गांधी घाट पर गंगा ने 2016 का Highest Flood Level पार किया; पटना से कटिहार तक बढ़ी मुश्किल, 858 नावें और NDRF-SDRF की 34 टीमें राहत-बचाव में तैनात—मौसम विभाग ने 6 सितंबर को बिहार में भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की
पटना, 6 सितंबर 2026: बिहार में बाढ़ ने एक बार फिर भयावह रूप लेना शुरू कर दिया है। गंगा के साथ गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और दूसरी प्रमुख नदियों के बढ़े जलस्तर ने राज्य के बड़े हिस्से को संकट में डाल दिया है।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के 11 जिलों में करीब 16.85 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। 61 प्रखंडों की 300 से ज्यादा पंचायतों तक बाढ़ का असर पहुंच चुका है।
सबसे ज्यादा ध्यान पटना पर है, जहां गांधी घाट पर गंगा ने अपना पुराना Highest Flood Level यानी HFL पार कर दिया।
लेकिन रविवार सुबह एक राहत का संकेत भी मिला है—जल संसाधन विभाग के real-time monitoring data में गांधी घाट पर पानी रिकॉर्ड स्तर से ऊपर जरूर था, लेकिन उसका trend falling दर्ज किया गया।
पटना में गंगा ने तोड़ा 2016 का रिकॉर्ड
गांधी घाट पर गंगा का पिछला Highest Flood Level 50.52 मीटर था, जो 2016 में दर्ज किया गया था।
शनिवार को जलस्तर 50.57 मीटर तक पहुंच गया—यानी पुराने रिकॉर्ड से करीब पांच सेंटीमीटर ऊपर।
6 सितंबर सुबह 7 बजे बिहार के Flood Management Improvement Support Centre के real-time data में गांधी घाट पर जलस्तर 50.56 मीटर दर्ज किया गया। पानी अभी भी HFL से ऊपर था, लेकिन गिरावट का trend दिखाई दिया।
इसका अर्थ तत्काल खतरा खत्म होना नहीं है। पहले से पानी में घिरे निचले इलाकों में समस्या बनी रह सकती है और नई बारिश स्थिति को फिर प्रभावित कर सकती है।
सिर्फ गंगा नहीं, कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर
बिहार की परेशानी इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि मामला केवल गंगा तक सीमित नहीं है।
जल संसाधन विभाग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक अलग-अलग monitoring points पर गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर दर्ज की गई हैं।
गंडक डुमरियाघाट और हाजीपुर में, कोसी बलतारा में, बूढ़ी गंडक खगड़िया में और गंगा कई locations पर danger level के ऊपर रही।
जब मुख्य नदी पहले से बहुत ऊंचे स्तर पर बहती है तो सहायक नदियों के पानी की निकासी भी प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर आसपास के खेतों और निचली बस्तियों पर पड़ता है।
16.85 लाख लोगों की जिंदगी प्रभावित
बाढ़ का सबसे बड़ा आंकड़ा नदी की ऊंचाई नहीं, बल्कि उससे प्रभावित लोग हैं।
ताजा जानकारी के अनुसार करीब 16.85 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अरवल शामिल बताए गए हैं।
कई जगह खेत पानी में डूब चुके हैं।
ग्रामीण रास्तों पर पानी चढ़ गया है।
कुछ गांवों का सामान्य सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ा है।
पटना जिले में ही करीब 2.32 लाख लोग प्रभावित बताए गए हैं।
NH-31 तक पहुंचा पानी
पटना के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अथमलगोला प्रखंड में NH-31 पर पानी आने से यातायात प्रभावित हुआ।
रेलवे को भी कुछ सेवाओं में बदलाव करना पड़ा है।
बाढ़ जब national highway और railway infrastructure तक पहुंचती है तो उसका असर केवल प्रभावित गांव पर नहीं रहता।
दूध, सब्जी, राशन, दवा और दूसरी जरूरी वस्तुओं की supply chain भी प्रभावित हो सकती है।
858 नावें, 34 Rescue Teams
राज्य सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज किया है।
ताजा उपलब्ध विवरण के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की निकासी और आवागमन के लिए 858 नावें लगाई गई हैं।
