नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर नई चुनौती सामने आई है। भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम यानी CERT-In ने AI एजेंट्स से जुड़े संभावित सुरक्षा जोखिमों को लेकर चेतावनी जारी की है। एजेंसी के अनुसार AI एजेंट्स को यदि पर्याप्त सुरक्षा नियंत्रण के बिना संवेदनशील सिस्टम तक पहुंच दी जाती है तो वे संगठन के लिए गंभीर साइबर जोखिम पैदा कर सकते हैं।
AI एजेंट सामान्य चैटबॉट से अलग होते हैं। इन्हें केवल सवालों का जवाब देने के बजाय किसी काम को पूरा करने के लिए विभिन्न डिजिटल सिस्टम, एप्लीकेशन और डेटा तक पहुंच दी जा सकती है। यही क्षमता इन्हें उपयोगी बनाने के साथ-साथ सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील भी बनाती है।
लाइव सिस्टम तक पहुंच का खतरा
CERT-In के अनुसार AI एजेंट्स पर किए गए शोध और परीक्षणों के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें एजेंट अपने निर्धारित दायरे से आगे बढ़कर वास्तविक सिस्टम तक पहुंच गए। इस तरह की स्थिति में AI एजेंट संवेदनशील कारोबारी रिकॉर्ड, व्यक्तिगत जानकारी और गोपनीय डेटा तक पहुंच बना सकता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है कि AI एजेंट को यदि किसी संगठन के आंतरिक सिस्टम पर कार्रवाई करने की अनुमति दी गई है तो उसके गलत तरीके से इस्तेमाल होने की स्थिति में नुकसान सामान्य AI चैटबॉट की तुलना में काफी ज्यादा हो सकता है।
AI एजेंट और सामान्य AI में अंतर
सामान्य AI सिस्टम अक्सर उपयोगकर्ता के सवाल का जवाब देते हैं। इसके विपरीत AI एजेंट को किसी कार्य को पूरा करने के लिए विभिन्न टूल का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है।
उदाहरण के लिए किसी AI एजेंट को ईमेल पढ़ने, दस्तावेज तैयार करने, डेटाबेस से जानकारी लेने, किसी सॉफ्टवेयर में बदलाव करने या अन्य डिजिटल सेवाओं के साथ काम करने की अनुमति दी जा सकती है।
यही कारण है कि एजेंट को मिलने वाली अनुमति और उसके इस्तेमाल की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
कंपनियों के लिए बढ़ी चुनौती
भारत में कंपनियां तेजी से AI आधारित सिस्टम को अपने कामकाज में शामिल कर रही हैं। ग्राहक सेवा, डेटा विश्लेषण, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, कंटेंट निर्माण और प्रशासनिक कार्यों में AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
ऐसे में कंपनियों के लिए केवल AI मॉडल की क्षमता देखना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें यह भी तय करना होगा कि AI एजेंट को किस डेटा तक पहुंच दी जाए और वह किन सिस्टम में कार्रवाई कर सकता है।
यदि किसी AI एजेंट को जरूरत से ज्यादा अधिकार दिए जाते हैं तो किसी गलती, गलत निर्देश या साइबर हमले की स्थिति में नुकसान काफी बढ़ सकता है।
डेटा सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण
AI एजेंट्स के इस्तेमाल में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक डेटा सुरक्षा है। किसी कंपनी के पास ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी, वित्तीय रिकॉर्ड, कर्मचारियों की जानकारी और कारोबारी दस्तावेज हो सकते हैं।
यदि AI एजेंट को ऐसे डेटा तक पहुंच मिलती है तो उसके इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नियम जरूरी हैं। कंपनियों को यह तय करना चाहिए कि एजेंट किस प्रकार का डेटा पढ़ सकता है, कौन सा डेटा बदल सकता है और किन कार्यों के लिए मानव की अनुमति जरूरी होगी।
मानव निगरानी की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार AI एजेंट को पूरी तरह स्वतंत्र रूप से संवेदनशील काम करने की अनुमति देने के बजाय महत्वपूर्ण कार्यों पर मानव निगरानी रखना जरूरी है।
विशेष रूप से वित्तीय लेनदेन, संवेदनशील दस्तावेज, ग्राहक डेटा, पासवर्ड, प्रशासनिक अधिकार और उत्पादन सिस्टम जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा नियंत्रण आवश्यक हो सकते हैं।
AI एजेंट को सीमित अधिकार देना और केवल आवश्यक सिस्टम तक पहुंच उपलब्ध कराना साइबर जोखिम कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
छोटे कारोबार भी रहें सतर्क
AI से जुड़े साइबर जोखिम केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं। छोटे कारोबार और स्टार्टअप भी AI आधारित टूल का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं।
कई बार छोटे संगठनों में साइबर सुरक्षा के लिए अलग टीम नहीं होती। ऐसे में AI टूल को सीधे ईमेल, क्लाउड स्टोरेज या कंपनी के डेटाबेस से जोड़ना जोखिम पैदा कर सकता है।
कंपनियों को किसी भी AI एजेंट को सिस्टम से जोड़ने से पहले उसकी अनुमति, डेटा एक्सेस और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।
आने वाले समय में बढ़ेगा AI एजेंट्स का इस्तेमाल
AI एजेंट्स आने वाले समय में डिजिटल कामकाज का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। कंपनियां ऐसे सिस्टम विकसित कर रही हैं जो केवल जानकारी देने के बजाय स्वयं कई चरणों वाले कार्य पूरा कर सकें।
इससे काम की गति बढ़ सकती है और कर्मचारियों का समय बच सकता है। लेकिन जितनी अधिक स्वतंत्रता AI सिस्टम को दी जाएगी, उतनी ही मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत होगी।
भारत में AI के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनता जा रहा है। CERT-In की चेतावनी इसी बदलते साइबर वातावरण की ओर संकेत करती है।
संगठनों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए
किसी भी AI एजेंट को संवेदनशील सिस्टम से जोड़ने से पहले संगठन को उसकी अनुमति सीमित रखनी चाहिए। महत्वपूर्ण कार्यों के लिए मानव स्वीकृति की व्यवस्था, नियमित लॉगिंग, गतिविधियों की निगरानी और समय-समय पर सुरक्षा परीक्षण जरूरी हैं।
कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि AI एजेंट केवल उतने ही डेटा और सिस्टम तक पहुंच सके जितनी उसके काम के लिए वास्तव में आवश्यक है।
AI तकनीक कारोबार और प्रशासन को तेज और अधिक कुशल बना सकती है, लेकिन इसके साथ आने वाले साइबर जोखिमों को नजरअंदाज करना महंगा साबित हो सकता है। आने वाले समय में AI एजेंट्स का इस्तेमाल बढ़ने के साथ उनकी सुरक्षा, नियंत्रण और निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती जाएगी।












