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कोसी नदी में किशोर लापता: मूर्ति विसर्जन के दौरान तेज धारा में बहा

Published: 21/9/2025, 9:58:29 am16 viewsSeemanchal Live

सहरसा (सलखुआ): विश्वकर्मा पूजा के मौके पर शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हो गया। सलखुआ अंचल के चिरैया थाना क्षेत्र अंतर्गत चानन पंचायत में मूर्ति विसर्जन के दौरान कोसी नदी में किशोर लापता हो गया। बताया जाता है कि नदी की तेज धारा में बहकर 16 वर्षीय किशोर की जान खतरे में पड़ गई और अब तक उसका कोई सुराग नहीं

कोसी नदी में किशोर लापता: मूर्ति विसर्जन के दौरान तेज धारा में बहा
सहरसा (सलखुआ): विश्वकर्मा पूजा के मौके पर शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हो गया। सलखुआ अंचल के चिरैया थाना क्षेत्र अंतर्गत चानन पंचायत में मूर्ति विसर्जन के दौरान कोसी नदी में किशोर लापता हो गया। बताया जाता है कि नदी की तेज धारा में बहकर 16 वर्षीय किशोर की जान खतरे में पड़ गई और अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका है। कैसे हुआ हादसा? जानकारी के अनुसार, डेंगराही गांव निवासी मनोज शर्मा का पुत्र (16 वर्ष) अपने साथियों के साथ मूर्ति विसर्जन के लिए नदी किनारे पहुंचा था। इसी दौरान नहाने के क्रम में वह गहरे पानी में उतर गया और देखते ही देखते कोसी नदी की धारा में समा गया। घटना के बाद अफरा-तफरी मच गई और लोगों ने चीख-पुकार शुरू कर दी। गोताखोरों और ग्रामीणों की कोशिशें नाकाम स्थानीय ग्रामीणों और गोताखोरों ने किशोर की तलाश की, लेकिन देर रात तक कोई सफलता नहीं मिल पाई। घटना की सूचना प्रशासन को दी गई, जिसके बाद पुलिस और राजस्व कर्मचारी मौके पर पहुंचे। राजस्व कर्मचारी गौतम कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को बुलाया गया और सर्च अभियान शुरू किया गया। दूसरे दिन भी नहीं मिला सुराग शनिवार को भी एसडीआरएफ की टीम ने लगातार नदी में खोजबीन की, लेकिन किशोर का शव अब तक बरामद नहीं हो सका। ग्रामीणों ने प्रशासन की देरी पर नाराज़गी जताई और कहा कि अगर एसडीआरएफ की टीम समय पर पहुंचती तो खोज अभियान और तेज़ी से चल सकता था। गांव में मातम और परिवार का हाल इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार अभी भी बेटे की सकुशल वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। स्थानीय लोगों ने कहा कि प्रशासन को नदी किनारे सुरक्षा के लिए और इंतज़ाम करने चाहिए। निष्कर्ष मूर्ति विसर्जन के दौरान कोसी नदी में किशोर लापता होने की यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि त्योहारों पर नदी और तालाबों में सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है। SDRF की लगातार कोशिशों के बावजूद अब तक सफलता नहीं मिल सकी है और परिवार अब भी अपने बेटे की खबर का इंतजार कर रहा है।

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