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मधेपुरा में किसान सभा की परिचर्चा: किसानों की बदहाली पर चिंता, एकजुट संघर्ष का दिया गया संदेश

Published: 22/06/2026, 10:01:34 am7 viewsSeemanchal Live

मधेपुरा: बिहार राज्य किसान सभा के तत्वावधान में रविवार को मधेपुरा शहर के मानव पुस्तकालय टीकेएसडीआर आश्रम, वार्ड संख्या-2 में “किसान परेशान : कारण एवं…

मधेपुरा में किसान सभा की परिचर्चा: किसानों की बदहाली पर चिंता, एकजुट संघर्ष का दिया गया संदेश
मधेपुरा: बिहार राज्य किसान सभा के तत्वावधान में रविवार को मधेपुरा शहर के मानव पुस्तकालय टीकेएसडीआर आश्रम, वार्ड संख्या-2 में “किसान परेशान : कारण एवं निवारण” विषय पर एक महत्वपूर्ण परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में किसानों की मौजूदा स्थिति, कृषि संकट और उसके संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर Manibhushan Verma ने की, जबकि संचालन Lalan Kumar Yadav ने किया। किसानों की स्थिति पर जताई चिंता परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसान देश की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन विडंबना यह है कि सबसे अधिक संकट भी आज किसानों और खेतिहर मजदूरों पर ही है। बिहार राज्य किसान सभा के जिला अध्यक्ष Ganesh Manav ने विषय प्रवेश करते हुए कहा कि किसान मानव जीवन के आधार हैं। यदि किसान नहीं होंगे तो खाद्य सुरक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में किसान परिवार बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, पौष्टिक भोजन और सम्मानजनक जीवन जैसी बुनियादी जरूरतों से भी वंचित हैं। सरकारी नीतियों पर उठे सवाल वक्ताओं ने किसानों की मौजूदा स्थिति के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों की आलोचना की। उनका कहना था कि कृषि क्षेत्र को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिलने के कारण किसानों की आय और जीवन स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। परिचर्चा में किसानों की बढ़ती लागत, फसलों के उचित मूल्य, सिंचाई व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। एकजुटता को बताया समाधान का रास्ता कार्यक्रम में मौजूद किसान नेताओं और बुद्धिजीवियों ने कहा कि किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब किसान जाति, धर्म, भाषा और राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर एक मंच पर आएं। वक्ताओं ने कहा कि संगठित संघर्ष और जनआंदोलन के माध्यम से ही किसानों के अधिकारों की रक्षा की जा सकती है और सरकारों को किसान हित में ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर किया जा सकता है। कृषि संकट पर गंभीर मंथन परिचर्चा को संबोधित करते हुए Alok Kumar, Ashok Kumar Yadav, Pannalal Yadav, Siyaram Yadav, Mayank Patanjali Yadav तथा Sitaram Sharma ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने किसानों की आय में गिरावट, कृषि लागत में वृद्धि, प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान और सरकारी योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन जैसे विषयों पर चिंता व्यक्त की। किसान हितैषी नीतियों की मांग परिचर्चा के अंत में वक्ताओं ने कहा कि कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार को किसान हितैषी नीतियां बनानी होंगी। साथ ही कृषि उत्पादन, विपणन, सिंचाई और फसल सुरक्षा के क्षेत्र में प्रभावी सुधार की आवश्यकता है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने किसानों की समस्याओं को लेकर जागरूकता बढ़ाने और संगठनात्मक स्तर पर संघर्ष को मजबूत करने का संकल्प भी लिया। मधेपुरा में आयोजित यह परिचर्चा किसानों की वर्तमान चुनौतियों और उनके समाधान पर गंभीर विमर्श का मंच बनी, जहां कृषि और किसान हितों को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।

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