अपने जिले की आवाज़ बनें! Seemanchal Live में रिपोर्टर बनने के लिए अभी आवेदन करें।
BREAKING
उड़ते विमान के टॉयलेट में मिला ‘BOMB’ लिखा टिश्यू: अहमदाबाद में Emergency Landing, अब सभी 32 यात्रियों की लिखावट की जांचCBSE ने CTET September 2026 की परीक्षा टालने के बाद दोबारा खोली थी Application Window; नई Exam Date CTET 2026 के लिए आवेदन करने की आज अंतिम तारीख है।सिंधु जल संधि पर भारत का पाकिस्तान को दो टूक जवाब: Hague के फैसले को किया खारिज, कहा—हमारा फैसला नहीं बदलेगाDeoria News: अवैध शराब व बियर की खेप के साथ बिहार के 2 तस्कर गिरफ्तारकौन हैं जस्टिस हरीश कुमार, जिन्हें बिहार सरकार ने बनाया परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति का अध्यक्षNITI आयोग से बिहार के लिए बैड न्यूज, इनवेस्टमेंट इंडेक्स में 26वां पायदान, जानिए नंबर वन कौन?भारत-नेपाल सीमा पर 36 लीटर शराब बरामद: भिठ्ठा पुलिस ने तस्कर को किया गिरफ्तार, बाइक जब्त कर न्यायिक हिरासत ...SSB कैंप के पास कैसे खड़े हो गए अवैध गोदाम? खाद, गांजा और ब्राउन शुगर की तस्करी का सेफ जोन बना भारत-नेपाल बॉर्डरAaj Ka Mausam: बंगाल की खाड़ी ने बदला देश का मौसम, MP से UP-बिहार तक आंधी-बारिश, IMD का अलर्टJamui News: सहयोग शिविर में सुनी गई लोगों की समस्या समाधान का मिला आश्वासनभारतीय टीम में बिहार के आठ खिलाड़ी चयनितउड़ते विमान के टॉयलेट में मिला ‘BOMB’ लिखा टिश्यू: अहमदाबाद में Emergency Landing, अब सभी 32 यात्रियों की लिखावट की जांचCBSE ने CTET September 2026 की परीक्षा टालने के बाद दोबारा खोली थी Application Window; नई Exam Date CTET 2026 के लिए आवेदन करने की आज अंतिम तारीख है।सिंधु जल संधि पर भारत का पाकिस्तान को दो टूक जवाब: Hague के फैसले को किया खारिज, कहा—हमारा फैसला नहीं बदलेगाDeoria News: अवैध शराब व बियर की खेप के साथ बिहार के 2 तस्कर गिरफ्तारकौन हैं जस्टिस हरीश कुमार, जिन्हें बिहार सरकार ने बनाया परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति का अध्यक्षNITI आयोग से बिहार के लिए बैड न्यूज, इनवेस्टमेंट इंडेक्स में 26वां पायदान, जानिए नंबर वन कौन?भारत-नेपाल सीमा पर 36 लीटर शराब बरामद: भिठ्ठा पुलिस ने तस्कर को किया गिरफ्तार, बाइक जब्त कर न्यायिक हिरासत ...SSB कैंप के पास कैसे खड़े हो गए अवैध गोदाम? खाद, गांजा और ब्राउन शुगर की तस्करी का सेफ जोन बना भारत-नेपाल बॉर्डरAaj Ka Mausam: बंगाल की खाड़ी ने बदला देश का मौसम, MP से UP-बिहार तक आंधी-बारिश, IMD का अलर्टJamui News: सहयोग शिविर में सुनी गई लोगों की समस्या समाधान का मिला आश्वासनभारतीय टीम में बिहार के आठ खिलाड़ी चयनित

Article Advertisement

India

सिंधु जल संधि पर भारत का पाकिस्तान को दो टूक जवाब: Hague के फैसले को किया खारिज, कहा—हमारा फैसला नहीं बदलेगा

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पैनल ने कहा 1960 की Indus Waters Treaty लागू रहेगी और भारत को उसका पालन करना होगा; नई दिल्ली ने tribunal को ही अवैध बताते हुए साफ…

