अपने जिले की आवाज़ बनें! Seemanchal Live में रिपोर्टर बनने के लिए अभी आवेदन करें।
BREAKING
भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी की कार्रवाईDumka News: बिहार के कैमूर में एंबुलेंस हादसा, जामा के युवक समेत 3 की मौतबिहार में बनी परीक्षा सुधार कमेटी, पटना हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार बने अध्यक्षमुख्यमंत्री अपनी जुबान पर कायम हैं तो इस्तीफा दें, जमुई कांड में तेजस्वी का सम्राट को चैलेंजSamastipur News: पीएफसी बिहार ने दूसरे क्वार्टर फाइनल में झारखंड को हरायाबहराइच में भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी जवान की संदिग्ध मौत: तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, ...बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनकएनीमिया मुक्त बिहार में जहानाबाद दूसरे स्थान परसुपौल : बिहार विद्यालय अध्यापक महासंघ की सुपौल जिला इकाई गठितजमुई कांड पर रंग की सियासत, तेजस्वी ने भगवा से जोड़ा तो बीजेपी लेकर आई हरा गमछा!लालू जी का 'असली चेला' था जमुई का गुनहगार! BJP बिहार के पोस्ट से सियासी बवाल, सिंगापुर से रोहिणी ने खोला मोर्चाभारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी की कार्रवाईDumka News: बिहार के कैमूर में एंबुलेंस हादसा, जामा के युवक समेत 3 की मौतबिहार में बनी परीक्षा सुधार कमेटी, पटना हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार बने अध्यक्षमुख्यमंत्री अपनी जुबान पर कायम हैं तो इस्तीफा दें, जमुई कांड में तेजस्वी का सम्राट को चैलेंजSamastipur News: पीएफसी बिहार ने दूसरे क्वार्टर फाइनल में झारखंड को हरायाबहराइच में भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी जवान की संदिग्ध मौत: तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, ...बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनकएनीमिया मुक्त बिहार में जहानाबाद दूसरे स्थान परसुपौल : बिहार विद्यालय अध्यापक महासंघ की सुपौल जिला इकाई गठितजमुई कांड पर रंग की सियासत, तेजस्वी ने भगवा से जोड़ा तो बीजेपी लेकर आई हरा गमछा!लालू जी का 'असली चेला' था जमुई का गुनहगार! BJP बिहार के पोस्ट से सियासी बवाल, सिंगापुर से रोहिणी ने खोला मोर्चा

Article Advertisement

Crime

न्यायालय का आईटी अधिनियम की रद्द धारा 66ए के तहत मुकदमे दर्ज किए जाने पर राज्यों को नोटिस

न्यायालय का आईटी अधिनियम की रद्द धारा 66ए के तहत मुकदमे दर्ज किए जाने पर राज्यों को नोटिस नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक गैर सरकारी संगठन के उस आवेदन पर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सभी उच्च न्यायालयों को नोटिस जारी किये जिसमें कहा गया है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनि

न्यायालय का आईटी अधिनियम की रद्द धारा 66ए के तहत मुकदमे दर्ज किए जाने पर राज्यों को नोटिस

