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भारत-न्यूजीलैंड Free Trade Agreement 20 अक्टूबर से लागू, भारतीय कारोबार और निर्यात को क्या मिलेगा फायदा

भारतीय सामान को न्यूजीलैंड में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच, कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग और MSME सेक्टर के लिए नए अवसर नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच…

भारत-न्यूजीलैंड Free Trade Agreement 20 अक्टूबर से लागू, भारतीय कारोबार और निर्यात को क्या मिलेगा फायदा

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भारतीय सामान को न्यूजीलैंड में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच, कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग और MSME सेक्टर के लिए नए अवसर

नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने वाला Free Trade Agreement यानी FTA अब लागू होने जा रहा है। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता 20 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा।

यह समझौता अप्रैल 2026 में दोनों देशों के बीच हुआ था। न्यूजीलैंड की संसद ने 16 सितंबर को इस समझौते को लागू करने के लिए जरूरी कानून को मंजूरी दी थी। अब दोनों देशों के बीच व्यापार के लिए समझौते का अगला चरण शुरू होने जा रहा है।

इस समझौते का असर केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा। भारतीय कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग उत्पाद, जेम्स एंड ज्वेलरी और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों के कारोबारियों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार ज्यादा खुल सकता है।

भारतीय निर्यात को मिलेगा 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त बाजार

भारत सरकार के अनुसार इस FTA के लागू होने के बाद न्यूजीलैंड भारतीय निर्यात के 100 प्रतिशत हिस्से को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच देगा।

इसका मतलब यह है कि भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले योग्य उत्पादों पर पहले लगने वाले कई आयात शुल्क समाप्त हो जाएंगे।

सरकार के अनुसार इससे भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में दूसरे देशों के उत्पादों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सकती है।

विशेष रूप से श्रम आधारित उद्योगों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।

इनमें कपड़ा, रेडीमेड गारमेंट, चमड़ा, जूते, रत्न और आभूषण तथा कई इंजीनियरिंग उत्पाद शामिल हैं।

छोटे कारोबारियों और MSME के लिए क्यों महत्वपूर्ण है समझौता

भारत में लाखों छोटे और मध्यम कारोबारी घरेलू बाजार के साथ विदेशी बाजार में भी अपने उत्पाद बेचने की कोशिश करते हैं।

लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई बार आयात शुल्क उनके उत्पादों की कीमत बढ़ा देता है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए दूसरे देशों के उत्पादों से मुकाबला करना मुश्किल हो सकता है।

FTA के बाद न्यूजीलैंड में भारतीय उत्पादों पर शुल्क कम या समाप्त होने से भारतीय कंपनियों को कीमत के स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिल सकता है।

इसका फायदा बड़े निर्यातकों के साथ साथ कुछ MSME कंपनियों को भी मिल सकता है।

हालांकि इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी भारतीय कंपनियां न्यूजीलैंड के बाजार में प्रवेश करती हैं और वहां उनकी मांग कितनी बढ़ती है।

किन भारतीय क्षेत्रों को मिल सकता है फायदा

भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए समझौते में कई क्षेत्रों को बाजार पहुंच देने पर जोर दिया गया है।

कपड़ा और परिधान क्षेत्र इनमें महत्वपूर्ण है। भारत के कई छोटे और मध्यम कारोबारी कपड़े तथा रेडीमेड उत्पादों का निर्यात करते हैं।

चमड़ा और फुटवियर उद्योग भी संभावित लाभार्थियों में शामिल है।

इसके अलावा इंजीनियरिंग उत्पाद, जेम्स एंड ज्वेलरी तथा प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को भी बाजार विस्तार का अवसर मिल सकता है।

भारत सरकार के अनुसार समझौते में MSME और रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

न्यूजीलैंड से भारत क्या खरीदेगा

व्यापार समझौता केवल भारतीय निर्यात बढ़ाने के लिए नहीं होता। दोनों देशों के बीच आयात और निर्यात दोनों बढ़ सकते हैं।

