नई दिल्ली। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर के बढ़ते इस्तेमाल के बीच Tata Communications ने डिजिटल नेटवर्क के विस्तार की बड़ी योजना पेश की है। 27 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी भारत में AI Super Highway विकसित करने के लिए करीब 450 मिलियन डॉलर यानी लगभग 400 से 450 मिलियन डॉलर के निवेश की योजना पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य देश के प्रमुख AI डेटा सेंटरों को तेज और कम विलंबता वाले नेटवर्क से जोड़ना है।
कंपनी की योजना के तहत लगभग 10,000 किलोमीटर नई लंबी दूरी की फाइबर नेटवर्क लाइन विकसित की जाएगी। इससे बड़े डेटा सेंटरों के बीच डेटा का आदान-प्रदान अधिक तेज और भरोसेमंद बनाने में मदद मिल सकती है।
किन शहरों को मिलेगा फायदा?
रिपोर्ट के मुताबिक, परियोजना का पहला चरण मुंबई, पुणे, हैदराबाद और चेन्नई को जोड़ने वाले कॉरिडोर पर केंद्रित होगा। आगे चलकर विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, जामनगर और GIFT City जैसे उभरते डेटा सेंटर केंद्रों तक नेटवर्क का विस्तार करने की योजना है।
AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए बड़ी मात्रा में डेटा को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजना पड़ता है। ऐसे में मजबूत फाइबर नेटवर्क AI कंपनियों, क्लाउड सेवा प्रदाताओं और बड़े कारोबारों के लिए महत्वपूर्ण बन जाता है।
भारत के AI कारोबार के लिए क्यों अहम है यह निवेश?
AI आधारित सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सेंटरों के बीच तेज कनेक्टिविटी की मांग बढ़ रही है। नया नेटवर्क कंपनियों को AI वर्कलोड, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल कारोबार को अधिक कुशलता से चलाने में मदद कर सकता है।
हालांकि, परियोजना का वास्तविक प्रभाव नेटवर्क निर्माण की समयसीमा, ग्राहकों की मांग और उपलब्ध क्षमता पर निर्भर करेगा। कंपनी के लिए निवेश के साथ-साथ नेटवर्क की विश्वसनीयता और लागत को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
भारत में AI और डेटा सेंटर उद्योग का विस्तार होने के साथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर आने वाले वर्षों में टेक्नोलॉजी क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
आपकी राय: क्या भारत को AI के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए डेटा सेंटर और हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क में और निवेश करना चाहिए? अपनी राय कमेंट में बताएं।












