कोलकाता, 4 जुलाई 2026 — पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा घटनाक्रम में, ममता…
कोलकाता, 4 जुलाई 2026 — पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा घटनाक्रम में, ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी और TMC की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टार्याच ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है । इस कदम पर पार्टी से निष्कासित विधायक संदीपन साहा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
संदीपन साहा ने क्या कहा?
संदीपन साहा ने चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे का स्वागत करते हुए कहा कि यह होना ही था। उन्होंने कहा, "22 जून को हमारी एक बैठक हुई थी, जिसमें हमने राष्ट्रीय कार्य समिति के चेयरपर्सन और कमेटी के दूसरे सदस्यों के नामों का ऐलान किया था। वे सभी उसमें शामिल हैं।" साहा ने आरोप लगाया कि जिन लोगों को पद पर नियुक्त किया जा रहा है, वे लगातार इस्तीफा दे रहे हैं क्योंकि कालीघाट तृणमूल में काम करने का माहौल ही नहीं है।
क्यों गहराया है TMC का आंतरिक संकट?
TMC के भीतर यह संकट विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद और गहरा गया है । मुख्य विवाद 'जाली हस्ताक्षर विवाद' को लेकर है, जब विधानसभा में नेता विपक्ष के रूप में सोवंदेब चट्टोपाध्याय के नामांकन के समर्थन में 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज़ में गड़बड़ी पाई गई । संदीपन साहा और रितब्रता बनर्जी ने स्पीकर से शिकायत की कि कई हस्ताक्षर जाली हैं । इसी मामले में दोनों विधायकों को 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' के आरोप में TMC से निष्कासित कर दिया गया ।
'असली' और 'नकली' TMC की जंग
विद्रोही गुट, जो खुद को 'असली तृणमूल' कहता है, ने रितब्रता बनर्जी के नेतृत्व में TMC के मुख्यालय पर कब्ज़ा करने की कोशिश की है । उन्होंने पार्टी के EM बाईपास स्थित कार्यालय के गेट पर ताला लगाकर अपना बैनर लगा दिया, जिसमें वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया अध्यक्ष बताया गया । वहीं, ममता बनर्जी के वफादार गुट (कालीघाट खेमा) ने इसे अवैध अतिक्रमण बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है ।

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#WATCH | | कोलकाता, पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी का समर्थन करने वाली चंद्रिमा भट्टाचार्य के पार्टी के पदों से इस्तीफ़ा देने पर, TMC से निष्कासित विधायक संदीपन साहा ने कहा, "मैं उनके इस कदम का स्वागत करता हूं। यह होना ही था। 22 जून को हमारी एक बैठक हुई थी, जिसमें हमने राष्ट्रीय कार्य
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चुनाव आयोग और कानूनी संघर्ष
दोनों गुटों ने पार्टी के नाम और 'जोड़ा गाछी' (दो फूल) चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश करते हुए चुनाव आयोग का रुख किया है । चुनाव आयोग ने 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक दोनों पक्षों को अपने संगठनात्मक दावों के साथ जवाब देने का निर्देश दिया है । ममता गुट के खाते भी जांच के दायरे में आ गए हैं और कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उन्हें अनफ्रीज़ करने से इनकार कर दिया है ।