समझौते के तहत न्यूजीलैंड से भारत आने वाले कई उत्पादों पर भी शुल्क में कमी या बदलाव किया गया है।

भारत ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अपने हितों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की है।

दूसरी ओर भारत को लकड़ी के लॉग, कोकिंग कोल और कुछ धातु संबंधी कच्चे माल जैसे इनपुट पर बेहतर बाजार पहुंच मिलने की उम्मीद है।

ऐसे कच्चे माल की उपलब्धता भारतीय उद्योगों की उत्पादन लागत और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

20 अरब डॉलर के निवेश की भी प्रतिबद्धता

इस व्यापार समझौते के साथ निवेश का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।

भारत सरकार के अनुसार न्यूजीलैंड की ओर से अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जुड़ी हुई है।

अगर यह निवेश वास्तविक परियोजनाओं में बदलता है तो इससे उद्योग, बुनियादी ढांचे और रोजगार से जुड़े अवसर पैदा हो सकते हैं।

हालांकि निवेश की प्रतिबद्धता और वास्तविक निवेश में अंतर होता है। इसलिए आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितनी राशि वास्तव में भारत में निवेश के रूप में आती है।

छात्रों और पेशेवरों के लिए भी बदलाव

FTA में व्यापार के साथ लोगों की आवाजाही और पेशेवर सेवाओं से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।

भारत सरकार के अनुसार समझौते में छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए कुछ mobility provisions शामिल किए गए हैं।

STEM क्षेत्र से जुड़े छात्रों और skilled professionals के लिए न्यूजीलैंड में काम और अध्ययन के अवसरों को लेकर भी व्यवस्था की गई है।

इससे दोनों देशों के बीच शिक्षा और पेशेवर सेवाओं से जुड़े संबंध बढ़ सकते हैं।

भारत के लिए बड़ा सवाल अब लागू होने के बाद का प्रदर्शन

FTA पर हस्ताक्षर करना पहला चरण था। असली परीक्षा अब समझौते के लागू होने के बाद शुरू होगी।

क्या भारतीय कंपनियां न्यूजीलैंड में अपना निर्यात बढ़ा पाएंगी?

क्या छोटे कारोबारी इस नए बाजार तक पहुंच पाएंगे?

क्या निवेश की प्रतिबद्धता वास्तविक परियोजनाओं में बदल पाएगी?

इन सवालों के जवाब अगले कुछ वर्षों के व्यापार आंकड़ों से सामने आएंगे।

भारत और न्यूजीलैंड ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य भी रखा है। मौजूदा व्यापार करीब 2.3 अरब डॉलर के आसपास बताया गया है।

आम भारतीय के लिए इसका क्या मतलब है

किसी भी Free Trade Agreement का असर तुरंत आम आदमी की जेब में दिखाई देना जरूरी नहीं है।

लेकिन अगर इससे भारतीय निर्यात बढ़ता है, उत्पादन बढ़ता है और नए बाजार खुलते हैं तो लंबे समय में उद्योगों और रोजगार पर असर पड़ सकता है।

दूसरी तरफ आयात बढ़ने पर कुछ घरेलू उद्योगों के सामने प्रतिस्पर्धा भी बढ़ सकती है। इसलिए FTA का वास्तविक प्रभाव अलग अलग उद्योगों पर अलग हो सकता है।

20 अक्टूबर से समझौते के लागू होने के बाद आने वाले महीनों के व्यापार आंकड़े यह बताएंगे कि भारत-न्यूजीलैंड व्यापार में कितना वास्तविक बदलाव आया।

आपकी राय

क्या भारत को ऐसे Free Trade Agreements के जरिए नए विदेशी बाजार खोलने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए?

आपके अनुसार इसका सबसे बड़ा फायदा किसे मिल सकता है, बड़े उद्योगों को, MSME कारोबारियों को या भारतीय युवाओं को?

अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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