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कटिहार में बाढ़ से हाहाकार: 7 गांवों में घुसा पानी, बांध टूटा; लोग बोले—न पीने का पानी, न खाने का इंतजाम

कटिहार में बाढ़ से हाहाकार: 7 गांवों में घुसा पानी, बांध टूटने से संपर्क कटा; पीड़ित बोले—न पीने का पानी, न खाने का इंतजाम अमदाबाद-बरारी में गंगा और कोसी…

कटिहार में बाढ़ से हाहाकार: 7 गांवों में घुसा पानी, बांध टूटा; लोग बोले—न पीने का पानी, न खाने का इंतजाम

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कटिहार में बाढ़ से हाहाकार: 7 गांवों में घुसा पानी, बांध टूटने से संपर्क कटा; पीड़ित बोले—न पीने का पानी, न खाने का इंतजाम

अमदाबाद-बरारी में गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर से बिगड़े हालात; जंगला टाल पंचायत के 8 वार्ड पूरी तरह जलमग्न, पंचायत सरकार भवन और आंगनबाड़ी केंद्र तक डूबे—लोग ऊंची जगहों पर लेने लगे शरण

कटिहार, 6 सितंबर 2026: बिहार में बढ़ती बाढ़ का असर अब सीमांचल के कटिहार जिले में गंभीर रूप लेने लगा है। गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर के बीच अमदाबाद और बरारी प्रखंड के कई गांवों में पानी घरों तक पहुंच गया है। कहीं लोगों के चूल्हे बंद हैं तो कहीं सड़क संपर्क टूटने के बाद नाव ही आने-जाने का सहारा बची है।

सबसे चिंताजनक तस्वीर उन परिवारों की है जिन्हें बाढ़ के पानी के बीच अब पीने का साफ पानी, भोजन और सुरक्षित ठिकाना तलाशना पड़ रहा है।

अमदाबाद में जंगला टाल पंचायत के आठ वार्ड पूरी तरह जलमग्न बताए गए हैं। यहां बाढ़ का पानी पंचायत सरकार भवन और आंगनबाड़ी केंद्र में भी प्रवेश कर चुका है।

यानी कटिहार में बाढ़ अब केवल खेतों तक सीमित नहीं है—इसने गांवों के सामान्य प्रशासनिक और सामाजिक ढांचे को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

अमदाबाद के छह गांव जलमग्न

ताजा ground report के मुताबिक अमदाबाद प्रखंड में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद दक्षिणी करीमुल्लापुर, भवानीपुर खट्टी, पार दियारा, दुर्गापुर, चौकियां पहाड़पुर और लखनपुर में बाढ़ का पानी फैल गया है।

वहीं बरारी प्रखंड का उचला गांव भी बाढ़ की चपेट में है।

उचला में स्थिति अचानक बिगड़ी। स्थानीय लोगों के मुताबिक रात में पानी घरों में घुसने लगा, जिसके बाद परिवारों को सामान बचाने और सुरक्षित जगह तलाशने की चिंता सताने लगी।

जिला प्रशासन की ओर से बरारी के अंचलाधिकारी मनीष कुमार प्रभावित इलाके में पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

“अन्न तक नसीब नहीं हो रहा”

बाढ़ की असली कहानी river gauge से ज्यादा प्रभावित परिवारों की परेशानी बता रही है।

उचला के प्रभावित लोगों ने बताया कि पानी घरों में प्रवेश करने के बाद खाना बनाने की स्थिति नहीं बची है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से तत्काल भोजन की व्यवस्था करने की मांग की है।

बाढ़ में सबसे पहले चूल्हा प्रभावित होता है।

घर में राशन मौजूद हो तब भी अगर चारों तरफ पानी हो, ईंधन गीला हो जाए और खाना बनाने की सुरक्षित जगह न बचे तो परिवार के लिए भोजन तैयार करना मुश्किल हो जाता है।

यही वजह है कि community kitchen और dry ration राहत अभियान के सबसे जरूरी हिस्सों में शामिल होते हैं।

दो गांवों को जोड़ने वाला बांध टूटा

बरारी के उचला क्षेत्र से एक और गंभीर खबर सामने आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक मनरेगा के तहत सीजटोला इलाके में बनाया गया दो गांवों को जोड़ने वाला बांध टूट गया है।

इसके बाद दोनों गांवों के बीच सामान्य संपर्क प्रभावित हो गया और लोगों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

ऐसी स्थिति में समस्या केवल आने-जाने की नहीं होती।

अगर किसी व्यक्ति की तबीयत खराब हो जाए, गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाना पड़े या बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना हो तो टूटा रास्ता बड़ी चुनौती बन जाता है।

जंगला टाल के 8 वार्ड पूरी तरह पानी में

अमदाबाद की जंगला टाल पंचायत से स्थिति और गंभीर दिखाई दे रही है।

6 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार पंचायत के वार्ड संख्या 1, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और 13 पूरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं।

इसके अलावा वार्ड 2, 3, 4, 5 और 6 भी आंशिक रूप से प्रभावित बताए गए हैं।

पंचायत सरकार भवन में कई फीट तक पानी पहुंचने की सूचना है और आंगनबाड़ी केंद्र भी प्रभावित हुआ है।

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पानी किस स्तर तक आबादी वाले हिस्सों में प्रवेश कर चुका है।

सड़कें डूबीं, नाव की जरूरत

जंगला टाल में गलियों और रास्तों पर कई फीट पानी होने के कारण सामान्य आवागमन प्रभावित है।

