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Politics

खतवे जाति को SC का दर्जा देने के खिलाफ PIL, पटना हाईकोर्ट जल्द करेगी सुनवाई — सरकार के फैसले पर उठे संवैधानिक सवाल

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के माहौल के बीच एक नई कानूनी बहस ने सियासत को गर्मा दिया है। खतवे जाति को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। यह याचिका राजीव कुमार की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार पंकज के माध्यम से दायर की गई है। ⚖️ सरकार के फैस

खतवे जाति को SC का दर्जा देने के खिलाफ PIL, पटना हाईकोर्ट जल्द करेगी सुनवाई — सरकार के फैसले पर उठे संवैधानिक सवाल

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पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के माहौल के बीच एक नई कानूनी बहस ने सियासत को गर्मा दिया है। खतवे जाति को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। यह याचिका राजीव कुमार की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार पंकज के माध्यम से दायर की गई है। ⚖️ सरकार के फैसले पर सवाल याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि बिहार सरकार ने 16 मई 2014 को परिपत्र संख्या 6455 जारी कर खतवे जाति को अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) की सूची से हटा दिया और चौपाल जाति के नाम पर अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र देने का निर्देश दिया। राजीव कुमार ने आरोप लगाया कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 341 और केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करता है, क्योंकि अनुसूचित जाति की सूची में संशोधन का अधिकार केवल संसद को है। 📜 केंद्र सरकार की आपत्ति इस पर भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 12 दिसंबर 2018 को एक पत्र जारी कर कहा था कि — “बिहार सरकार का यह निर्णय असंवैधानिक और गैरकानूनी है। राज्य सरकार को इस संबंध में जारी आदेश तत्काल निरस्त करना चाहिए।” फिर भी राज्य सरकार द्वारा खतवे जाति के लोगों को चौपाल जाति के नाम पर SC प्रमाण पत्र जारी करना जारी रहा , जिसके बाद अब इस मामले में जनहित याचिका दायर हुई है। ⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश राजीव कुमार ने पहले इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने यह कहते हुए याचिका वापस पटना हाईकोर्ट भेज दी कि — “राज्य से संबंधित मुद्दा होने के कारण यह मामला हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है।” अब पटना हाईकोर्ट इस मामले की शीघ्र सुनवाई करने जा रहा है। 📢 अधिवक्ता विकास कुमार पंकज का बयान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने बताया — “बिहार सरकार ने इसी तरह का आदेश 2015 में ‘तांति-ततवा जाति’ को लेकर भी जारी किया था। तब उसे ‘पान जाति’ के नाम पर SC प्रमाण पत्र देने का निर्देश दिया गया था।” उन्होंने कहा — “सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में ‘भीमराव अंबेडकर विचार मंच बनाम बिहार सरकार’ केस में ऐसा ही आदेश रद्द कर दिया था और सरकार पर कड़ी टिप्पणी की थी। यह मामला भी उसी तरह का है।” 📊 खतवे जाति: कौन हैं और क्यों है विवाद? श्रेणी जानकारी जाति का नाम खतवे जाति वर्तमान वर्गीकरण अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) सरकारी निर्णय 2014 में EBC से हटाकर चौपाल जाति के साथ SC सूची में जोड़ा गया विवाद का कारण संविधान के अनुच्छेद 341 का उल्लंघन और केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना परिवर्तन केंद्र सरकार की स्थिति बिहार सरकार के आदेश को “गैरकानूनी” बताया गया सुप्रीम कोर्ट संदर्भ समान केस (तांति-ततवा जाति) में 2024 में बिहार सरकार की अधिसूचना रद्द 🧾 खतवे समुदाय की सामाजिक पृष्ठभूमि खतवे जाति बिहार में पारंपरिक रूप से खेती, हस्तकला और चौकीदारी कार्यों से जुड़ी रही है। यह जाति ऐतिहासिक रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी मानी जाती है। कई इलाकों में इसे “चौपाल जाति” के समान समझा जाता है, लेकिन संविधान की सूची में दोनों के बीच कोई औपचारिक एकरूपता नहीं है। 🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रिया हालांकि अभी तक राज्य सरकार ने इस मामले पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि यह मामला जातीय राजनीति के दुरुपयोग का उदाहरण है। JDU और BJP इसे “ कानूनी सीमाओं से परे लिया गया निर्णय ” बता रहे हैं, वहीं RJD और कुछ क्षेत्रीय दलों का तर्क है कि खतवे समाज को सामाजिक न्याय के दायरे में लाना आवश्यक था। ⚖️ संवैधानिक दृष्टिकोण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341(1) के अनुसार, “किसी राज्य में अनुसूचित जाति के रूप में किसी जाति को शामिल या बहिष्कृत करने का अधिकार केवल राष्ट्रपति और संसद के पास है।” इस प्रावधान के अनुसार राज्य सरकार अकेले किसी जाति को SC सूची में शामिल नहीं कर सकती। यही कारण है कि इस आदेश की वैधता पर अब कानूनी सवाल उठ खड़े हुए हैं। 📌 निष्कर्ष खतवे जाति को SC दर्जा देने का मामला केवल सामाजिक न्याय या राजनीतिक रणनीति का नहीं, बल्कि संवैधानिक व्याख्या का विषय बन गया है। जहाँ एक ओर बिहार सरकार इसे पिछड़े वर्ग के उत्थान से जोड़कर देखती है, वहीं अदालत में यह साबित करना होगा कि क्या यह निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करता है या नहीं। अब निगाहें पटना उच्च न्यायालय पर हैं, जो इस मामले की अगली सुनवाई जल्द करेगा। 🔗 बाहरी स्रोत (External Links): 👉 Ministry of Social Justice & Empowerment – SC List Updates 👉 Patna High Court – Case Listings ❓ FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) Q1. खतवे जाति को SC दर्जा कब दिया गया था? 2014 में बिहार सरकार ने परिपत्र जारी कर चौपाल जाति के नाम पर खतवे जाति को SC श्रेणी में जोड़ा था। Q2. याचिका किसने दायर की है? राजीव कुमार नामक नागरिक ने अधिवक्ता विकास कुमार पंकज के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है। Q3. केंद्र सरकार का रुख क्या है? केंद्र ने 2018 में बिहार सरकार के आदेश को असंवैधानिक बताया था। Q4. सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मामला पटना हाईकोर्ट में रखने का निर्देश दिया है। Q5. खतवे जाति किस वर्ग में आती है? वर्तमान में खतवे जाति अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) की सूची में है। Q6. इस मामले का असर क्या हो सकता है? अगर हाईकोर्ट ने सरकार का आदेश रद्द किया, तो हजारों खतवे परिवारों के SC प्रमाण पत्र निरस्त हो सकते हैं।

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