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Politics

बिहार में बिजली विभाग के अधिकारियों पर जानलेवा हमला, लाठी-डंडों से पीट-पीटकर किया लहूलुहान

बिहार में बिजली विभाग के अधिकारियों पर जानलेवा हमला उस समय हुआ जब रोहतास जिले के जिगना गांव में निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने टीम पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। बिहार में एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रोहतास जिले के शिवसागर प्रखंड अंतर्गत जिगना गांव में

बिहार में बिजली विभाग के अधिकारियों पर जानलेवा हमला, लाठी-डंडों से पीट-पीटकर किया लहूलुहान

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बिहार में बिजली विभाग के अधिकारियों पर जानलेवा हमला उस समय हुआ जब रोहतास जिले के जिगना गांव में निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने टीम पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। बिहार में एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रोहतास जिले के शिवसागर प्रखंड अंतर्गत जिगना गांव में शुक्रवार देर शाम बिजली विभाग की टीम पर असामाजिक तत्वों और कुछ ग्रामीणों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में कनीय अभियंता (जेई) विजय शंकर और लाइनमैन जितेंद्र कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि दो अन्य लाइनमैनों को भी चोटें आई हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए सासाराम सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिजली विभाग की टीम नियमित निरीक्षण और जांच के तहत जिगना गांव पहुंची थी। टीम गांव की एक आटा चक्की में बिजली कनेक्शन और लोड की औचक जांच कर रही थी। इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने जांच का विरोध करना शुरू कर दिया। पहले यह विरोध बहस तक सीमित था, लेकिन देखते ही देखते माहौल हिंसक हो गया और ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से बिजली विभाग की टीम पर हमला बोल दिया। हमले में कनीय अभियंता विजय शंकर के सिर और आंख में गंभीर चोटें आई हैं। वहीं लाइनमैन जितेंद्र कुमार को भी बुरी तरह पीटा गया, जिससे उनके शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। हमले के दौरान टीम के अन्य सदस्यों को भी चोटें लगीं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि जान बचाने के लिए बिजली विभाग के कर्मियों को घटनास्थल से भागना पड़ा। किसी तरह वे लोग वहां से निकलकर सासाराम सदर अस्पताल पहुंचे, जहां उनका इलाज जारी है। सदर अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार सभी घायल फिलहाल खतरे से बाहर हैं, लेकिन कनीय अभियंता विजय शंकर और लाइनमैन जितेंद्र कुमार की स्थिति को देखते हुए उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों ने बताया कि बेहतर इलाज के बाद जल्द ही अन्य घायलों को छुट्टी दी जा सकती है, जबकि गंभीर रूप से घायल कर्मचारियों को कुछ और दिन अस्पताल में रहना पड़ सकता है। घटना की सूचना मिलते ही शिवसागर थाना पुलिस को अवगत कराया गया। हालांकि समाचार लिखे जाने तक बिजली विभाग की ओर से औपचारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई थी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि घायल कर्मचारियों के बयान दर्ज कराने के बाद जल्द ही एफआईआर दर्ज की जाएगी। बिजली विभाग के अधिकारियों ने इस हमले को बेहद गंभीर बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। घायल कनीय अभियंता विजय शंकर ने अस्पताल में बताया कि उनकी टीम सरकारी निर्देशों के तहत बिजली कनेक्शन और लोड की जांच के लिए गांव गई थी। जांच के दौरान कुछ लोगों ने बेवजह विरोध शुरू कर दिया और अचानक लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह हमला पूरी तरह जानलेवा था और अगर समय रहते वे वहां से नहीं निकलते, तो बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। विभाग का कहना है कि सरकारी काम के दौरान इस तरह की हिंसा निंदनीय है और इससे कर्मचारियों का मनोबल टूटता है। विभागीय अधिकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी सरकारी कर्मचारी अपने कर्तव्य का पालन करते समय खुद को असुरक्षित महसूस न करे। स्थानीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज है। लोगों का कहना है कि बिजली विभाग की टीम केवल अपना काम कर रही थी, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने कानून को हाथ में लेते हुए हिंसा का रास्ता अपनाया। वहीं कुछ ग्रामीणों का यह भी कहना है कि विवाद अचानक भड़क गया, लेकिन हिंसा किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराई जा सकती। पुलिस की ओर से बताया गया है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है और हमले में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना बिहार में कानून व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी सुरक्षित हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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