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बाढ़ के बीच बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था अलर्ट, 48 अस्थायी स्वास्थ्य शिविरों में डॉक्टर तैनात

नाव एंबुलेंस से पहुंचाई जा रही दवाएं, सीमांचल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बीमारियों का खतरा बढ़ा पटना। बिहार में बाढ़ का पानी कई इलाकों में धीरे धीरे कम…

बाढ़ के बीच बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था अलर्ट, 48 अस्थायी स्वास्थ्य शिविरों में डॉक्टर तैनात

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नाव एंबुलेंस से पहुंचाई जा रही दवाएं, सीमांचल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बीमारियों का खतरा बढ़ा

पटना। बिहार में बाढ़ का पानी कई इलाकों में धीरे धीरे कम होने लगा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने स्वास्थ्य संबंधी नई चुनौती खड़ी हो रही है। लंबे समय तक पानी जमा रहने, गंदगी और दूषित पानी के कारण डायरिया, बुखार, त्वचा संक्रमण और दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए अस्थायी स्वास्थ्य शिविरों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की है। राज्य के अलग अलग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 48 अस्थायी स्वास्थ्य शिविरों में चिकित्सकीय व्यवस्था की गई है। जरूरत वाले इलाकों तक दवाएं पहुंचाने के लिए बोट एंबुलेंस का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

सीमांचल में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती

पूर्णिया, अररिया, कटिहार और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ और बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है।

कई गांवों में सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में परेशानी होती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य शिविर लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को बाढ़ के दौरान अतिरिक्त स्वास्थ्य देखभाल की जरूरत पड़ती है।

दूषित पानी से बढ़ सकता है बीमारी का खतरा

बाढ़ के बाद सबसे बड़ी स्वास्थ्य चिंता पीने के पानी को लेकर होती है।

कई जगहों पर बाढ़ का पानी चापाकल, कुओं और दूसरे जलस्रोतों तक पहुंच सकता है। अगर इस पानी को बिना शुद्ध किए पी लिया जाए तो पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि बाढ़ प्रभावित परिवार पीने के पानी को साफ करके या उपलब्ध सुरक्षित पेयजल का इस्तेमाल करें।

खुले में शौच और गंदे पानी के संपर्क से भी संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता है।

बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर

बाढ़ के दौरान छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।

बच्चों में बुखार, दस्त, उल्टी या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो परिवार को तुरंत स्वास्थ्यकर्मी से संपर्क करना चाहिए।

इसी तरह बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से परेशान लोगों को बाढ़ के पानी के बीच लंबे समय तक रहने से बचाना जरूरी है।

महिलाओं के लिए भी राहत शिविरों में स्वास्थ्य और स्वच्छता की पर्याप्त व्यवस्था महत्वपूर्ण है।

नाव एंबुलेंस क्यों है जरूरी

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जब सड़क मार्ग से अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है, तब नाव एंबुलेंस काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

दवाओं, डॉक्टरों और मरीजों को पानी से घिरे इलाकों तक पहुंचाने में यह व्यवस्था समय बचा सकती है।

बिहार में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कई क्षेत्रों में नावों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।

हालांकि चुनौती यह है कि सभी जरूरतमंद गांवों तक स्वास्थ्य सुविधा समय पर पहुंचे।

राहत के साथ स्वास्थ्य निगरानी भी जरूरी

बाढ़ के दौरान केवल भोजन और पीने का पानी उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। राहत शिविरों और प्रभावित गांवों में लगातार स्वास्थ्य निगरानी भी जरूरी है।

अगर किसी इलाके में अचानक दस्त, बुखार या त्वचा संक्रमण के मरीज बढ़ते हैं तो प्रशासन को तत्काल मेडिकल टीम भेजनी होगी।

इसके अलावा मच्छरों की संख्या बढ़ने के कारण मच्छरजनित बीमारियों पर भी नजर रखने की जरूरत होगी।

बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी खतरा रहेगा

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं खत्म नहीं होतीं।

पानी उतरने के बाद घरों, गलियों और खेतों में कीचड़ और गंदगी रह जाती है। जलस्रोतों के दूषित होने की आशंका भी बनी रहती है।

ऐसे में प्रशासन को बाढ़ के बाद सफाई, क्लोरीनेशन, दवाओं का छिड़काव और स्वास्थ्य जांच अभियान चलाने की जरूरत होगी।

सीमांचल के लोगों के लिए जरूरी सावधानी

बाढ़ प्रभावित परिवारों को कोशिश करनी चाहिए कि दूषित पानी का इस्तेमाल न करें। बच्चों को बाढ़ के पानी में खेलने से रोकें और लंबे समय तक गंदे पानी में पैर रखने से बचें।

अगर किसी व्यक्ति को तेज बुखार, लगातार दस्त, उल्टी, सांस लेने में परेशानी या अत्यधिक कमजोरी हो तो घरेलू इलाज में समय बर्बाद करने के बजाय नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए।

अब प्रशासन के सामने अगली चुनौती

बिहार में बाढ़ से प्रभावित लाखों लोगों के लिए राहत अभियान अभी जारी है। सरकार की ओर से आर्थिक सहायता के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।

लेकिन सीमांचल जैसे बड़े और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में सबसे बड़ी परीक्षा यह होगी कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक कितनी जल्दी पहुंचती हैं।

बाढ़ का पानी उतरने के बाद बीमारी फैलने से रोकना अब प्रशासन की अगली बड़ी चुनौती होगी।

आपकी राय

क्या आपके गांव या इलाके में बाढ़ के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ी हैं?

क्या आपके आसपास मेडिकल टीम या अस्थायी स्वास्थ्य शिविर पहुंचा है?

अगर आप पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार या आसपास के बाढ़ प्रभावित इलाके से हैं तो अपने क्षेत्र की स्थिति कमेंट में बताएं।

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