सिंधु जल संधि पर भारत का पाकिस्तान को दो टूक जवाब: Hague के फैसले को किया खारिज, कहा—हमारा फैसला नहीं बदलेगा

Article Advertisement

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पैनल ने कहा 1960 की Indus Waters Treaty लागू रहेगी और भारत को उसका पालन करना होगा; नई दिल्ली ने tribunal को ही अवैध बताते हुए साफ किया—संधि को ‘abeyance’ में रखने का फैसला कायम, Ratle Hydroelectric Project पर आदेश भी स्वीकार नहीं नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026: भारत और पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर बड़े अंतरराष्ट्रीय टकराव में बदल गया है। The Hague स्थित Court of Arbitration ने कहा है कि Indus Waters Treaty यानी सिंधु जल संधि पूरी तरह लागू है और भारत इसे एकतरफा तरीके से निलंबित या समाप्त नहीं कर सकता। Tribunal ने जम्मू-कश्मीर में बन रहे Ratle Hydroelectric Project के कुछ निर्माण कार्यों पर भी अस्थायी पाबंदियां लगाई हैं। लेकिन भारत ने इस फैसले को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत इस arbitration body को कानूनी रूप से मान्यता ही नहीं देता और उसके मौजूदा या भविष्य के फैसलों का भारत की कार्रवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात— भारत ने साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि को ‘abeyance’ में रखने का उसका फैसला अभी भी कायम है। यानी अब स्थिति बेहद दिलचस्प है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय arbitration panel कह रहा है—Treaty लागू है। दूसरी तरफ भारत कह रहा है—हम उस panel को ही नहीं मानते। 65 साल पुराना समझौता फिर दुनिया की नजर में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। World Bank की मध्यस्थता से बने इस समझौते ने Indus river system की छह प्रमुख नदियों के पानी के इस्तेमाल की व्यवस्था तय की। मोटे तौर पर रावी, ब्यास और सतलुज जैसी पूर्वी नदियों का पानी भारत के लिए निर्धारित किया गया, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों के अधिकांश पानी के उपयोग का अधिकार पाकिस्तान को मिला। भारत को पश्चिमी नदियों पर भी कुछ सीमित उपयोग की अनुमति है, जिसमें निर्धारित शर्तों के तहत run-of-river hydroelectric projects बनाना शामिल है। इस समझौते की खास बात यह थी कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध और लंबे राजनीतिक तनाव के बावजूद यह दशकों तक कायम रहा। लेकिन 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद परिस्थितियां बदल गईं। पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया बड़ा फैसला अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर cross-border terrorism को समर्थन देने का आरोप लगाया। पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया। इसके बाद नई दिल्ली ने सिंधु जल संधि को abeyance में रखने का फैसला किया। भारत का रुख था कि सीमा पार आतंकवाद और पानी के क्षेत्र में सामान्य सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। यहीं से दशकों पुरानी Treaty का भविष्य अनिश्चित हो गया। अब Hague के Arbitration Panel ने क्या कहा? 31 अगस्त को Court of Arbitration ने दो महत्वपूर्ण फैसले दिए। पहला— उसने कहा कि भारत द्वारा Treaty को abeyance में रखने के लिए बताए गए आधार संधि को suspend या terminate करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। Panel के मुताबिक Treaty में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके जरिए भारत या पाकिस्तान में से कोई एक देश इसे अकेले समाप्त या suspend कर सके। उसके अनुसार Treaty को बदलने या खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच नया समझौता आवश्यक होगा। लेकिन यहीं से भारत और tribunal के बीच मूल विवाद शुरू होता है। भारत बोला—जिस Court को मानते ही नहीं, उसका फैसला क्यों