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Bihar

पंपसेट के सहारे धान की खेती करने को किसान मजबूर, कर रहे अत्यधिक बारिश का इंतजार

बारिश की कमी से मंडरा रहा है सूखे का संकट किसानों को खरीफ मौसम के शुरुआती दौर में ही मौसम की मार झेलनी पड़ रही है. अनुमंडल क्षेत्र में बीते दो सप्ताह से बारिश के दगा के बाद गुरुवार के दोपहर कुछ जगहों पर हुई हल्की बारिश से सूख रही धान की फसल को कुछ संजीवनी मिली, लेकिन लगातार हो रहे प्रचंड गर्मी की वज

पंपसेट के सहारे धान की खेती करने को किसान मजबूर, कर रहे अत्यधिक बारिश का इंतजार

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बारिश की कमी से मंडरा रहा है सूखे का संकट किसानों को खरीफ मौसम के शुरुआती दौर में ही मौसम की मार झेलनी पड़ रही है. अनुमंडल क्षेत्र में बीते दो सप्ताह से बारिश के दगा के बाद गुरुवार के दोपहर कुछ जगहों पर हुई हल्की बारिश से सूख रही धान की फसल को कुछ संजीवनी मिली, लेकिन लगातार हो रहे प्रचंड गर्मी की वजह से धान की फसल पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है. पानी के अभाव में जहां खेतों में लगे धान के बिचड़े झुलसने लगे हैं, वहीं किसान आगे बारिश होने की उम्मीद में पंपसेट के सहारे पटवन कर जैसे-तैसे धान रोपाई में जुटे हैं, जबकि रोपनी किए गए धान के पौधे में हरियाली बरकरार रखने के लिए किसान कर्ज लेकर या फिर तीन पटवन के लिए विभाग द्वारा घोषित डीजल अनुदान की राशि मिलने की आस में दिन-रात पंपसेट से सिंचाई करने में जुटे हैं. प्रखंड क्षेत्र के अधिकतर किसान धान की रोपनी के लिए जहां बारिश का इंतजार कर रहे हैं.   वहीं बारिश की आशा छोड़ पंपसेट के सहारे धान की रोपनी करने वाले किसानों के सूखने की कगार पर पहुंच चुकी खेत उसकी हालत पतली करने पर आमादा है. किसानों का कहना है कि एक तरफ जहां बिचड़े उखाड़ने के लिए पंपसेट के सहारे उसकी सिंचाई की जा रही है, वहीं निचले स्तर वाली भूमि में पंपसेट के सहारे ही पटवन कर धान की रोपाई की जा रही है, लेकिन रोपाई के बाद से ही लगातार धूप से खेत सूखने लगे हैं. सुखाड़ की संभावना से सहमे किसान मौसम के रौद्ररुप का असर धान की खेती पर भी नजर आने लगा है.   किसानों का कहना है कि धान के बिचड़े की हालत खराब है. किसी तरह पटवन कर खेतों में महंगे दर का बीज गिराया था, लेकिन जब रोपनी का समय आया तो किस्मत ही दगा दे रही है. बिचड़े बड़ा होने से पहले ही सुखकर बर्बाद होने की कगार पर पहुंच चुका है. लाचार होकर किसान बारिश होने के इंतजार में आसमान की ओर टकटकी लगाने को विवश हैं. वहीं अगर ऐसी स्थिति रही तो रोपाई किए गए धान के पौधे सूख कर बर्बाद हो जायेंगे. इस स्थिति में किसानों को इस बार सुखाड़ का भी सामना करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा. कहते हैं कृषि विशेषज्ञ मौसम के प्रतिकूल रहने की स्थिति में कृषि विशेषज्ञ किसानों को अब लेट वेरायटी के धान श्रीविधि तरीके से लगाने की सलाह दे रहे हैं. श्रीविधि में कम लागत लगती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लेट वेरायटी धान में सहभागी, सबौर अर्धजल, सबौर दीप, प्रभात आदि किस्म के बीज की बुआई की जा सकती है. यह धान 110 से 115 दिनों में पक कर तैयार हो जाता है. लेकिन किसानों के साथ मजबूरी यह है कि वह लेट वेरायटी के कोई भी किस्म का बिचड़ा नहीं लगाया है. पूर्व में किसान सरकारी स्तर से अनुदानित दरों पर मिलने वाले बीज के अलावा बाजार से महंगी दरों पर बीज की खरीदारी कर खेतों में गिराया था.

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