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चिकन नेक को लेकर बांग्लादेश को नागालैंड के मंत्री की खुली चेतावनी, बोले पूर्वोत्तर की ताकत को कम मत आंकिए

भारत के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र “चिकन नेक” को लेकर बांग्लादेश में कुछ कट्टरपंथी तत्वों द्वारा दिए जा रहे बयानों पर अब भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। नागालैंड सरकार के मंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष तेमजेन इम्ना अलोंग ने बांग्लादेश के कट्टर नेताओं को

चिकन नेक को लेकर बांग्लादेश को नागालैंड के मंत्री की खुली चेतावनी, बोले पूर्वोत्तर की ताकत को कम मत आंकिए

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भारत के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र “चिकन नेक” को लेकर बांग्लादेश में कुछ कट्टरपंथी तत्वों द्वारा दिए जा रहे बयानों पर अब भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। नागालैंड सरकार के मंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष तेमजेन इम्ना अलोंग ने बांग्लादेश के कट्टर नेताओं को सीधी और कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने की कोई भी कोशिश भारी भूल साबित होगी। तेमजेन इम्ना अलोंग ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के जनजातीय समुदायों की ताकत, साहस और भूगोल की समझ को बाहरी लोग कम आंक रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग “चिकन नेक” को काटने या भारत को पूर्वोत्तर से अलग करने की धमकी दे रहे हैं, उन्होंने अभी तक पूर्वोत्तर की वास्तविक शक्ति नहीं देखी है। उन्होंने अपने बयान में महाभारत के पौराणिक पात्र घटोत्कच और हिडिंबा का उल्लेख करते हुए कहा कि ये दोनों ही पूर्वोत्तर क्षेत्र से जुड़े हुए थे। महाभारत के अनुसार हिडिंबा भीम की पत्नी और घटोत्कच की माता थीं और उनका संबंध असम और नागालैंड के दीमासा समुदाय से माना जाता है। मंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र केवल भौगोलिक रूप से ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत शक्तिशाली रहा है। तेमजेन इम्ना अलोंग ने कहा कि भारत की सीमाओं और संप्रभुता को चुनौती देना किसी के लिए भी घातक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने भारत के खिलाफ ऐसी साजिश रचने की कोशिश की तो उसे पूर्वोत्तर की वास्तविक क्षमता का सामना करना पड़ेगा। उनके अनुसार पूर्वोत्तर के लोग इस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, जंगलों, पहाड़ों और सीमाओं को बाहरी लोगों से कहीं बेहतर समझते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “चिकन नेक” शब्द असल में मीडिया द्वारा गढ़ा गया है। पूर्वोत्तर के लोगों के लिए यह कोई कमजोर कड़ी नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यहां के लोग गर्व से खुद को भारतीय मानते हैं। भारत और पूर्वोत्तर के बीच संबंध केवल एक संकरी भूमि पट्टी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह रिश्ता भावनात्मक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत गहरा है। गौरतलब है कि “चिकन नेक” उत्तर बंगाल का लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा वह इलाका है, जो भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है। यह क्षेत्र नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन से घिरा हुआ है, जिस कारण इसकी रणनीतिक अहमियत बहुत अधिक है। नागालैंड के मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके बयान का सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ है। उन्होंने पूर्व में नागा समुदाय में प्रचलित हेडहंटिंग परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कोई हिंसक खेल नहीं था, बल्कि उस समय की सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ था। यह परंपरा 1960 के दशक में प्रतिबंधित कर दी गई थी, लेकिन इसका उल्लेख केवल यह बताने के लिए किया गया कि पूर्वोत्तर के समुदायों का इतिहास साहस और आत्मरक्षा से भरा रहा है। तेमजेन इम्ना अलोंग से पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी बांग्लादेश को इसी मुद्दे पर चेतावनी दे चुके हैं। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा था कि अगर बांग्लादेश भारत के चिकन नेक पर हमला करने की सोचता है, तो उसे यह भी याद रखना चाहिए कि बांग्लादेश के पास भी दो ऐसे ही संकरे इलाके हैं। उन्होंने कहा था कि भारत की प्रतिक्रिया सिर्फ रक्षात्मक नहीं होगी। यह पूरा विवाद उस समय और गहरा गया जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने चीन दौरे के दौरान भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को “लैंडलॉक्ड” बताते हुए बांग्लादेश को इस क्षेत्र के लिए समुद्र तक पहुंच का एकमात्र संरक्षक बताया। इसके बाद बांग्लादेश के कुछ छात्र नेताओं और कट्टरपंथी समूहों ने बयानबाजी तेज कर दी। बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता हसनत अब्दुल्ला ने हाल ही में यह धमकी दी थी कि यदि बांग्लादेश को अस्थिर किया गया, तो वे भारत के सात बहनों वाले राज्यों को अलग-थलग करने और पूर्वोत्तर के अलगाववादी तत्वों को शरण देने पर विचार कर सकते हैं। इन बयानों के बाद भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीति से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। भारत सरकार और पूर्वोत्तर के नेता स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि देश की संप्रभुता और अखंडता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि चिकन नेक केवल एक भौगोलिक शब्द नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक रीढ़ है और उस पर किसी भी प्रकार की धमकी को देश गंभीरता से ले रहा है

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