इसके अलावा SDRF की 27 और NDRF की 7 टीमें, यानी कुल 34 teams, प्रभावित इलाकों में तैनात बताई गई हैं।
अलग-अलग जिलों में 38 community kitchens संचालित की जा रही हैं।
12,300 से अधिक polythene sheets और 2,250 dry-ration packets के वितरण की जानकारी भी सामने आई है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे परिवारों तक भोजन, पीने का साफ पानी और दवाएं पहुंचाना है जो चारों तरफ से पानी में घिरे हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने किया हवाई सर्वेक्षण
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भागलपुर और नौगछिया के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की।
उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री और embankments की निगरानी को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।
सरकार के लिए आने वाले कुछ दिन महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि जलस्तर कम होने के बाद भी erosion, damaged roads और drinking-water contamination जैसी समस्याएं बनी रह सकती हैं।
कटिहार भी बाढ़ प्रभावित जिलों में
Seemanchal के लिए इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कटिहार है।
कटिहार उन 11 जिलों में शामिल है जिन्हें मौजूदा बाढ़ से प्रभावित बताया गया है।
गंगा और उसकी associated river systems के कारण कटिहार पहले से flood-sensitive district है। पानी बढ़ने पर निचले इलाकों में खेती, ग्रामीण roads और नदी किनारे की आबादी सबसे पहले प्रभावित होती है।
इसलिए Seemanchal में केवल पटना की गंगा का रिकॉर्ड देखना पर्याप्त नहीं है। कटिहार में local river levels और erosion पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।
आज भी Heavy Rain की चेतावनी
सबसे बड़ी चिंता मौसम है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग की 6 सितंबर को जारी Bihar warning में राज्य में heavy rain के साथ thunderstorm और lightning की चेतावनी दी गई है।
इसका मतलब है कि जिन इलाकों में नदी पहले से खतरे के निशान के आसपास या ऊपर है, वहां नई बारिश स्थिति को फिर बिगाड़ सकती है।
हालांकि हर जिले में समान मात्रा में बारिश नहीं होगी। इसलिए district-specific warning और प्रशासन की advisory को प्राथमिकता देना जरूरी है।
गांधी घाट पर गिरावट राहत, लेकिन खतरा खत्म नहीं
रविवार सुबह का सबसे महत्वपूर्ण positive signal गांधी घाट से आया है।
सुबह 7 बजे गंगा का स्तर 50.56 मीटर दर्ज हुआ और trend falling था। हाथीदह में जलस्तर steady और सुल्तानगंज में rising दर्ज किया गया।
यानी बिहार में सभी monitoring points पर एक जैसी स्थिति नहीं है।
कहीं पानी घट रहा है।
कहीं स्थिर है।
और कहीं अभी बढ़ रहा है।
इसलिए “पूरे बिहार में पानी उतरने लगा” कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
अगले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण
बिहार की बाढ़ अब दो चीजों पर निर्भर करेगी—
पहली, upstream और राज्य के भीतर होने वाली बारिश।
दूसरी, गंगा तथा उसकी सहायक नदियों के अलग-अलग monitoring points पर water-level trend।
फिलहाल 16 लाख से ज्यादा लोगों के प्रभावित होने के कारण राहत अभियान लंबा चल सकता है।
लोगों को नदी किनारे जाने, तेज बहाव पार करने या बच्चों को floodwater में जाने देने से बचना चाहिए। स्थानीय प्रशासन की evacuation advisory मिले तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बिहार के लिए राहत की पहली उम्मीद गांधी घाट पर दिखाई दे रही मामूली गिरावट है।
लेकिन रिकॉर्ड स्तर के आसपास बहती गंगा, कई नदियों का danger mark से ऊपर होना और नई बारिश की चेतावनी साफ बताती है कि संकट अभी टला नहीं है।












