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बिहार में बाढ़ का कहर: 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, 1,429 नावें और 37 Rescue Teams मैदान में; कटिहार तक Alert

बिहार में बाढ़ का कहर: 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, 12 जिलों में संकट; 1,429 नावें और 37 NDRF-SDRF टीमें मैदान में गंगा समेत कई नदियां खतरे के निशान से…

बिहार में बाढ़ का कहर: 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, 1,429 नावें और 37 Rescue Teams मैदान में; कटिहार तक Alert

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बिहार में बाढ़ का कहर: 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, 12 जिलों में संकट; 1,429 नावें और 37 NDRF-SDRF टीमें मैदान में

गंगा समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर, करीब 2.51 लाख लोगों को Community Kitchen में मिल रहा भोजन; पटना से कटिहार तक निगरानी तेज—सोन का पानी घटने से कुछ इलाकों में राहत की उम्मीद

पटना, 7 सितंबर 2026: बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर बना हुआ है। गंगा और दूसरी प्रमुख नदियों के उफान से राज्य के 12 जिलों में 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हो चुके हैं। गांवों, दियारा क्षेत्रों और निचले इलाकों में पानी भरने के बाद राज्य सरकार ने राहत और बचाव अभियान बड़े स्तर पर तेज कर दिया है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब राज्य में 1,429 नावें लोगों को निकालने और आवाजाही के लिए लगाई गई हैं। इसके अलावा 10 NDRF और 27 SDRF टीमें यानी कुल 37 disaster-response teams अलग-अलग प्रभावित इलाकों में तैनात हैं।

सबसे ज्यादा चिंता गंगा किनारे बसे जिलों को लेकर बनी हुई है।

हालांकि रविवार से एक राहत की खबर भी सामने आई है—सोन नदी से आने वाला पानी तेजी से कम हुआ है और कुछ इलाकों में floodwater धीरे-धीरे उतरने लगा है।

22 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंचा बाढ़ का असर

एक दिन पहले तक प्रभावित आबादी का आंकड़ा करीब 16.85 लाख बताया जा रहा था।

अब यह बढ़कर 22 लाख से ज्यादा हो गया है।

यानी केवल 24 घंटे के भीतर बाढ़ का दायरा और मानवीय असर काफी बढ़ा है।

सबसे बड़ी चुनौती उन परिवारों के सामने है जिनके घरों में पानी घुस चुका है या जिनके गांव का सड़क संपर्क टूट गया है।

कई जगह लोगों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों की तरफ जाना पड़ा है।

सरकार की तरफ से transportation, evacuation, food और medical assistance के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

1,429 नावें उतारी गईं

बाढ़ में सबसे बड़ी समस्या केवल घर में पानी घुसना नहीं होती।

जब गांव और मुख्य सड़क के बीच कई फीट पानी आ जाता है तो सामान्य जीवन लगभग रुक जाता है।

लोग अस्पताल नहीं पहुंच पाते।

दवा और राशन लाना मुश्किल हो जाता है।

बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना चुनौती बन जाता है।

इसी वजह से राज्य सरकार ने अब 1,429 boats को transportation और evacuation में लगाया है।

जहां सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित है, वहां यही नावें लोगों के लिए lifeline बन रही हैं।

2.51 लाख लोगों का खाना Community Kitchen से

बाढ़ प्रभावित इलाकों में भोजन की समस्या भी गंभीर है।

घर के अंदर पानी होने के कारण हजारों परिवारों के लिए चूल्हा जलाना संभव नहीं है।

Disaster Management Department के मुताबिक इस समय community kitchens के जरिए करीब 2.51 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

यह आंकड़ा बताता है कि flood relief अब केवल rescue operation नहीं रह गया है।

लाखों लोगों के लिए रोजाना भोजन, साफ पानी, चिकित्सा और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

Boat Ambulance और 171 Medical Camps

बाढ़ के बीच बीमारी या medical emergency सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होती है।

सामान्य ambulance ऐसे गांवों तक नहीं पहुंच सकती जहां सड़क कई फीट पानी में डूबी हो।

इसीलिए प्रभावित क्षेत्रों में boat ambulances का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इसके साथ medical camps की संख्या बढ़ाकर 171 कर दी गई है।

Pregnant women, बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए ऐसी व्यवस्था विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

बाढ़ के बाद contaminated water से diarrhea, skin infections और दूसरी water-borne diseases का खतरा भी बढ़ सकता है।

इसलिए आने वाले दिनों में health surveillance भी relief operation का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

37 NDRF-SDRF टीमें तैनात

राज्य में इस समय NDRF की 10 और SDRF की 27 टीमें तैनात हैं।

कुल मिलाकर 37 specialised rescue teams अलग-अलग flood-affected क्षेत्रों में काम कर रही हैं।

इनका काम केवल फंसे लोगों को निकालना नहीं है।

जरूरत पड़ने पर evacuation, emergency transportation और local administration को rescue support भी दिया जा रहा है।

