मानसून की बारिश भले ही कई इलाकों में कम हो गई हो, लेकिन इसके बाद मच्छरजनित बीमारियों का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। देश के कई हिस्सों में डेंगू के मामले बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। पोस्ट-मानसून अवधि में जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल स्थिति पैदा कर रहा है।
बिहार में भी स्वास्थ्य विभाग डेंगू संक्रमण के नियंत्रण और प्रबंधन को लेकर सितंबर में समीक्षा बैठक कर चुका है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर 10 सितंबर को डेंगू संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण एवं प्रबंधन की समीक्षा के लिए बैठक का उल्लेख है।
दूसरे राज्यों से सामने आ रहे आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर में भी लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
चेन्नई में सितंबर में 1290 डेंगू मामले
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में सितंबर के दौरान 1290 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अगस्त में यह संख्या 605 थी। यानी सितंबर में मामले अगस्त की तुलना में दोगुने से भी अधिक रहे।
30 सितंबर को ही चेन्नई में 72 डेंगू मामलों की जानकारी दी गई। स्थिति को देखते हुए तमिलनाडु के कुछ अस्पतालों में डेंगू मरीजों के लिए अलग व्यवस्था भी की गई है।
यह आंकड़ा बताता है कि बारिश समाप्त होने के तुरंत बाद डेंगू का खतरा खत्म नहीं होता। इसके पीछे मच्छरों के प्रजनन चक्र और जमा पानी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
बिहार में भी अक्टूबर में सावधानी जरूरी
बिहार में सितंबर के दौरान डेंगू नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने समीक्षा की है। राज्य में बारिश, जलजमाव और बदलते मौसम को देखते हुए डेंगू सहित अन्य मच्छरजनित बीमारियों पर निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
खासकर शहरी और अर्धशहरी इलाकों में घरों के आसपास जमा साफ पानी, कूलर, टंकी, गमले, पुराने टायर और अन्य कंटेनर मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकते हैं।
डेंगू के मुख्य लक्षण क्या हैं
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार डेंगू संक्रमित मच्छर के काटने से फैलने वाला वायरल संक्रमण है। दुनिया की लगभग आधी आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां डेंगू का जोखिम मौजूद है और हर साल करोड़ों संक्रमण होने का अनुमान है।
डेंगू में आमतौर पर तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, मतली तथा त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण हो सकते हैं।
लेकिन हर मरीज में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।
इसी वजह से लगातार बुखार रहने पर केवल घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
कब स्थिति गंभीर हो सकती है
डेंगू के कुछ मरीजों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी, खून आना या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
बुखार कम होने को हमेशा बीमारी पूरी तरह खत्म होने का संकेत नहीं माना जा सकता। डेंगू के दौरान बीमारी के अलग-अलग चरणों में मरीज की स्थिति बदल सकती है।
इसलिए डॉक्टर द्वारा बताई गई जांच और निगरानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
प्लेटलेट को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी
डेंगू का नाम आते ही अक्सर लोगों का ध्यान प्लेटलेट काउंट पर चला जाता है। लेकिन केवल प्लेटलेट की संख्या देखकर मरीज की पूरी स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता।
डॉक्टर मरीज के लक्षण, रक्त जांच, ब्लीडिंग, ब्लड प्रेशर और अन्य चिकित्सकीय संकेतों को देखकर उपचार का निर्णय लेते हैं।
इसलिए सोशल मीडिया पर मिलने वाली किसी भी घरेलू सलाह या बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने से बचना चाहिए।
मच्छरों को रोकना सबसे जरूरी
डेंगू की रोकथाम में घर और आसपास के वातावरण की सफाई की बड़ी भूमिका है।
घर में कूलर और पानी रखने वाले बर्तनों को नियमित रूप से खाली और साफ करना चाहिए। पानी की टंकियों को ढककर रखना चाहिए। गमलों की प्लेट, पुराने टायर, टूटे बर्तन और ऐसे सभी स्थानों पर ध्यान देना चाहिए जहां थोड़ी मात्रा में भी पानी जमा हो सकता है।
शरीर को मच्छरों से बचाने के लिए पूरी बांह के कपड़े, मच्छरदानी और उपयुक्त mosquito repellent का इस्तेमाल भी मददगार हो सकता है।
केवल फॉगिंग से समस्या खत्म नहीं होगी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि केवल फॉगिंग करना पर्याप्त नहीं है। मच्छरों के प्रजनन स्थल को खत्म करना भी जरूरी है।
यदि किसी इलाके में हर घर के आसपास पानी जमा है और उसे हटाया नहीं जाता तो कुछ समय बाद मच्छरों की संख्या फिर बढ़ सकती है।
इसलिए स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
बदलते मौसम से बढ़ रही चुनौती
डेंगू अब केवल पारंपरिक मानसून की बीमारी के रूप में नहीं देखा जा रहा है। विशेषज्ञों ने तापमान में बदलाव, अनियमित बारिश और शहरीकरण को मच्छरजनित बीमारियों के बदलते पैटर्न से जोड़ा है।
यही कारण है कि बारिश खत्म होने के बाद भी लोगों को कई सप्ताह तक सावधानी बरतनी चाहिए।
अक्टूबर में त्योहारों और मौसम में बदलाव के बीच घरों और सार्वजनिक स्थानों पर सफाई बनाए रखना स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा।
बिहार में भी स्वास्थ्य विभाग की डेंगू नियंत्रण संबंधी गतिविधियों के बीच लोगों को बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय जांच और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना संक्रमण का खतरा कम करने में मदद कर सकता है।
अगर आपके इलाके में भी पिछले कुछ दिनों में डेंगू या लगातार बुखार के मामले बढ़े हैं, तो हमें बताइए कि आपका जिला कौन सा है।










