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Kosi-Mechi Link Project: सीमांचल की तस्वीर बदल सकती है ₹6,282 करोड़ की परियोजना, पूर्णिया-अररिया-किशनगंज-कटिहार के किसानों को बड़ा फायदा

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निर्माण कार्य का लिया जायजा, मार्च 2029 तक परियोजना पूरी करने का निर्देश; करीब 2.15 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि तक सुनिश्चित सिंचाई…

Kosi-Mechi Link Project: सीमांचल की तस्वीर बदल सकती है ₹6,282 करोड़ की परियोजना, पूर्णिया-अररिया-किशनगंज-कटिहार के किसानों को बड़ा फायदा

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निर्माण कार्य का लिया जायजा, मार्च 2029 तक परियोजना पूरी करने का निर्देश; करीब 2.15 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि तक सुनिश्चित सिंचाई पहुंचाने का लक्ष्य पूर्णिया/पटना: बिहार के सीमांचल क्षेत्र के लिए महत्वाकांक्षी कोसी-मेची इंट्रा-स्टेट लिंक परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड स्थित चैनपुर में परियोजना के निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में काम पूरा करने का निर्देश दिया है। परियोजना को मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। करीब ₹6,282.32 करोड़ की इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ सीमांचल के चार जिलों—पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार—के किसानों को मिलने की उम्मीद है। परियोजना के तहत कोसी नदी के अतिरिक्त मानसूनी पानी को नहर प्रणाली के जरिए मेची नदी और महानंदा बेसिन की तरफ ले जाने की योजना है। आखिर क्या है कोसी-मेची लिंक परियोजना? कोसी-मेची परियोजना बिहार के भीतर दो नदी प्रणालियों को जोड़ने की बड़ी जल प्रबंधन योजना है। इसके तहत मौजूदा Eastern Kosi Main Canal (EKMC) को remodel और आगे extend किया जाएगा। केंद्र सरकार के आधिकारिक विवरण के अनुसार मौजूदा नहर को 41.30 किलोमीटर तक remodel करने के बाद उसे आगे बढ़ाकर मेची नदी तक 117.50 किलोमीटर तक पहुंचाया जाएगा। मूल विचार यह है कि मानसून के दौरान कोसी में उपलब्ध अतिरिक्त पानी का बेहतर इस्तेमाल किया जाए। जिस पानी से बाढ़ का दबाव बढ़ता है, उसके एक हिस्से को सिंचाई के लिए सीमांचल की तरफ पहुंचाने की योजना है। पूर्णिया को करीब 70 हजार हेक्टेयर सिंचाई का फायदा इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभार्थी पूर्णिया जिला हो सकता है। मुख्यमंत्री के हालिया निरीक्षण के दौरान दिए गए आंकड़ों के मुताबिक परियोजना से चार जिलों में लगभग 2,14,813 हेक्टेयर कृषि भूमि को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा देने का लक्ष्य है। जिलेवार प्रस्तावित लाभ इस प्रकार है: पूर्णिया – 69,970 हेक्टेयर अररिया – 69,642 हेक्टेयर किशनगंज – 39,548 हेक्टेयर कटिहार – 35,653 हेक्टेयर यानी पूर्णिया और अररिया दोनों में करीब 70-70 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को इसका फायदा मिलने का अनुमान है। केंद्र की स्वीकृत योजना में अतिरिक्त वार्षिक खरीफ सिंचाई का आंकड़ा 2,10,516 हेक्टेयर बताया गया है; हालिया बिहार सरकार की परियोजना ब्रीफिंग में assured irrigation coverage 2,14,813 हेक्टेयर बताई गई है। दोनों आंकड़े अलग तकनीकी मापों को दर्शाते हैं। किसानों के लिए क्यों इतनी महत्वपूर्ण है परियोजना? सीमांचल की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज में धान, मक्का, जूट सहित कई फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। लेकिन खेती की सफलता मानसून और स्थानीय जल उपलब्धता पर काफी निर्भर रहती है। अगर कोसी-मेची परियोजना अपने निर्धारित स्वरूप में पूरी होती है तो खरीफ के मौसम में बड़े कृषि क्षेत्र तक अधिक भरोसेमंद सिंचाई पहुंच सकती है। इससे बारिश में अनियमितता होने की स्थिति में किसानों के लिए पानी का एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध होगा। कोसी के अतिरिक्त पानी का होगा इस्तेमाल कोसी नदी बिहार के लिए वरदान और चुनौती दोनों रही है। मानसून में नदी में पानी बढ़ने से उत्तर बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा होता है। दूसरी तरफ सीमांचल के कई कृषि क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई की आवश्यकता रहती है। कोसी-मेची परियोजना इसी असंतुलन को कम करने की कोशिश है। केंद्र सरकार के मुताबिक परियोजना में कोसी के लगभग 2,050 million cubic metre (MCM) अतिरिक्त पानी को मानसून के दौरान महानंदा command की तरफ divert/utilise करने की क्षमता है। इसका उद्देश्य उपलब्ध जल संसाधन को खेती में अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करना है। Eastern Kosi Main Canal की क्षमता भी बढ़ेगी