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आ गई बिहार में बैटरी वाली आटा चक्की, लोग करेंगे कमाई, जानिए केन्द्र की ये स्कीम कैसे करेगी काम?

Published: 30/11/2024, 06:37:27 am12 viewsSeemanchal Live

आ गई बिहार में बैटरी वाली आटा चक्की, लोग करेंगे कमाई, जानिए केन्द्र की ये स्कीम कैसे करेगी काम? बिहार में अब बैटरी से चलने वाली आटा चक्की लोगों के इनकम का जरिया बनगी. आटा चक्की को CSTS ने विकसित किया है. पटना: बिहार में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है. रोजगार के लिए लोगों को राज्य के बाहर पलायन करने को

आ गई बिहार में बैटरी वाली आटा चक्की, लोग करेंगे कमाई, जानिए केन्द्र की ये स्कीम कैसे करेगी काम?
आ गई बिहार में बैटरी वाली आटा चक्की, लोग करेंगे कमाई, जानिए केन्द्र की ये स्कीम कैसे करेगी काम? बिहार में अब बैटरी से चलने वाली आटा चक्की लोगों के इनकम का जरिया बनगी. आटा चक्की को CSTS ने विकसित किया है. पटना: बिहार में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है. रोजगार के लिए लोगों को राज्य के बाहर पलायन करने को मजबूर होना पड़ता है, लेकिन अब बिहारवासियों खासकर मिथिलावासियों के लिए खुशखबरी है. बिहार में बैटरी वाली आटा चक्की से लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे. बैटरी वाली आटा चक्की से होगी कमाई: बिहार में प्रतिभाओं का पलायन रोककर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए बैटरी चालित इस आटा चक्की का शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वितरण किया. बैटरी से संचालित होने वाली इस आटा चक्की को सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ ट्रेडिशन एंड सिस्टम (CSTS ) ने विकसित किया है. सीएसटीएस ने 'सक्षम मिथिला' नामक एक ऐप विकसित किया है. इस ऐप के जरिए उनके नजदीकी मोबाइल चक्की की सेवाएं बुक करने में मदद करेगा. कैसे सहायक होगा सक्षम ऐप: सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ ट्रेडिशन एंड सिस्टमस (सीएसटीएस) की फाउंडर सविता झा ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि मिथिलांचल को उन लोगों ने इसीलिए फोकस किया है क्योंकि रोजगार के क्षेत्र में सबसे पिछड़ा हुआ इलाका यदि कोई है तो वह मिथिलांचल है. सविता झा ने बताया कि उन लोगों का प्रयास है कि यहां के लोगों को खुद आत्मनिर्भर बनाया जा सके. "यही कारण है कि ट्राइसाइकिल चक्की को डेवलप किया गया है. बैटरी से चलने वाले इस ट्राइसाइकिल चक्की के माध्यम से वैसे दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके जो दूसरे पर निर्भर हैं. इसीलिए पहले चरण में दिव्यांगों के लिए इसकी शुक्रवार से शुरुआत की गई."- सविता झा,फाउंडर,सीएसटीएस कैसे काम करेगा यह सिस्टम?: सविता झा ने बताया कि दरभंगा के ही सॉफ्टवेयर डेवलपर के द्वारा सक्षम ऐप बनाया गया है. इस ऐप के जरिए आम लोग यह पता कर सकेंगे कि जिन लोगों के पास यह ट्राइसाइकिल चक्की है, वह इस वक्त कहां है. घर बैठे पिसवा सकेंगे गेहूं, मसाला: वह इस ऐप के जरिए उनको अपने पास बुलाकर गेहूं सत्तू एवं मसाला घर बैठे पिसवा सकेंगे. इससे दो फायदा होगा. एक उन दिव्यांगों को आर्थिक मदद भी हो जाएगी, दूसरा जिनके यहां जाकर वह गेहूं मसाला या सत्तू पीसेंगे उनका भी समय बचेगा. इस योजना को लेकर लक्ष्य: सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ ट्रेडिशन एंड सिस्टमस (सीएसटीएस) की फाउंडर सविता झा ने बताया कि आज 10 दिव्यांगों को यह ट्राइसाइकिल चक्की देकर इसकी शुरुआत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया है. अगले कुछ दिनों में पूरे मिथिलांचल में 1000 दिव्यांगों को इस तरीके का ट्राइ साइकिल चक्की दिया जाएगा. अभी उनका फोकस मिथिलांचल और बिहार के अन्य भाग हैं, लेकिन उनका लक्ष्य इसको पूरे पैन इंडिया तक ले जाने का है. मिथिलांचल में रोजगार के अवसर: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दो दिवसीय बिहार दौरा पर शुक्रवार 29 नवंबर को पटना पहुंचीं हैं. दो दिनों के इस दौरे में वित्त मंत्री पटना में पूर्वोत्तर क्षेत्र के आठ ग्रामीण बैंक की समीक्षा बैठक में शामिल हो रही हैं. निर्मला सीतारमण ने मिथिलांचल में सक्षम जीविका योजना के द्वारा दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ट्राइसाइकिल चक्की का वितरण किया. सक्षम जीविका के माध्यम से सशक्तिकरण: ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांगों, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना इस योजना का उद्देश्य है. वित्त मंत्री ने बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल चक्की दिव्यांगों के बीच वितरित की. इस ट्राइसाइकिल चक्की के माध्यम से दिव्यांग घर-घर जाकर गेहूं सत्तू या मसाला की पिसाई कर सकेंगे. दिव्यांगों को रोजगार: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सक्षम परियोजना के तहत 10 दिव्यांग लाभार्थियों को ट्राइसाइकिल चक्की वितरित की. इसके माध्यम से गेंहू, सत्तू, मसाला घर-घर जाकर तैयार किया जा सकेगा. इससे दिव्यांगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे. इस ट्राइसाइकिल चक्की को भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक के द्वारा कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व कार्यक्रम के तहत तैयार किया गया है. रोजगार का साधन बनेगा यह ऐप: पहले चरण में दिव्यांगों के लिए ट्राइसाइकिल मोबाइल चक्की के 1000 यूनिट तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. 1000 लोगों को प्रतिमाह 5000 से 8000 रू की आय हो सकती है. इस योजना का लाभ उठाने के लिए लाभार्थियों को CSR कार्यक्रम के सहयोग से बैंक एवं माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं के द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजना: वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मधुबनी में स्थित मिथिला चित्रकला संस्थान में मधुबनी पेंटिंग में पद्म पुरस्कार विजेता चित्रकारों के साथ बातचीत की. मधुबनी में मिथिला पेंटिंग की आधा दर्जन से ज्यादा कलाकारों को पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है. मिथिला पेंटिंग को किस तरीके से और बेहतर बनाया जा सके इसको लेकर वित्त मंत्री ने मिथिला पेंटिंग के बड़े चित्रकारों के साथ विमर्श किया. मधुबनी पेंटिंग पर सरकार की नजर: मिथिलांचल की पहचान मिथिला पेंटिंग से भी होती है. मिथिला पेंटिंग से जुड़े कलाकार अपने इस कलाकृति के लिए बाजार उपलब्ध करने की मांग शुरू से करते आ रहे हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में पद्म पुरस्कार विजेताओं से मिलने के बाद मिथिला पेंटिंग को लेकर केंद्र सरकार की और क्या योजनाएं हैं उसको लेकर रोड मैप तैयार हो सकता है.  

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