जोकीहाट के काकन टोल प्लाजा पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, पश्चिम बंगाल से वैशाली ले जाई जा रही थी शराब की खेप
अररिया। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद शराब तस्करी का नेटवर्क लगातार पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। अररिया जिले में पुलिस ने शराब तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक छह चक्का कंटेनर से 5916 लीटर विदेशी बीयर बरामद की है। पुलिस ने मौके से कंटेनर के चालक को भी गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई जोकीहाट थाना क्षेत्र में अररिया-बहादुरगंज मार्ग पर काकन टोल प्लाजा के पास की गई। पुलिस के अनुसार गुप्त सूचना के आधार पर वाहन जांच अभियान चलाया गया था। इसी दौरान पश्चिम बंगाल की ओर से आ रहे एक बंद बॉडी कंटेनर को संदेह के आधार पर रोका गया।
कंटेनर के अंदर छिपाकर रखी गई थी बीयर
पुलिस ने कंटेनर की तलाशी ली तो उसके अंदर बड़ी संख्या में कार्टन मिले। जांच करने पर इन कार्टनों में किंगफिशर प्रीमियम स्ट्रॉन्ग बीयर मिली।
पुलिस के अनुसार कंटेनर से कुल 5916 लीटर बीयर बरामद हुई है। शराब की यह खेप बिहार के रास्ते दूसरे स्थान पर पहुंचाई जा रही थी।
गिरफ्तार चालक की पहचान वैशाली जिले के अमृतपुर वार्ड नंबर तीन निवासी रमेश कुमार राय के रूप में हुई है।
प्रारंभिक पूछताछ में चालक ने पुलिस को बताया कि शराब की खेप पश्चिम बंगाल से लोड की गई थी और इसे वैशाली ले जाया जा रहा था।
गाड़ी की पहचान छिपाने की भी कोशिश
पुलिस जांच में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार तस्करों ने वाहन की पहचान छिपाने के लिए इंजन और चेसिस नंबर को घिसकर मिटाने की कोशिश की थी।
इससे पुलिस को आशंका है कि वाहन का इस्तेमाल शराब तस्करी के लिए पहले भी किया गया हो सकता है।
पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया है और अब इसकी पूरी जांच की जा रही है।
मोबाइल नंबरों से खुलेगा नेटवर्क का राज
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार चालक के पास से एक मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। पूछताछ के दौरान पुलिस को तीन मोबाइल नंबरों की जानकारी मिली है।
अब इन नंबरों के आधार पर पुलिस शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि पश्चिम बंगाल से शराब की खेप किसने भेजी, बिहार में इसे किसे पहुंचाना था और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
पुलिस बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक की जांच कर रही है। इसका मतलब है कि खेप भेजने वाले और इसे प्राप्त करने वाले दोनों पक्षों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
सीमांचल क्यों बन रहा है तस्करी का रास्ता
अररिया का भौगोलिक स्थान इसे शराब तस्करी के लिहाज से संवेदनशील बनाता है। जिले की सीमा पश्चिम बंगाल से जुड़ी है और यहां से कई महत्वपूर्ण सड़क मार्ग होकर दूसरे जिलों की ओर जाते हैं।
शराब तस्कर अक्सर ऐसे वाहनों का इस्तेमाल करते हैं जिनमें सामान छिपाने की व्यवस्था होती है। कंटेनर और बंद बॉडी वाले वाहनों की तलाशी इसलिए पुलिस के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।
अररिया और किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिलों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए शराब तस्करी रोकना लगातार चुनौती बना हुआ है।
क्या केवल चालक की गिरफ्तारी से रुकेगा कारोबार
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस शराब की खेप के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क तक पहुंच पाएगी।
अक्सर बड़ी खेप में वाहन चालक केवल अंतिम कड़ी होता है। असली नेटवर्क में माल भेजने वाला, रास्ते की व्यवस्था करने वाला, स्थानीय रिसीवर और पैसा लगाने वाले लोग शामिल हो सकते हैं।
इसलिए अगर पुलिस मोबाइल नंबरों और डिजिटल सबूतों के आधार पर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचती है तो यह कार्रवाई ज्यादा प्रभावी मानी जाएगी।
शराबबंदी के बावजूद तस्करी पर सवाल
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद शराब की बिक्री और तस्करी पर रोक लगाने के लिए लगातार पुलिस कार्रवाई की जाती रही है। इसके बावजूद दूसरे राज्यों से बिहार में शराब पहुंचाने की कोशिशें सामने आती रहती हैं।
इस मामले में भी शराब पश्चिम बंगाल से बिहार के रास्ते वैशाली तक पहुंचाई जा रही थी।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में इस नेटवर्क से जुड़े कितने लोगों के नाम सामने आते हैं और पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है।
आपकी राय
अररिया जैसे सीमावर्ती जिलों में शराब तस्करी रोकने के लिए क्या सिर्फ वाहन जांच पर्याप्त है?
क्या सीमावर्ती सड़कों और प्रमुख टोल प्लाजा पर निगरानी और मजबूत की जानी चाहिए?
और सबसे बड़ा सवाल, 5916 लीटर जैसी बड़ी खेप आखिर इतनी दूर तक बिना पकड़े कैसे पहुंच रही थी?
आपकी राय क्या है, कमेंट में जरूर बताएं।