परियोजना केवल नई नहर खोदने तक सीमित नहीं है। मौजूदा Eastern Kosi Main Canal की water-carrying capacity को भी बढ़ाया जाएगा। हालिया परियोजना विवरण के अनुसार इसकी क्षमता 15,000 cusecs से बढ़ाकर 20,000 cusecs करने की योजना है। इसके साथ चार branch canals, छह distributaries और दूसरी आवश्यक canal infrastructure विकसित की जाएगी। परियोजना के अंतिम हिस्से में करीब 950 cusecs पानी मेची नदी में छोड़े जाने की योजना है। इससे महानंदा basin में पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। बाढ़ प्रबंधन में कितनी मदद मिलेगी? कोसी-मेची परियोजना को केवल irrigation project के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। इसका एक उद्देश्य मानसून के अतिरिक्त पानी का बेहतर management भी है। हालांकि यह कहना उचित नहीं होगा कि परियोजना पूरी होने के बाद सीमांचल या कोसी क्षेत्र में बाढ़ की समस्या खत्म हो जाएगी। बाढ़ कई कारकों—अत्यधिक वर्षा, नदी प्रवाह, तटबंध, drainage और नेपाल के catchment areas में बारिश—पर निर्भर करती है। लेकिन अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से दूसरी basin की ओर ले जाने से water management और कुछ क्षेत्रों में flood moderation में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई है। केंद्र सरकार दे रही ₹3,652 करोड़ की सहायता कोसी-मेची परियोजना को केंद्र सरकार से भी बड़ी वित्तीय सहायता मिली है। मार्च 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली Cabinet Committee on Economic Affairs ने परियोजना को Pradhan Mantri Krishi Sinchai Yojana – Accelerated Irrigation Benefits Programme (PMKSY-AIBP) में शामिल करने को मंजूरी दी थी। परियोजना की स्वीकृत अनुमानित लागत ₹6,282.32 करोड़ थी, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा बिहार को ₹3,652.56 करोड़ की सहायता का प्रावधान किया गया। Completion target तभी से मार्च 2029 निर्धारित है। जुलाई तक कितना हुआ था काम? परियोजना की deadline महत्वाकांक्षी है और अब निर्माण की रफ्तार महत्वपूर्ण होगी। जुलाई 2026 में संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक Eastern Kosi Main Canal के 0 से 41.30 किलोमीटर हिस्से की remodelling का contract करीब ₹2,639.80 करोड़ का था और उस समय physical progress लगभग 8.5 प्रतिशत बताई गई थी। यही कारण है कि मुख्यमंत्री का ताजा निरीक्षण और अधिकारियों को समय पर काम पूरा करने का निर्देश महत्वपूर्ण हो जाता है। अगले ढाई वर्षों में निर्माण की गति इस परियोजना के लिए निर्णायक होगी। CM ने कहा- किसानों को निर्माण से परेशानी न हो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्माण की गति और गुणवत्ता दोनों बनाए रखने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा गया है कि construction activities के कारण किसानों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। परियोजना के सभी कार्यों की लगातार monitoring करने को भी कहा गया है। मुख्यमंत्री ने कोसी और गंडक नदी प्रणालियों के लिए दीर्घकालिक water-management plan तैयार करने तथा छोटी नदियों में सालभर पानी उपलब्ध कराने के लिए storage structures पर भी काम करने को कहा। सीमांचल की अर्थव्यवस्था पर हो सकता है बड़ा असर परियोजना का असली प्रभाव केवल नहर में बहने वाले पानी से नहीं मापा जाएगा। अगर पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार में लाखों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को भरोसेमंद सिंचाई मिलती है तो इसका असर फसल उत्पादन, किसानों की आमदनी, ग्रामीण रोजगार और स्थानीय बाजार तक पहुंच सकता है। पानी की बेहतर उपलब्धता किसानों को फसल योजना में अधिक विकल्प भी दे सकती है। विशेष रूप से सीमांचल जैसे क्षेत्र में, जहां कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, सिंचाई infrastructure में इतना बड़ा निवेश लंबे समय में क्षेत्रीय विकास की दिशा बदल सकता है। मार्च 2029 अब सबसे महत्वपूर्ण तारीख कोसी-मेची परियोजना से उम्मीदें बड़ी हैं, लेकिन इन उम्मीदों को जमीन पर उतरने के लिए समय पर construction सबसे जरूरी है। परियोजना की लागत हजारों करोड़ रुपये है और इससे चार जिलों के लाखों किसानों के हित जुड़े हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि मार्च 2029 की deadline तक नहरों का निर्माण और remodelling कितनी तेजी से पूरा होता है। अगर परियोजना निर्धारित क्षमता के साथ समय पर पूरी होती है तो यह पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार के लिए हाल के दशकों की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में से एक साबित हो सकती है।

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