नेपाल में लगातार हो रहे राजनीतिक बदलाव, युवाओं के आंदोलनों और मधेसी असंतोष के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या देश फिर किसी बड़े टकराव या गृहसंघर्ष की ओर बढ़ रहा है।
प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार नेपाल की राजनीति: बदलाव के बावजूद स्थिरता क्यों नहीं?
नेपाल का राजनीतिक इतिहास बार-बार यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर क्यों यह देश हर कुछ वर्षों में आंदोलन, विद्रोह और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजरता है।
हाल ही में काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की बड़ी जीत ने नेपाल की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है।
माना जा रहा है कि वे जल्द ही देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं।
यह चुनाव उस पृष्ठभूमि में हुआ है जब पिछले वर्ष “जेनरेशन-Z आंदोलन” ने नेपाल की राजनीतिक व्यवस्था को झकझोर दिया था।
युवाओं के गुस्से ने यह साफ कर दिया कि देश में लंबे समय से जमा असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है।
नेपाल में बार-बार क्यों होते हैं आंदोलन?
नेपाल का इतिहास बताता है कि देश कई क्रांतियों और राजनीतिक बदलावों से गुजरा है, लेकिन स्थिरता अभी भी दूर है।
हर दशक में जनता सड़कों पर उतरती है, पुरानी सत्ता को चुनौती देती है और बदलाव की उम्मीद करती है।
मगर अक्सर नतीजा अधूरा ही रह जाता है।
सत्ता बदलती है, चेहरे बदलते हैं, लेकिन सामाजिक न्याय, समानता और मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं की जड़ें गहरी नहीं हो पातीं।
यही अधूरी उम्मीदें अगले आंदोलन को जन्म देती हैं।
संघर्षों से भरा नेपाल का राजनीतिक इतिहास नेपाल का आधुनिक इतिहास संघर्षों और राजनीतिक प्रयोगों से भरा रहा है।
1814–1816: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल साम्राज्य के बीच अंग्लो-नेपाल युद्ध 1846–1951: राणा शासन का निरंकुश दौर 1951: क्रांति के बाद लोकतंत्र की बहाली 1960–1990: पंचायती व्यवस्था और राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध 1996–2006: माओवादी जनयुद्ध, जिसमें 17 हजार से अधिक लोग मारे गए 2006: जनआंदोलन के बाद राजशाही का अंत और गणराज्य की स्थापना 2015: नया संविधान लागू इन सभी घटनाओं के बावजूद नेपाल स्थायी राजनीतिक स्थिरता हासिल नहीं कर सका।
मधेस का सवाल: नेपाल की राजनीति का अहम मुद्दा नेपाल की राजनीति में मधेसी समुदाय का प्रश्न लंबे समय से विवाद का विषय रहा है।
मधेसी समुदाय देश की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन उनका आरोप है कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक संस्थाओं में उनकी भागीदारी सीमित रही है।
संसद, प्रशासन, न्यायिक सेवा और सुरक्षा तंत्र में पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलने के कारण असंतोष समय-समय पर आंदोलन के रूप में सामने आता रहा है।
जेनरेशन-Z आंदोलन और राजनीतिक उथल-पुथल 8 सितंबर 2025 को नेपाल में युवाओं के बड़े आंदोलन ने पूरे देश को हिला दिया।
काठमांडू से लेकर बिराटनगर, जनकपुर, धरान और नेपालगंज तक विरोध प्रदर्शन हुए।
यह आंदोलन लंबे समय से जमा निराशा और भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्से का विस्फोट था।
राजनीतिक दबाव के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा।
राजशाही की वापसी की मांग भी उठ रही नेपाल में एक और दिलचस्प राजनीतिक धारा सामने आ रही है।
कुछ समूहों का मानना है कि राजशाही के समय देश में अधिक स्थिरता थी।
इस कारण समय-समय पर राजशाही समर्थक प्रदर्शन भी देखने को मिल रहे हैं।
हालांकि नेपाल का संविधान देश को गणराज्य घोषित करता है, फिर भी यह बहस राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुकी है।
बालेन शाह से नई उम्मीदें काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह की लोकप्रियता युवाओं के बीच तेजी से बढ़ी है।
अगर वे प्रधानमंत्री बनते हैं तो उनके सामने कई बड़ी चुनौतियाँ होंगी— राजनीतिक स्थिरता स्थापित करना आर्थिक सुधार युवाओं के लिए रोजगार मधेसी और अन्य समुदायों के मुद्दों का समाधान क्या नेपाल फिर किसी बड़े संघर्ष की ओर?
नेपाल का इतिहास बताता है कि जब भी जनता की उम्मीदें अधूरी रह जाती हैं, तब आंदोलन जन्म लेते हैं।
आज नेपाल एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ नई राजनीति और पुराने असंतोष के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।
यदि सभी समुदायों को साथ लेकर समावेशी विकास की दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो राजनीतिक अस्थिरता फिर बड़े संकट का रूप ले सकती है।
Article Advertisement
Border News
क्या नेपाल में फिर गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन रही है? राजनीतिक अस्थिरता, मधेस मुद्दा और युवाओं का उभार
नेपाल में लगातार हो रहे राजनीतिक बदलाव, युवाओं के आंदोलनों और मधेसी असंतोष के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या देश फिर किसी बड़े टकराव या गृहसंघर्ष की ओर बढ़ रहा है। प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार नेपाल की राजनीति: बदलाव के बावजूद स्थिरता क्यों नहीं? नेपाल का राजनीतिक इतिहास बार-बार यह सवा

