पटना। बिहार के सीमांचल और कोसी क्षेत्र में सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कामकाज की जमीनी स्थिति को लेकर बिहार विधानसभा की एक समिति अगले कुछ दिनों में कई जिलों का दौरा करेगी। बिहार विधानसभा की प्रत्यायुक्त विधान समिति के अध्ययन दल एक की ओर से 25 सितंबर से 1 अक्टूबर तक राज्य के विभिन्न जिलों में स्थल अध्ययन यात्रा की जाएगी।
इस दौरान समिति मुजफ्फरपुर, दरभंगा के अलावा सीमांचल के अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जिलों का दौरा करेगी। खास बात यह है कि समिति संबंधित जिलों में पिछले पांच वर्षों के दौरान सरकारी विभागों की ओर से भेजे गए नियम, विनियम, कानून और उपविधियों के क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी लेगी।
28 सितंबर को अररिया पहुंचेगी समिति
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समिति 28 सितंबर को अररिया पहुंचेगी। इसके बाद 29 सितंबर को किशनगंज, 30 सितंबर को पूर्णिया और 1 अक्टूबर को कटिहार में अध्ययन किया जाएगा।
सीमांचल के चारों जिलों में समिति की यात्रा प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी नियमों के वास्तविक क्रियान्वयन की स्थिति समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।
अधिकारियों को समिति के दौरे को लेकर आवश्यक तैयारी करने के लिए कहा गया है।
पिछले पांच साल के कामकाज पर होगी नजर
समिति का अध्ययन केवल वर्तमान व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा। पिछले पांच वर्षों के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों की ओर से जिला स्तर के अधिकारियों को भेजे गए नियम, विनियम, कानून और उपविधियों के बारे में जानकारी ली जाएगी।
इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि इन नियमों को लागू करने के लिए क्षेत्रीय और जिला स्तर के अधिकारियों ने क्या कदम उठाए।
इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि सरकार द्वारा बनाए गए नियम और दिशा-निर्देश जिला स्तर तक किस तरह पहुंचते हैं और उनके अनुपालन की वास्तविक स्थिति क्या है।
अधिकारियों से होगी चर्चा
समिति की यात्रा के दौरान जिला स्तर के पदाधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। विभिन्न विभागों के अधिकारी अपने-अपने विभाग से संबंधित नियमों और उनके क्रियान्वयन की जानकारी समिति के सामने रख सकते हैं।
इस दौरान प्रशासनिक स्तर पर आने वाली समस्याओं और नियमों को लागू करने में होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों पर भी चर्चा हो सकती है।
सीमांचल के लिए क्यों महत्वपूर्ण है दौरा
अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार सीमांचल के महत्वपूर्ण जिले हैं। इन जिलों में बाढ़, जल संसाधन, सड़क, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और सीमा क्षेत्र से जुड़े कई प्रशासनिक मुद्दे लगातार चर्चा में रहते हैं।
ऐसे में विधानसभा समिति का जिला स्तर पर सरकारी कामकाज का अध्ययन करना स्थानीय प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खासकर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार की ओर से जारी नियम और दिशा-निर्देश ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक किस तरह लागू किए जाते हैं।
जल संसाधन विभाग ने जिलों को किया आगाह
समिति के अध्ययन दौरे को लेकर जल संसाधन विभाग की ओर से संबंधित जिलों को भी सूचना दी गई है। अधिकारियों को समिति की यात्रा से संबंधित आवश्यक तैयारी रखने के लिए कहा गया है।
समिति के सामने विभागीय नियमों के साथ उनके कार्यान्वयन से जुड़े दस्तावेज और जानकारी भी प्रस्तुत की जा सकती है।
अब नजर समिति की रिपोर्ट पर
समिति का दौरा पूरा होने के बाद उसके अध्ययन और निरीक्षण से सामने आने वाली जानकारी महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी जिले में नियमों के अनुपालन में कमी या प्रशासनिक स्तर पर कोई समस्या सामने आती है तो उसके संबंध में आगे आवश्यक कार्रवाई या सुझाव दिए जा सकते हैं।
फिलहाल सीमांचल के चार जिलों में समिति के दौरे की तारीख तय हो चुकी है। अररिया में 28 सितंबर, किशनगंज में 29 सितंबर, पूर्णिया में 30 सितंबर और कटिहार में 1 अक्टूबर को समिति की गतिविधियां होंगी।
अब देखना होगा कि समिति के अध्ययन के दौरान सीमांचल के जिलों में सरकारी नियमों और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं।
क्या ऐसी विधानसभा समितियों को गांव और प्रखंड स्तर तक जाकर सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति भी देखनी चाहिए? अपनी राय Seemanchal Live को बताएं।












