पटना। बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा ऐसे समय हुआ है जब बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में सभापति का पद खाली होना राजनीतिक और संवैधानिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद अब बिहार विधान परिषद में नए सभापति के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। यह घटनाक्रम विधान परिषद के भीतर सत्तारूढ़ गठबंधन की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण है।
सभापति ने छोड़ा पद
अवधेश नारायण सिंह ने सोमवार को बिहार विधान परिषद के सभापति पद से इस्तीफा दिया। उनके इस्तीफे की खबर ऐसे समय सामने आई है जब राज्य में विधान परिषद की कई सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया चल रही है।
सभापति विधान परिषद का महत्वपूर्ण संवैधानिक पद होता है। सदन की कार्यवाही का संचालन करने के अलावा सभापति की भूमिका सदन के कामकाज को व्यवस्थित रखने में भी महत्वपूर्ण होती है।
अब उनके इस्तीफे के बाद परिषद को नए सभापति का इंतजार रहेगा।
जेडीयू के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे से जनता दल यूनाइटेड के लिए परिषद के इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर दावा करने का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि नए सभापति के नाम को लेकर अंतिम निर्णय और सदन में इसकी प्रक्रिया अलग संवैधानिक नियमों के तहत होगी।
इस घटनाक्रम को बिहार विधान परिषद की मौजूदा राजनीतिक संरचना के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
आठ MLC सीटों पर पहले से चुनावी हलचल
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
चुनाव वाले क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तथा पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
इन सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को होगा और मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।
बीजेपी ने हाल ही में चार सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। पार्टी ने पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव, कोसी स्नातक से डॉ. एनके यादव, दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार और तिरहुत शिक्षक सीट से नरेंद्र प्रसाद सिंह को उम्मीदवार बनाया है।
जेडीयू भी पहले ही चार सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है।
चुनावी मैदान में कई दल
MLC चुनाव को लेकर जन सुराज और आरजेडी समेत अन्य राजनीतिक दल भी सक्रिय हैं। अलग-अलग दलों के उम्मीदवारों की घोषणा के साथ चुनावी मुकाबले की तस्वीर धीरे-धीरे स्पष्ट हो रही है।
पटना स्नातक सीट को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ रुख अपनाते हुए जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह को समर्थन देने की घोषणा की है। यह उनका राजनीतिक रुख है; जेडीयू की ओर से पार्टी अनुशासन और गठबंधन की मजबूती पर भरोसा जताने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
इस घटनाक्रम के बाद पटना स्नातक सीट का चुनाव भी चर्चा में है।
सभापति का पद क्यों महत्वपूर्ण
बिहार विधान परिषद राज्य की द्विसदनीय विधायिका का ऊपरी सदन है। सभापति सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं और सदन में नियमों के अनुसार कामकाज चलाने की जिम्मेदारी निभाते हैं।
किसी भी सभापति के इस्तीफे के बाद सदन के लिए नए सभापति का चुनाव महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया होती है।
इसलिए अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया सभापति कौन बनता है और इसके लिए राजनीतिक दलों के बीच किस तरह की सहमति बनती है।
MLC चुनाव के बीच बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां
आठ विधान परिषद सीटों के चुनाव के कारण बिहार में पहले से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। उम्मीदवारों के नामांकन, प्रचार और मतदाताओं से संपर्क का दौर शुरू हो रहा है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत स्नातक मतदाता और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पात्र शिक्षक मतदाता मतदान करेंगे। इसलिए इन चुनावों की मतदाता संरचना विधानसभा चुनाव से अलग है।
उम्मीदवारों के लिए स्थानीय शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, शिक्षकों की सेवा शर्तें और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अब आगे क्या होगा
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद बिहार विधान परिषद के नए सभापति के चयन पर नजर रहेगी। दूसरी ओर आठ सीटों के MLC चुनाव की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकते हैं। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लेने की प्रक्रिया चलेगी।
इसके बाद चुनाव मैदान में मौजूद उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल सभापति का इस्तीफा और MLC चुनाव की प्रक्रिया बिहार विधान परिषद को राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय बना रही है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नामांकन और नए सभापति के चयन से जुड़े घटनाक्रम पर सभी की नजर रहेगी।












