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Bihar

बिहार की राजनीति में MLC चुनाव को लेकर बढ़ी हलचल, 23 अक्टूबर की वोटिंग से पहले तेज हुआ सियासी घमासान

पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर हलचल तेज है। 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक दलों ने…

बिहार की राजनीति में MLC चुनाव को लेकर बढ़ी हलचल, 23 अक्टूबर की वोटिंग से पहले तेज हुआ सियासी घमासान

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पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर हलचल तेज है। 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। खास तौर पर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है, जहां जनता दल यूनाइटेड के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के सामने पार्टी से जुड़े दूसरे धड़े का समर्थन प्राप्त उम्मीदवार मैदान में है। इस स्थिति ने चुनाव को सामान्य दलगत मुकाबले के बजाय अंदरूनी राजनीतिक संघर्ष का रूप दे दिया है।

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी। चुनाव में मतदाता बैलेट पेपर के माध्यम से अपनी पसंद के उम्मीदवार को प्राथमिकता के क्रम में वोट देंगे। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है।

पटना स्नातक सीट बनी सबसे बड़ा राजनीतिक अखाड़ा

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। जेडीयू ने अपने मौजूदा उम्मीदवार नीरज कुमार पर भरोसा जताया है, लेकिन इसी सीट पर पार्टी के अंदर से ही विरोध के सुर सामने आए हैं।

पूर्व विधायक और प्रभावशाली नेता अनंत सिंह की ओर से जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह को समर्थन दिए जाने की चर्चा ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच राजनीतिक मतभेद पहले से चर्चा में रहे हैं। अब यह विवाद एमएलसी चुनाव में सीधे चुनावी चुनौती के रूप में दिखाई दे रहा है।

इस घटनाक्रम का फायदा प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को मिलने की संभावना पर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा हो रही है। प्रशांत किशोर पहले से ही बिहार की राजनीति में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। पटना स्नातक सीट पर जेडीयू के भीतर का मतभेद उनके लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर बन सकता है।

NDA ने भी तेज की तैयारी

दूसरी ओर एनडीए ने चुनाव को हल्के में नहीं लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में गठबंधन के नेताओं की बैठकें हो रही हैं और चुनावी रणनीति पर चर्चा की जा रही है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री आवास पर भी एनडीए नेताओं की बैठक हुई थी, जिसमें विधान परिषद चुनाव को लेकर रणनीति पर विचार किया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि एनडीए अपने समर्थक मतदाताओं को किस तरह एकजुट रखता है। विधान परिषद चुनाव विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इसमें अलग-अलग श्रेणी के मतदाता मतदान करते हैं और प्राथमिकता के आधार पर वोटिंग होती है। इसलिए उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, संगठन की सक्रियता और स्थानीय समीकरण काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

आठ सीटों पर 164 उम्मीदवार

इस चुनाव की तस्वीर इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि बिहार की आठ एमएलसी सीटों पर कुल 164 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा 40 उम्मीदवार मैदान में हैं। चुनावी मुकाबला अलग-अलग सीटों पर अलग राजनीतिक समीकरणों के साथ दिखाई दे रहा है।

इन सीटों में पटना स्नातक, दरभंगा स्नातक, तिरहुत स्नातक, कोसी स्नातक, पटना शिक्षक, दरभंगा शिक्षक, तिरहुत शिक्षक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

27 अक्टूबर को आएगा फैसला

23 अक्टूबर को मतदान के बाद सभी की नजर 27 अक्टूबर पर रहेगी। इसी दिन मतगणना होगी और चुनाव परिणाम सामने आएंगे। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में वोटों की गिनती के लिए सात टेबल लगाए जाएंगे, जबकि अन्य सात सीटों पर 14-14 टेबल पर मतगणना की जाएगी।

इन चुनाव परिणामों को केवल विधान परिषद की कुछ सीटों तक सीमित करके नहीं देखा जा रहा है। बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इन नतीजों का राजनीतिक संदेश भी महत्वपूर्ण होगा।

जेडीयू के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई

पटना स्नातक सीट जेडीयू के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के सामने पार्टी के भीतर से चुनौती आने के कारण यह मुकाबला पार्टी संगठन की पकड़ की भी परीक्षा बन गया है।

यदि जेडीयू अपने उम्मीदवार को जीत दिलाने में सफल रहती है तो इसे पार्टी संगठन की मजबूती के रूप में देखा जाएगा। वहीं यदि विरोधी उम्मीदवार मजबूत प्रदर्शन करता है तो इससे पार्टी के भीतर चल रहे राजनीतिक मतभेदों की चर्चा और तेज हो सकती है।

प्रशांत किशोर और जन सुराज के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण है। बिहार की राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही जन सुराज के लिए मजबूत प्रदर्शन भविष्य की राजनीति के लिहाज से बड़ा संकेत दे सकता है।

चुनाव से पहले बढ़ी बयानबाजी

जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, नेताओं के बीच बयानबाजी भी तेज होती जा रही है। प्रशांत किशोर और जेडीयू नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप पहले ही सुर्खियों में आ चुके हैं। प्रशांत किशोर ने हाल के बयानों में एनडीए की संभावनाओं पर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्ताधारी गठबंधन की ओर से भी उनके दावों को चुनौती दी जा रही है।

ऐसे में आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। उम्मीदवार अपने समर्थक मतदाताओं को सक्रिय करने में जुटे हैं और राजनीतिक दल अंतिम चरण में संगठनात्मक ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं।

परिणाम बताएगा किसका बढ़ा प्रभाव

बिहार विधान परिषद चुनाव का परिणाम कई राजनीतिक संदेश दे सकता है। एनडीए के लिए यह अपने संगठन और गठबंधन की एकजुटता दिखाने का अवसर है। जेडीयू के लिए पटना स्नातक सीट पार्टी के अंदरूनी समीकरणों की परीक्षा है। वहीं जन सुराज के लिए यह अपनी बढ़ती राजनीतिक मौजूदगी साबित करने का मौका है।

अब सबकी नजर 23 अक्टूबर के मतदान और 27 अक्टूबर की मतगणना पर है। परिणाम आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मतदाताओं ने किस उम्मीदवार और किस राजनीतिक रणनीति पर भरोसा जताया।

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