मानें? नई दिल्ली का तर्क अलग है। भारत का कहना है कि यह Court of Arbitration Treaty की व्यवस्था के विपरीत गठित किया गया था और इसलिए इसकी कानूनी वैधता ही नहीं है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत ने इस arbitration proceeding में हिस्सा भी नहीं लिया। MEA ने कहा कि यह body भारत के sovereign decisions पर फैसला सुनाने का अधिकार नहीं रखती और इसके आदेशों का भारत की परियोजनाओं पर कोई प्रभाव नहीं होगा। इसलिए भारत का जवाब केवल— “हम फैसले से सहमत नहीं हैं” तक सीमित नहीं है। भारत असल में कह रहा है— “हम इस tribunal की authority को ही स्वीकार नहीं करते।” Ratle Hydroelectric Project पर भी बड़ा विवाद मामले का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बन रहा Ratle Hydroelectric Project है। Arbitration panel ने project के कुछ construction works पर temporary restrictions लगाई हैं। AP के अनुसार India को dam wall और power-intake structure के कुछ हिस्सों में निर्धारित स्तर से आगे concrete डालने से रोका गया है। ये restrictions तब तक लागू रहने की बात कही गई है जब तक World Bank-appointed Neutral Expert project design के Treaty के अनुरूप होने पर फैसला नहीं देता और उसके बाद निर्धारित अवधि पूरी नहीं होती। Neutral Expert का final decision जुलाई 2027 के आसपास आने की उम्मीद है। भारत ने इस arbitration order को भी स्वीकार नहीं किया है। एक ही विवाद में दो अलग प्रक्रियाएं कैसे? यह technical लग सकता है, लेकिन पूरे विवाद की जड़ समझने के लिए यह महत्वपूर्ण है। भारत का कहना रहा है कि Ratle और Kishenganga projects से जुड़े technical disputes के लिए पहले ही Neutral Expert की प्रक्रिया मौजूद है। नई दिल्ली का तर्क है कि उसी विवाद पर parallel arbitration proceeding चलाना Treaty की dispute-resolution व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर भारत Court of Arbitration के गठन का विरोध करता रहा है। यानी विवाद केवल पानी पर नहीं है। विवाद इस बात पर भी है कि विवाद का फैसला करेगा कौन। पाकिस्तान ने फैसले का किया स्वागत पाकिस्तान ने arbitration panel के निर्णय को अपने पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला माना है। इस्लामाबाद का कहना है कि इससे उसकी यह स्थिति मजबूत हुई है कि भारत एकतरफा तरीके से Indus Waters Treaty को suspend नहीं कर सकता। Pakistan ने उम्मीद जताई है कि इस निर्णय से दोनों देशों के बीच Treaty framework के भीतर फिर engagement की संभावना बन सकती है। लेकिन भारत की प्रतिक्रिया को देखते हुए फिलहाल ऐसा होना आसान नहीं दिखाई देता। नई दिल्ली का रुख बेहद स्पष्ट है— Treaty abeyance में है और arbitration panel के फैसले भारत की कार्रवाई नहीं बदलेंगे। पाकिस्तान के लिए पानी इतना बड़ा मुद्दा क्यों? Pakistan की agriculture और economy Indus river system पर बहुत अधिक निर्भर है। इसलिए सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी से जुड़ा कोई भी बड़ा बदलाव वहां केवल foreign-policy issue नहीं रहता। वह food security, irrigation और national security का मुद्दा बन जाता है। यही वजह है कि भारत द्वारा Treaty को abeyance में रखने के बाद पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे को international legal और diplomatic forums पर उठा रहा है। क्या भारत पाकिस्तान का पानी तुरंत रोक सकता है? यहीं सबसे बड़ी गलतफहमी दूर करना जरूरी है। Treaty को abeyance में रखने का मतलब यह नहीं है कि भारत किसी नल का switch बंद करके अगले दिन पाकिस्तान जाने वाला सारा पानी रोक सकता है। नदी का विशाल flow नियंत्रित करने, store करने या दूसरी दिशा में divert करने के लिए बड़े dams, reservoirs, canals और दूसरे infrastructure की जरूरत होती है। ऐसे projects बनने में वर्षों लग सकते हैं। इसलिए वर्तमान विवाद का तत्काल महत्व पानी की physical supply से जितना जुड़ा है, उतना ही भारत की भविष्य की infrastructure policy और Treaty obligations से भी जुड़ा है। भारत अब तेजी से बढ़ा सकता है अपने Projects? Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक भारत Indus system की इन नदियों पर जम्मू-कश्मीर में लगभग ₹50,000 करोड़ के आठ infrastructure projects पर काम कर रहा है। Treaty के लागू रहने या न रहने का सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे इन projects के design और पानी के इस्तेमाल से जुड़ी सीमाओं पर सीधा असर पड़ सकता है। भारत का कहना है कि arbitration panel के orders उसके projects पर प्रभाव नहीं डालेंगे। यहीं आने वाले महीनों में असली confrontation दिखाई दे सकता है। मामला अब पानी से आगे बढ़ चुका है Indus Waters Treaty को केवल river-water dispute समझना अब पर्याप्त नहीं है। इसके साथ चार बड़े मुद्दे जुड़ चुके हैं— आतंकवाद। भारत-पाकिस्तान संबंध। अंतरराष्ट्रीय कानून। और जम्मू-कश्मीर में भारत की hydropower strategy। इसीलिए Hague का फैसला आने के बाद भारत की इतनी कड़ी प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली अगर केवल किसी technical provision से असहमत होती तो मामला negotiation तक सीमित रह सकता था। लेकिन यहां भारत tribunal की legal authority ही स्वीकार नहीं कर रहा। क्या Pakistan अब UN जाएगा? Court of Arbitration के पास अपने आदेश को जमीन पर लागू कराने की स्वतंत्र enforcement machinery नहीं है। Indian Express के विश्लेषण के मुताबिक पाकिस्तान इस ruling का इस्तेमाल international forums पर अपने diplomatic और legal case को मजबूत करने के लिए कर सकता है। विकल्पों में संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर मुद्दा उठाने की कोशिश भी शामिल हो सकती है, हालांकि ऐसी किसी प्रक्रिया की राजनीतिक और कानूनी बाधाएं काफी बड़ी हैं। यानी Hague का फैसला अपने आप भारत को policy बदलने के लिए मजबूर नहीं करता। लेकिन इससे international diplomatic pressure की नई लड़ाई जरूर शुरू हो सकती है। भारत-पाकिस्तान के रिश्ते में अब ‘पानी’ नया बड़ा मोर्चा भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से कई गंभीर विवाद हैं। आतंकवाद। कश्मीर। सीमा। व्यापार। और diplomatic relations। अब पानी भी इन सबसे ज्यादा स्पष्ट strategic dispute बन चुका है। सिंधु जल संधि को लंबे समय तक दोनों देशों के बीच एक ऐसा समझौता माना जाता था जो युद्ध और राजनीतिक तनाव से भी बचा रहा। लेकिन पहलगाम हमले के बाद भारत ने उस पुराने सिद्धांत को चुनौती दे दी। भारत का संदेश है कि cross-border terrorism जारी रहने की स्थिति में पुराने ढंग का cooperation नहीं चल सकता। आगे क्या होगा? फिलहाल तीन चीजों पर नजर रहेगी। पहली—भारत Ratle और दूसरे hydroelectric projects पर आगे क्या करता है। दूसरी—Pakistan Hague ruling को लेकर अगला international diplomatic या legal कदम क्या उठाता है। और तीसरी—क्या भविष्य में दोनों देश Treaty पर सीधे बातचीत की मेज पर लौटते हैं। आज की स्थिति में दोनों पक्षों की positions एक-दूसरे से बिल्कुल विपरीत हैं। Arbitration panel कहता है— Treaty पूरी तरह लागू है। भारत कहता है— Treaty को abeyance में रखने का हमारा फैसला कायम है और यह tribunal हमारे लिए वैध ही नहीं है। यही वजह है कि 65 साल पुरानी सिंधु जल संधि अब अपने इतिहास के सबसे गंभीर संकटों में से एक से गुजर रही है। यह लड़ाई अब सिर्फ इस सवाल की नहीं है कि सिंधु की नदियों का कितना पानी किस देश को मिलेगा। असली सवाल यह बन चुका है कि आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून के टकराव के बीच भारत-पाकिस्तान का सबसे टिकाऊ समझौता आगे टिकेगा भी या नहीं।

What do you think?

Leave a Comment

Article Bottom Advertisement

यह भी पढ़ें

Trending News

Most Read