Article Advertisement
What do you think?
Leave a Comment
Article Bottom Advertisement
यह भी पढ़ें

Border News
अररिया में भारत-नेपाल सीमा के पास 55 किलो गांजा बरामद, तस्कर फरार; SSB और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

Border News
भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ी चौकसी: SSB और नेपाल APF की अहम बैठक, तस्करी रोकने पर जोर

Border News
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही, सीमांचल की नदियों पर बढ़ी निगरानी

Seemanchal
बाढ़ के बीच बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था अलर्ट, 48 अस्थायी स्वास्थ्य शिविरों में डॉक्टर तैनात

Seemanchal
सीमांचल में आज फिर बिगड़ सकता है मौसम, अररिया और किशनगंज समेत कई जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट
Trending News
#1
'रोवेलें रघुराई.. अंखिया खोला बबुआ' Pawan Singh का सुपरहिट भक्ति गीत
15134 views
#2बीते शुक्रवार को दिल्ली के एक सीवर को नंगे हाथों बिना मास्क के साफ करते हुए उसका पिता शव में बदल गया ।
8206 views
#3सुपौल:- जिला प्रशासन ने कोविड19 संक्रमण के लॉक डाउन के तीन महीने बाद पहला मिटीग.
6750 views
#4जिले में प्रवासियों का ट्रेन से आने की सिलसिला जारी
6003 views
#5विराट कोहली ने शेयर की अनुष्का शर्मा की CUTE PIC, लिखा ये बेहद रोमांटिक मैसेज
5649 views
#6नए साल में बदल जाएंगी आपके काम की ये 8 चीजें, आज ही निपटा लें वरना...
5234 views
Most Read

India
'रोवेलें रघुराई.. अंखिया खोला बबुआ' Pawan Singh का सुपरहिट भक्ति गीत
15134 views

India
बीते शुक्रवार को दिल्ली के एक सीवर को नंगे हाथों बिना मास्क के साफ करते हुए उसका पिता शव में बदल गया ।
8206 views

Bihar
सुपौल:- जिला प्रशासन ने कोविड19 संक्रमण के लॉक डाउन के तीन महीने बाद पहला मिटीग.
6750 views

India
जिले में प्रवासियों का ट्रेन से आने की सिलसिला जारी
6003 views

Entertainment
विराट कोहली ने शेयर की अनुष्का शर्मा की CUTE PIC, लिखा ये बेहद रोमांटिक मैसेज
5649 views

Politics
नए साल में बदल जाएंगी आपके काम की ये 8 चीजें, आज ही निपटा लें वरना...
5234 views