स्थानीय प्रतिनिधियों ने प्रशासन से पर्याप्त नाव उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके साथ प्रभावित परिवारों के लिए पॉलीथिन शीट, सूखा राशन और साफ पेयजल तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

बाढ़ प्रभावित इलाके में नाव केवल transport नहीं होती।

वही ambulance बनती है।

वही ration vehicle बनती है।

और कई बार उसी नाव के सहारे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सुरक्षित स्थान तक पहुंचते हैं।

पीने का साफ पानी बन रहा सबसे बड़ा संकट

कटिहार के प्रभावित गांवों से सामने आ रही शिकायतों में सबसे गंभीर समस्या drinking water की है।

चारों तरफ पानी होने के बावजूद पीने लायक पानी मिलना मुश्किल हो रहा है।

Floodwater के संपर्क में आने वाले handpump और दूसरे drinking-water sources दूषित हो सकते हैं। इसलिए प्रभावित इलाकों में सुरक्षित पेयजल की नियमित supply बेहद महत्वपूर्ण है।

बाढ़ के बाद diarrhoea और दूसरी water-borne diseases का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए राहत अभियान में भोजन के साथ safe drinking water और medical surveillance को प्राथमिकता देना जरूरी होगा।

16 स्कूलों तक पहुंच चुका पानी

अमदाबाद में समस्या पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रही है।

5 सितंबर की स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक गंगा और महानंदा का पानी बढ़ने के बाद कई पंचायतों और नगर पंचायत क्षेत्र में पानी प्रवेश कर गया था। उस समय तक प्रखंड के 16 विद्यालयों में भी नदी का पानी पहुंचने की सूचना थी।

इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा।

स्कूल अगर खुद पानी में डूबे हों तो उन्हें राहत केंद्र के रूप में इस्तेमाल करना भी मुश्किल हो जाता है।

प्रशासन ने राहत की तैयारी बढ़ाई

कटिहार जिला प्रशासन ने बढ़ते जलस्तर को देखते हुए राहत व्यवस्था की समीक्षा की है।

जिलाधिकारी की बैठक में नाव संचालन, community kitchen, medical facilities, पशुओं के चारे और राहत सामग्री की उपलब्धता पर चर्चा की गई।

बरारी के दक्षिण भंडारतल और मोहना चांदपुर में जनजीवन प्रभावित होने के बाद प्रशासन ने नाव संचालन शुरू किया है।

मनिहारी की सात पंचायतें भी प्रभावित बताई गई हैं, जिनमें धुरियाही की स्थिति अधिक गंभीर है। यहां प्रभावित लोगों के लिए नौ नावें चलाने और community kitchen की तैयारी की जानकारी सामने आई है।

Community Kitchen कब शुरू होगा?

बरारी के अंचलाधिकारी मनीष कुमार के मुताबिक सरकारी guidelines के तहत लंबे समय तक चूल्हा नहीं जल पाने की स्थिति में dry ration या community kitchen की व्यवस्था की जाती है।

उन्होंने बताया कि पानी तेजी से बढ़ा है, लोग ऊंची जगहों पर जा रहे हैं और फिलहाल जरूरतमंद परिवारों को अस्थायी तौर पर plastic sheets उपलब्ध कराई जा रही हैं। Community kitchen भी शुरू करने की तैयारी है।

प्रभावित परिवारों के लिए अब महत्वपूर्ण सवाल यही है कि राहत व्यवस्था कितनी तेजी से जमीन पर पहुंचती है।

खतरा अभी और बढ़ सकता है

कटिहार के लिए चिंता केवल आज घरों में घुसे पानी की नहीं है।

बिहार जल संसाधन विभाग ने गंगा के ऊंचे जलस्तर को देखते हुए downstream districts को विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। इसमें कटिहार भी शामिल है।

इसके साथ आज के मौसम पूर्वानुमान में कटिहार सहित सीमांचल के कई जिलों पर खराब मौसम का खतरा बना हुआ है। कटिहार, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, सुपौल, सहरसा और मधेपुरा के लिए Orange Alert की सूचना है, जबकि कटिहार में भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है।

अगर नई बारिश होती है और नदी का दबाव बना रहता है तो पहले से जलमग्न इलाकों में राहत कार्य और मुश्किल हो सकता है।

कटिहार के लिए अगले 48 घंटे महत्वपूर्ण

कटिहार की वर्तमान स्थिति बताती है कि बाढ़ अब केवल नदी किनारे की समस्या नहीं रही।

घर डूब रहे हैं।

चूल्हे बंद हैं।

सरकारी भवन पानी में हैं।

स्कूल प्रभावित हैं।

गांवों को जोड़ने वाला बांध टूट चुका है।

और लोग साफ पानी, राशन, नाव और पॉलीथिन जैसी बुनियादी चीजें मांग रहे हैं।

इस समय प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता उन परिवारों तक पहुंचना होनी चाहिए जो सड़क संपर्क टूटने के कारण अलग-थलग पड़ गए हैं।

कटिहार के लिए अगला खतरा गंगा का downstream pressure और संभावित भारी बारिश है।

इसलिए बरारी, अमदाबाद और मनिहारी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए और जरूरत पड़ने पर समय रहते ऊंचे तथा सुरक्षित स्थानों पर चले जाना चाहिए।

क्योंकि कटिहार में इस समय सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि नदी कितनी ऊपर पहुंची—

सवाल यह है कि पानी में घिरे परिवारों तक पीने का पानी, भोजन, नाव और सुरक्षित छत कितनी जल्दी पहुंचती है।

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