस्सों में समझा जा सकता है।
पहला—
दुनिया के महाद्वीपों को उनके वास्तविक relative size के करीब दिखाने के principle का समर्थन।
दूसरा—
UN resolution किसी specific world map या international boundary को मंजूरी नहीं देता।
और तीसरा, सबसे महत्वपूर्ण—
Jammu-Kashmir और Ladakh सहित भारत की sovereign territory का depiction भारत के official map के मुताबिक ही होना चाहिए।
भारत ने sovereignty और territorial integrity पर अपनी position को स्पष्ट, consistent और non-negotiable बताया है।
यह खबर आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
पहली नजर में यह diplomatic या technical news लग सकती है।
लेकिन world maps हमारी geography की understanding बनाते हैं।
बच्चे स्कूल में उसी map से दुनिया को समझते हैं।
News channels international conflict समझाने के लिए maps इस्तेमाल करते हैं।
Digital platforms अरबों users को maps दिखाते हैं।
Governments और international organisations भी cartography का इस्तेमाल करते हैं।
इसलिए किसी territory को map पर कैसे दिखाया जाता है, वह केवल design का सवाल नहीं होता।
कई बार वह सीधे sovereignty, diplomacy और national identity से जुड़ जाता है।
इसीलिए UN का “Correct the Map” resolution एक तरफ Africa और दूसरे regions को geographical representation में अधिक proportional जगह देने की कोशिश है—
तो दूसरी तरफ भारत जैसे देशों के लिए यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि cartographic reform के नाम पर national boundaries को लेकर कोई भ्रम पैदा न हो।
भारत ने इसीलिए UN proposal को समर्थन देते हुए अपनी सीमा भी स्पष्ट कर दी है—
World Map का projection बदल सकता है, लेकिन भारत की territorial integrity पर उसका रुख नहीं।