गंगा के तटबंधों पर विशेष निगरानी बढ़ाई गई है।

कटिहार तक विशेष निगरानी

Seemanchal के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि downstream Ganga belt में कटिहार भी लगातार निगरानी वाले जिलों में शामिल है।

जल संसाधन विभाग ने गंगा किनारे बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार के vulnerable locations तथा embankments पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।

यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि upstream में आया पानी समय के साथ downstream जिलों की तरफ बढ़ता है।

कटिहार के कई riverine और low-lying क्षेत्रों में पहले से बाढ़ का असर दिखाई दे चुका है।

ऐसे में जलस्तर में छोटी बढ़ोतरी भी स्थानीय स्तर पर बड़ी परेशानी पैदा कर सकती है।

गंगा अभी भी खतरे के निशान से ऊपर

आज सुबह की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक बिहार में गंगा और कई दूसरी नदियां अब भी danger mark से ऊपर बह रही हैं।

हालांकि तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है।

कुछ इलाकों में floodwater धीरे-धीरे कम होने के संकेत मिले हैं।

सबसे महत्वपूर्ण राहत सोन नदी से आई है।

सोन से आई राहत की खबर

सोन नदी के Indrapuri Barrage से discharge में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक बुधवार को यह करीब 5.54 लाख cusecs था।

रविवार दोपहर तक यह घटकर करीब—

1.96 लाख cusecs

रह गया।

यह कमी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सोन नदी पटना के पास गंगा में मिलती है।

सोन से कम पानी आने का मतलब है कि Digha और Gandhi Ghat के आसपास गंगा पर अतिरिक्त दबाव कुछ कम हो सकता है।

क्या अब बाढ़ खत्म होने वाली है?

अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।

पानी का कुछ जगह उतरना सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन लाखों लोग अभी भी प्रभावित हैं।

इसके अलावा बिहार की flood situation केवल स्थानीय बारिश पर निर्भर नहीं करती।

नेपाल और उत्तर बिहार के catchment areas में होने वाली बारिश का असर कोसी, गंडक और दूसरी नदियों पर तेजी से दिखाई दे सकता है।

इसलिए प्रशासन को आने वाले दिनों में भी सतर्क रहना होगा।

Rail Network पर भी असर

बाढ़ अब केवल गांव और सड़क तक सीमित नहीं है।

आज बिहार में railway operations भी प्रभावित हुए हैं।

Akashvani की रिपोर्ट के मुताबिक Jamalpur-Bhagalpur rail section पर Sultanganj और Ratanpur के बीच railway tracks पानी में डूबने के बाद train services रोकनी पड़ी हैं।

गंगा का बढ़ा पानी rail bridge के girder तक पहुंच रहा है।

इसके कारण आज Bhagalpur-Danapur Intercity Express और Patna-Dumka Express समेत चार trains रद्द की गई हैं।

यात्रियों के लिए यह महत्वपूर्ण public-service information है।

Seemanchal के लिए अभी खतरा टला नहीं

पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज के लिए इस पूरे flood cycle को केवल पटना या मध्य बिहार की समस्या समझना गलत होगा।

विशेष रूप से कटिहार गंगा और महानंदा river systems के कारण संवेदनशील है।

अगर upstream discharge और बारिश फिर बढ़ती है तो downstream pressure बदल सकता है।

इसलिए कटिहार के दियारा और नदी किनारे के लोगों को district administration की advisories पर नजर रखनी चाहिए।

अफवाह या social-media message के आधार पर flood level का अनुमान लगाने के बजाय official information पर भरोसा करना ज्यादा सुरक्षित है।

अब सबसे बड़ी चुनौती Relief की

पानी उतरने के बाद भी बाढ़ खत्म नहीं होती।

असल में उसके बाद दूसरा संकट शुरू होता है—

घर की सफाई,

पीने का साफ पानी,

बिजली,

खराब सड़कें,

फसल का नुकसान,

पशुओं के लिए चारा,

बीमारियों का खतरा

और विस्थापित परिवारों की घर वापसी।

22 लाख से ज्यादा प्रभावित लोगों का आंकड़ा बताता है कि बिहार के लिए यह केवल कुछ दिनों का rescue operation नहीं रहने वाला।

आने वाले दिनों में rehabilitation भी उतना ही बड़ा मुद्दा बनेगा।

आज की स्थिति का सार

12 जिले प्रभावित।

22 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में।

1,429 नावें तैनात।

171 medical camps।

करीब 2.51 लाख लोगों को community kitchens से भोजन।

10 NDRF और 27 SDRF टीमें मैदान में।

और इन सबके बीच एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण राहत—

सोन नदी का discharge 5.54 लाख cusecs से घटकर करीब 1.96 लाख cusecs पर आ गया है।

इससे पटना के आसपास गंगा पर दबाव कुछ कम होने की उम्मीद है।

लेकिन कटिहार समेत downstream जिलों के लिए सतर्कता अभी भी बेहद जरूरी है।

बिहार की बाढ़ की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है—अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पानी कितनी तेजी से उतरता है और 22 लाख से ज्यादा प्रभावित लोगों तक राहत कितनी तेजी से पहुंचती है।

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