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बिहार विधानसभा का बजट सत्र, 18 दिनों में मात्र 70 घंटे चला सदन, राबड़ी-नीतीश की नोक-झोंक को रखा जाएगा याद - BIHAR BUDGET SESSION

बिहार विधानसभा का बजट सत्र, 18 दिनों में मात्र 70 घंटे चला सदन, राबड़ी-नीतीश की नोक-झोंक को रखा जाएगा याद - BIHAR BUDGET SESSION बिहार विधानसभा का बजट सत्र नीतीश सरकार के 5 साल के कार्यकाल का अंतिम बजट सत्र था. हंगामा के कारण 18 दिन ही चला. पटना: चुनावी साल में नीतीश कुमार के राबड़ी देवी के साथ विवा

बिहार विधानसभा का बजट सत्र, 18 दिनों में मात्र 70 घंटे चला सदन, राबड़ी-नीतीश की नोक-झोंक को रखा जाएगा याद - BIHAR BUDGET SESSION

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बिहार विधानसभा का बजट सत्र, 18 दिनों में मात्र 70 घंटे चला सदन, राबड़ी-नीतीश की नोक-झोंक को रखा जाएगा याद - BIHAR BUDGET SESSION बिहार विधानसभा का बजट सत्र नीतीश सरकार के 5 साल के कार्यकाल का अंतिम बजट सत्र था. हंगामा के कारण 18 दिन ही चला. पटना: चुनावी साल में नीतीश कुमार के राबड़ी देवी के साथ विवाद तो विधानसभा में तेजस्वी और सम्राट चौधरी के बीच विवाद चर्चा में रहा. बिहार विधानसभा का बजट सत्र नीतीश सरकार के 5 साल के कार्यकाल का अंतिम बजट सत्र था.पहले बजट सत्र 28 मार्च तक चलने वाला था लेकिन ईद के पर्व को लेकर कार्यवाही को एक दिन कम कर दिया गया था. सदन में 3857 प्रश्न पूछे गए: बजट सत्र में कुल 3857 प्रश्न लाये गए उनमें से 2944 प्रश्न स्वीकृत हुए. इसमें 2639 तारांकित प्रश्न स्वीकृत हुए उसमें से 2400 प्रश्नों के उत्तर हुए पूछे गए. बजट सत्र में 278 ध्यानकर्षण सूचनाएं लाई गई इसमें से 227 के उत्तर हुए. 622 निवेदन विधानसभा को प्राप्त हुए उसमें से 616 स्वीकृत हुए. 344 याचिकाएं भी लाई गई उसमें से 311 स्वीकृत हुए और 271 गैर सरकारी संकल्प पर भी चर्चा हुई. बजट सत्र में 70 घंटे चली: दरअसल, बजट सत्र में पहले 20 दिन सदन की कार्यवाही चलती थी लेकिन पहले होली और फिर ईद के कारण 2 दिन सदन की कार्यवाही को कम कर दिया गया है. दो दिन सदन की कार्यवाही हंगामा के भेंट चढ़ गया. इस तरह देखें तो कुल 16 दिन ही बजट सत्र की कार्यवाही चली. उसमें भी पहले दिन केवल फर्स्ट हाफ हीं चला. सामान्य दिनों में पहले हाफ में डेढ़ घंटे और दूसरे हाफ में 3 घंटे अमूमन विधानसभा की कार्यवाही चलती है. इस बार हंगामा के कारण कुछ समय जरूर बर्बाद हुआ लेकिन उसके बाद भी बजट सत्र में 70 घंटे के करीब कार्यवाही इस बार चली है. 3 लाख 17000 करोड़ का बजट पास: सरकार ने 317000 करोड़ का वित्तीय वर्ष 2025 -26 का बजट पास करवाया है और 4 विधेयक भी पास कराया है.बिहार विधानसभा में 243 विधायक है. इसमें विधानसभा अध्यक्ष और विधानसभा उपाध्यक्ष के अलावे मंत्री का सवाल नहीं होता है. तेजस्वी यादव चार दिन ही सदन में दिखे: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का एक प्रश्न आया जो अपने विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण से संबंधित था जिसका उत्तर पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने दिया.तेजस्वी यादव भी 18 दिनों के सत्र में चार दिन ही सदन में दिखे. तेज प्रताप के प्रश्नों का उत्तर नहीं हुआ: वहीं लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप का एक भी प्रश्न का उत्तर नहीं हुआ. भाजपा विधायक अरुण सिन्हा, मोकामा की विधायक और इसी तरह कई विधायक ने प्रश्नकाल में प्रश्न नहीं पूछा राजद के बागी विधायक चेतन आनंद सदन में भी कम नजर आए. "जनता की गाढ़ी कमाई बर्बाद हुई है. सरकार जनता के सवालों से भागती रही. सीमांचल का विकास का मुद्दा अधूरा रह गया." -अख्तरुल ईमान, एआइएमआइएम, विधायक विधानसभा बजट सत्र 18 दिन चला: 18 दिन चले विधानसभा बजट सत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष की तरफ से कई सदस्यों ने प्रश्न काल में सवाल नहीं किया उसमें अरुण सिन्हा भी थे. अरुण सिंह का कहना है कि प्रश्न काल में नहीं किया लेकिन गैर सरकारी संकल्प में हमने सवाल उठाया.वहीं बिहार सरकार के मंत्री मदन साहनी का कहना था कि सरकार ने सभी सवालों का जवाब सदन में दिया है. यह बजट सत्र काफी सफल रहा. "जनता के सवाल हम लोग उठाना चाहे लेकिन सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया. नौकरी, रोजगार, कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार जवाब नहीं दे पाई." -आलोक मेहता, राजद विधायक लंबे अरसे बाद चला प्रश्नकाल: लंबे अरसे बाद बजट सत्र में प्रश्नकाल बिना हंगामे के कई दिनों तक चला. चुनावी साल होने के कारण सत्ता पक्ष हो या विपक्ष के सदस्य चिंता साफ दिख रही थी कि जनता के सवाल अधिक हो और उसके उत्तर सरकार दे. विधानसभा बजट सत्र के दौरान 65% आरक्षण वक्फ बिल, कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर विपक्ष की ओर से सरकार को घेरने की कोशिश की गई. "विधानसभा का बजट सत्र नीतीश कुमार और राबड़ी देवी के विवाद के कारण चर्चा में जरूर रहा लेकिन विवाद से अधिक प्रश्नों का उत्तर हुआ है. यह सभी विधायकों के लिए बजट सत्र फाइनल था क्योंकि 6 महीना बाद ही चुनाव में जाना है और इसलिए सवाल इसमें अधिक उठे हैं." -अरुण पांडे, राजनीतिक विशेषज्ञ कई प्रश्नों को लिखित उत्तर दिया गया: बिहार में 36 मंत्रियों में से 7 विधान परिषद से शेष विधानसभा से हैं. इस तरह से देखें तो 31 सदस्य सवाल नहीं पूछ सकते हैं अपने क्षेत्र का सवाल दूसरे सदस्यों से पूछवाते है. लेकिन इनके अलावा आधा दर्जन सदस्य ऐसे है जिनका सवाल इस बार नहीं आया. कई सदस्यों ने केवल शून्य काल में अपने क्षेत्र के मामले को उठाया है. कई सदस्यों ने सवाल पूछे लेकिन समयाभाव में जवाब सदन में नहीं हो पाया. वैसे प्रश्नों का विभाग की तरफ से लिखित उत्तर दिया गया.

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