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फर्जी एनकाउंटर या आत्मरक्षा में कार्रवाई? भरत भूषण तिवारी की मौत से घिरी बिहार पुलिस, न्यायिक जांच के आदेश

Published: 22/6/2026, 4:17:06 am14 viewsSeemanchal Live

भोजपुर/पटना: भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुए चर्चित पुलिस एनकाउंटर में 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद बिहार की राजनीति और प्रशासन दोनों सवालों…

फर्जी एनकाउंटर या आत्मरक्षा में कार्रवाई? भरत भूषण तिवारी की मौत से घिरी बिहार पुलिस, न्यायिक जांच के आदेश
भोजपुर/पटना: भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुए चर्चित पुलिस एनकाउंटर में 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद बिहार की राजनीति और प्रशासन दोनों सवालों के घेरे में आ गए हैं। एक ओर पुलिस इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन, ग्रामीण और कई राजनीतिक दल इस एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार ने अब न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। कौन थे भरत भूषण तिवारी? भरत भूषण तिवारी भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के निवासी थे। स्थानीय लोगों के अनुसार वे सोशल मीडिया और प्रशासनिक मंचों के माध्यम से जनसमस्याओं को उठाने के लिए जाने जाते थे। ग्रामीणों का कहना है कि वे बाढ़ पीड़ितों, गरीब परिवारों और विस्थापित लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते थे, जिसके कारण इलाके में उनकी पहचान एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बन गई थी। पुलिस का क्या है दावा? भोजपुर पुलिस के अनुसार 17 जून को सूचना मिली थी कि भरत भूषण तिवारी गांव में हथियार लेकर घूम रहे हैं और फायरिंग कर रहे हैं। पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। पुलिस का दावा है कि तिवारी को कई बार आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर गोलीबारी जारी रखी। इसके बाद आत्मरक्षा और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जवाबी कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार घटनास्थल से एक पिस्तौल, दो जिंदा कारतूस, एक मैगजीन और दो खोखे बरामद किए गए। वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। वीडियो में कथित तौर पर भरत भूषण तिवारी को हथियार फेंकते हुए देखा जा रहा है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन्हीं वीडियो के आधार पर कई लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या स्थिति को बिना घातक बल प्रयोग के नियंत्रित किया जा सकता था। चार पुलिसकर्मी निलंबित घटना के बाद बिहार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रतिक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बाद विभागीय स्तर पर प्रारंभिक कार्रवाई की गई। सरकार ने दिए न्यायिक जांच के आदेश बिहार सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है। उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha ने घटना को दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यदि कहीं प्रशासनिक लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बीजेपी नेताओं ने भी उठाए सवाल मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया है। भाजपा के कई नेताओं ने भी एनकाउंटर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। Mithilesh Tiwari ने कहा कि यदि किसी गैर-घातक विकल्प से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता था, तो उस पर विचार किया जाना चाहिए था। वहीं Rituraj Sinha ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन सुरक्षा देने वालों को लोगों के लिए भय का कारण नहीं बनना चाहिए। सड़क पर उतरे ग्रामीण, हाईवे जाम घटना के विरोध में बिलौटी गांव और आसपास के इलाकों में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों और ग्रामीणों ने भरत भूषण तिवारी के शव को सड़क पर रखकर आरा-बक्सर फोरलेन मार्ग जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला एनकाउंटर को लेकर अब कानूनी लड़ाई भी शुरू हो गई है। मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें सीबीआई जांच कराने और कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई है। पवन सिंह ने भी उठाई निष्पक्ष जांच की मांग भोजपुरी अभिनेता और गायक Pawan Singh ने भी मामले को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भरत भूषण तिवारी की मौत ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। यदि वायरल वीडियो और सामने आ रही जानकारियां सही हैं, तो पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके। सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि यह पुलिस की आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई थी या फिर एनकाउंटर की प्रक्रिया में कहीं गंभीर चूक हुई। अब सभी की निगाहें न्यायिक जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि 17 जून को बिलौटी गांव में वास्तव में क्या हुआ था और भरत भूषण तिवारी की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

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