नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026। दिल्ली-NCR में सोमवार सुबह अचानक मौसम बदल गया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश और गरज-चमक के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिली। हालांकि, कई इलाकों में जलभराव होने से सुबह कार्यालय जाने वाले लोगों और अन्य यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए भारी बारिश, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी।
दिल्ली में 40 मिमी बारिश दर्ज
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह 5:30 बजे तक दिल्ली के सफदरजंग मौसम केंद्र पर लगभग 40 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं, दिल्ली हवाई अड्डे पर इसी अवधि तक करीब 30 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई।
बारिश के कारण राजधानी के कई हिस्सों में सड़कें भीग गईं और कुछ स्थानों पर पानी जमा हो गया। करोल बाग के झंडेवालान मंदिर के आसपास जलभराव की सूचना सामने आई। आरके पुरम, कर्तव्य पथ और मध्य, दक्षिण-पूर्वी तथा पश्चिमी दिल्ली के कुछ हिस्सों में भी बारिश का असर देखने को मिला।
सुबह के व्यस्त समय में बारिश होने से यातायात प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई। जलभराव वाले मार्गों पर वाहनों की गति धीमी होने और दृश्यता कम होने से यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की जरूरत पड़ी।
IMD ने क्यों जारी किया रेड अलर्ट?
मौसम विभाग ने सोमवार सुबह दिल्ली के लिए रेड अलर्ट जारी किया था। चेतावनी के मुताबिक, कुछ इलाकों में एक घंटे में 15 मिलीमीटर से अधिक बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और लगभग 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना थी। सुबह 6 बजे जारी तत्काल चेतावनी सुबह 9 बजे तक प्रभावी थी।
हरियाणा और उत्तर प्रदेश के आसपास के कुछ क्षेत्रों के लिए भी मौसम संबंधी चेतावनी जारी की गई। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, मेरठ और आसपास के जिले शामिल थे।
रेड अलर्ट का मतलब है कि मौसम की स्थिति गंभीर हो सकती है और लोगों तथा संबंधित एजेंसियों को आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए। इसका यह अर्थ नहीं है कि हर इलाके में समान स्तर की बारिश या नुकसान होगा।
मानसून की विदाई के बाद बारिश क्यों?
उत्तर भारत के कई क्षेत्रों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के बाद भी बारिश होना असामान्य नहीं है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ और वातावरण में मौजूद अन्य मौसमी प्रणालियां मानसून की वापसी के बाद भी बारिश और गरज-चमक का कारण बन सकती हैं।
इंडिया टुडे की मौसम रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-NCR में सोमवार की बारिश के पीछे पश्चिमी विक्षोभ और वातावरण में बने अन्य मौसमी हालात की भूमिका रही। इन प्रणालियों के कारण अलग-अलग इलाकों में बारिश की तीव्रता में अंतर हो सकता है।
बारिश के बाद तापमान में गिरावट से लोगों को राहत मिली। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 13 अक्टूबर को दिल्ली का अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और 14 अक्टूबर को 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए आंशिक रूप से बादल छाए रहने और बारिश नहीं होने का भी पूर्वानुमान दिया था। मौसम की स्थिति में बदलाव होने पर पूर्वानुमान संशोधित हो सकता है।
लोगों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
बारिश और तेज हवाओं के दौरान लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।
घर से निकलने से पहले मौसम और यातायात की ताजा जानकारी जांचें।
जलभराव वाली सड़कों और अंडरपास से गुजरने से बचें।
बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें।
वाहन चलाते समय गति नियंत्रित रखें और आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखें।
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें।
दिल्ली-NCR में सोमवार की बारिश ने एक ओर गर्मी से राहत दी, वहीं दूसरी ओर जलभराव और यातायात संबंधी चुनौतियां भी सामने आईं। ऐसे में मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखना और सावधानी बरतना जरूरी है।
आपकी राय: क्या दिल्ली-NCR में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए बेहतर जल निकासी व्यवस्था और नियमित रखरखाव की जरूरत है? अपने इलाके का हाल कमेंट में बताएं।