Article Advertisement

न्यायालय का आईटी अधिनियम की रद्द धारा 66ए के तहत मुकदमे दर्ज किए जाने पर राज्यों को नोटिस नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक गैर सरकारी संगठन के उस आवेदन पर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सभी उच्च न्यायालयों को नोटिस जारी किये जिसमें कहा गया है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की रद्द हो चुकी धारा 66ए के तहत अब भी लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने 2015 में एक फैसले में इस धारा को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने कहा कि चूंकि पुलिस राज्य का विषय है, इसलिए यह बेहतर होगा कि सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित क्षेत्रों को पक्षकार बनाया जाए तथा “हम एक समग्र आदेश जारी कर सकते हैं जिससे यह मामला हमेशा के लिये सुलझ जाए।” पीठ ने अपने आदेश में कहा, “क्योंकि यह मामला पुलिस और न्यायपालिका से संबंधित है, हम सभी राज्यों, केंद्र शासित क्षेत्रों और सभी उच्च न्यायालयों के महापंजीयकों को नोटिस जारी करते हैं।” पीठ ने कहा कि इन सभी को चार हफ्ते के अंदर नोटिस का जवाब देना होगा। साथही पीठ ने यह निर्देश भी दिया कि नोटिस के साथ सभी पक्षों को याचिका का विवरण भी भेजा जाए। गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज’ (पीयूसीएल) की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने कहा कि इस मामले में दो पहलू हैं, पहला पुलिस और दूसरा न्यायपालिका जहां अब भी ऐसे मामलों पर सुनवाई हो रही है। पीठ ने कहा कि जहां तक न्यायपालिका का सवाल है तो उसका ध्यान रखा जा सकता है और हम सभी उच्च न्यायालयों को नोटिस जारी करेंगे। शीर्ष अदालत ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख चार हफ्ते बाद तय की है। केंद्र की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुरुआत में कहा कि उन्हें सरकार के हलफनामे पर यूपीसीएल का प्रत्युत्तर रविवार को ही मिला है और वह इसे पढ़ना चाहेंगे। उच्चतम न्यायालय ने पांच जुलाई को इस बात पर “हैरानी” और “स्तब्धता” जाहिर की थी कि लोगों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ए के तहत अब भी मुकदमे दर्ज हो रहे हैं जबकि शीर्ष अदालत ने 2015 में ही इस धारा को अपने फैसले के तहत निरस्त कर दिया था। सूचना प्रौद्योगिकी कानून की निरस्त की जा चुकी धारा 66ए के तहत भड़काऊ पोस्ट करने पर किसी व्यक्ति को तीन साल तक कैद और जुर्माने की सजा का प्रावधान था। शीर्ष अदालत ने पीयूसीएल के आवेदन पर केंद्र को नोटिस जारी किया था और एनजीओ के वकील से कहा था, “आपको नहीं लगता कि यह हैरान और स्तब्ध करने वाला है? श्रेया सिंघल फैसला 2015 का है। यह वास्तव में स्तब्ध करने वाला है। जो हो रहा है वह भयावह है।” इस संगठन ने दावा किया कि नयायालय के 24 मार्च, 2015 के फैसले के प्रति पुलिसकर्मियों को संवेदनशील बनाने के 2019 के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इस धारा के तहत हजारों मामले दर्ज किये गए हैं। केंद्र की तरफ से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने इससे पहले कहा था कि आईटी अधिनियम को देखने पर यह पता चलता है कि धारा 66ए उसमें नजर आती है, लेकिन फुटनोट (पन्ने के नीचे की तरफ की गई टिप्पणी) में लिखा है कि यह प्रावधान निरस्त कर दिया गया है। शीर्ष अदालत पीयूसीएल की एक नये आवेदन पर सुनवाई कर रहा था। इसमें कहा गया, “हैरानी की बात है कि 15 फरवरी 2019 के आदेश और उसके अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों के बावजूद, याचिकाकर्ता ने पाया कि आईटी अधिनियम की धारा 66ए न सिर्फ उपयोग पुलिस थानों में उपयोग में है बल्कि निचली अदालत के समक्ष चल रहे मामलों में भी।” आवेदन में केंद्र को यह निर्देश देने की मांग की गई कि ऐसे सभी मामलों के आंकड़े/जानकारी एकत्रित की जाए जहां प्राथमिकी/जांच में धारा 66ए को लागू किया गया और देश भर में ऐसे मामलों की संख्या की जानकारी भी मांगी जहां 2015 के फैसले का उल्लंघन करते हुए इस धारा के प्रावधानों के तरह कार्यवाही जारी है। शीर्ष अदालत ने 15 फरवरी 2019 को सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि वे सभी पुलिसकर्मियों को उसके 24 मार्च 2015 के फैसले से अवगत कराए जिसके तहत आईटी अधिनियम की धारा 66ए को निरस्त कर दिया गया था, जिससे लोगों को अनावश्यक रूप से इस प्रावधान के तहत गिरफ्तार न किया जाए। न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों से भी कहा था कि वे उस फैसले की प्रति निचली अदालतों में उपलब्ध कराएं जिससे निरस्त हो चुके प्रावधान के तहत लोगों के अभियोजन से बचा जा सके। इस धारा के तहत भड़काऊ सामग्री ऑनलाइन पोस्ट करने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

What do you think?

Leave a Comment

Article Bottom Advertisement

यह भी पढ़ें

Trending News

Most Read