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गुजरात को 35 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात, रेल और सड़क नेटवर्क को मिलेगा नया विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रेल, सड़क और दूसरी विकास परियोजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं का…

गुजरात को 35 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात, रेल और सड़क नेटवर्क को मिलेगा नया विस्तार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रेल, सड़क और दूसरी विकास परियोजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य माल परिवहन को तेज करना, औद्योगिक क्षेत्रों की संपर्क व्यवस्था मजबूत बनाना और आम लोगों के लिए यात्रा को सुविधाजनक बनाना है। इनमें पश्चिमी समर्पित माल गलियारे के महत्वपूर्ण हिस्से और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ी कई परियोजनाएं शामिल हैं।

प्रधानमंत्री के गुजरात दौरे का मुख्य कार्यक्रम वडोदरा में आयोजित किया गया। यहां से उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में तैयार परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया और नई योजनाओं की आधारशिला रखी। केंद्र सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से गुजरात के साथ मध्य प्रदेश तथा पश्चिमी भारत के दूसरे हिस्सों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा।

इस विकास पैकेज का सबसे महत्वपूर्ण भाग पश्चिमी समर्पित माल गलियारा यानी वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर है। इसके तीन खंडों को पूरी तरह परिचालन में लाने की तैयारी की गई है। यह विशेष रेल गलियारा मुख्य रूप से मालगाड़ियों के लिए विकसित किया गया है। इसके शुरू होने से सामान्य रेलवे लाइनों पर मालगाड़ियों का दबाव कम होगा और यात्री ट्रेनों को समय पर चलाने में सहायता मिलेगी।

अभी देश के कई व्यस्त रेल मार्गों पर यात्री और मालगाड़ियां एक ही पटरी का उपयोग करती हैं। मालगाड़ियों की गति कम होने और उनके लंबे समय तक ट्रैक पर रहने के कारण यात्री ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ता है। समर्पित माल गलियारा इस समस्या को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भारी सामान और औद्योगिक उत्पादों को बंदरगाहों तथा बाजारों तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा।

गुजरात देश का महत्वपूर्ण औद्योगिक और समुद्री व्यापार केंद्र है। राज्य में कई बड़े बंदरगाह, पेट्रोकेमिकल उद्योग, ऑटोमोबाइल इकाइयां, दवा कंपनियां और कपड़ा उद्योग स्थित हैं। तेज माल परिवहन से इन उद्योगों की लागत कम हो सकती है। कच्चा माल समय पर कारखानों तक पहुंचेगा और तैयार उत्पादों को देश के अलग-अलग बाजारों तथा बंदरगाहों तक भेजना आसान होगा।

नई रेल परियोजनाओं से मध्य प्रदेश के औद्योगिक इलाकों को भी गुजरात के बंदरगाहों से बेहतर संपर्क मिलने की उम्मीद है। सड़क के मुकाबले रेल से बड़ी मात्रा में माल भेजना अपेक्षाकृत कम खर्चीला होता है। इससे सड़कों पर भारी वाहनों की संख्या कम करने और ईंधन की खपत घटाने में भी मदद मिल सकती है। व्यवस्थित रेल परिवहन से प्रदूषण और दुर्घटनाओं का खतरा कम होने की संभावना रहती है।

प्रधानमंत्री ने लगभग 1,780 करोड़ रुपये की राजमार्ग परियोजनाओं का भी उद्घाटन अथवा शिलान्यास किया। सड़क परियोजनाओं का उद्देश्य शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों और ग्रामीण इलाकों के बीच संपर्क बेहतर बनाना है। नई और चौड़ी सड़कें बनने से यात्रा का समय कम होगा तथा व्यापारिक वाहनों की आवाजाही अधिक सुविधाजनक हो सकेगी।

बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का प्रभाव केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर श्रमिकों, इंजीनियरों, वाहन चालकों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं के लिए रोजगार पैदा होता है। परियोजनाएं पूरी होने के बाद सड़क किनारे होटल, ढाबे, गोदाम, परिवहन केंद्र और दूसरी सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है। इससे छोटे व्यापारियों तथा स्थानीय उद्यमियों को नए अवसर मिलते हैं।

बेहतर परिवहन व्यवस्था कृषि उत्पादों के लिए भी महत्वपूर्ण है। किसान फल, सब्जियां, दूध और दूसरी जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं कम समय में मंडियों या प्रसंस्करण केंद्रों तक पहुंचा सकते हैं। यदि माल परिवहन की लागत कम होती है तो उसका लाभ किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को मिल सकता है। इसके लिए रेलवे टर्मिनल, कोल्ड स्टोरेज और स्थानीय संपर्क सड़कों का एक साथ विकास जरूरी होगा।

केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से सड़क, रेलवे, बंदरगाह और लॉजिस्टिक नेटवर्क को एक-दूसरे से जोड़ने पर जोर दे रही है। सरकार का मानना है कि परिवहन में लगने वाला समय और लागत कम होने से भारतीय उद्योग वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा। पश्चिमी समर्पित माल गलियारे को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि इतनी बड़ी परियोजनाओं के वास्तविक लाभ का मूल्यांकन केवल उद्घाटन के आधार पर नहीं किया जा सकता। यह देखना भी जरूरी होगा कि सभी खंड निर्धारित क्षमता के अनुसार काम कर रहे हैं या नहीं। माल टर्मिनलों तक स्थानीय सड़क संपर्क, सुरक्षा, नियमित रखरखाव और समय पर ट्रेन संचालन परियोजना की सफलता के लिए आवश्यक होंगे।

भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राजमार्ग या रेल गलियारे के निर्माण में कृषि भूमि और स्थानीय संसाधनों का उपयोग होता है। इसलिए मुआवजे का समय पर भुगतान, पुनर्वास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन जरूरी है। विकास परियोजनाओं को तभी सफल माना जाएगा जब स्थानीय समुदायों की चिंताओं का समाधान भी किया जाए।

गुजरात की इन परियोजनाओं से बिहार और सीमांचल के लिए भी कुछ महत्वपूर्ण सबक निकलते हैं। सीमांचल में कृषि उत्पादन और श्रम शक्ति की कमी नहीं है, लेकिन बेहतर रेल, सड़क, भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव में क्षेत्र अपनी पूरी आर्थिक क्षमता का उपयोग नहीं कर पाता। पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज को पूर्वोत्तर भारत, नेपाल और बंगाल से जोड़ने वाला आधुनिक लॉजिस्टिक नेटवर्क विकसित किया जाए तो यहां भी व्यापार और रोजगार बढ़ सकता है।

कटिहार पहले से एक महत्वपूर्ण रेलवे केंद्र है, जबकि पूर्णिया तेजी से क्षेत्रीय व्यापारिक शहर के रूप में विकसित हो रहा है। इन दोनों शहरों के आसपास आधुनिक माल टर्मिनल, गोदाम और कोल्ड चेन तैयार करने से मक्का, मखाना, जूट, चाय, फल और सब्जियों के कारोबार को नई गति मिल सकती है। गुजरात का औद्योगिक मॉडल दिखाता है कि मजबूत परिवहन नेटवर्क क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को किस तरह बदल सकता है।

प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं गुजरात के बुनियादी ढांचे में बड़ा विस्तार हैं। यदि इनका संचालन पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से हुआ तो उद्योग, व्यापार, कृषि तथा रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही यह सवाल भी प्रासंगिक रहेगा कि सीमांचल जैसे पिछड़े क्षेत्रों को इसी स्तर की रेल, सड़क और लॉजिस्टिक परियोजनाएं कब मिलेंगी।

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