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नई सरकार गठन के बाद बिहार में ‘पावर बैलेंस’ की लड़ाई तेज, दलों में बढ़ी खींचतान

Published: 24/11/2025, 08:54:33 pm30 viewsSeemanchal Live

नई सरकार गठन के बाद बिहार में ‘पावर बैलेंस’ की लड़ाई तेज – क्या बदल रहा है? राजनीति में हर बदलाव के बाद एक नया शक्ति संतुलन (power balance) तय होता है। ऐसा ही कुछ अब Nitish Kumar नेतृत्व वाली सरकार के गठन के बाद Bihar में देखने को मिल रहा है। इस लेख में हम जानेंगे कि कौन-कौन से कारक इस बदलाव को ले कर

नई सरकार गठन के बाद बिहार में ‘पावर बैलेंस’ की लड़ाई तेज, दलों में बढ़ी खींचतान
नई सरकार गठन के बाद बिहार में ‘पावर बैलेंस’ की लड़ाई तेज – क्या बदल रहा है? राजनीति में हर बदलाव के बाद एक नया शक्ति संतुलन (power balance) तय होता है। ऐसा ही कुछ अब Nitish Kumar नेतृत्व वाली सरकार के गठन के बाद Bihar में देखने को मिल रहा है। इस लेख में हम जानेंगे कि कौन-कौन से कारक इस बदलाव को ले कर सामने आ रहे हैं, किन पदों और फैसलों पर विवाद है, और आने वाले समय में इसका राजनैतिक अर्थ क्या होगा। 1. सरकार गठन की पृष्ठभूमि 11 नवंबर 2025 को हुए 2025 Bihar Legislative Assembly election में Bharatiya Janata Party (BJP)-led National Democratic Alliance (NDA) को 202 सीटें मिलीं, जबकि कुल सदन में 243 सीटें थीं। इस जीत के बाद, Nitish Kumar ने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन यही अवसर संकेत दे रहा है कि JDU (उनकी पार्टी) की स्थिति अब पहले जितनी मज़बूत नहीं है—BJP ने कई महत्वपूर्ण हिस्सों में अपनी पकड़ बनाई है। 2. ‘पावर बैलेंस’ में कैसे बदलाव दिखे? प्रमुख बिंदु: BJP ने नए मंत्रिमण्डल में सबसे अधिक मंत्री पद हासिल किए। JDU को कुछ प्रमुख विभाग मिलकर भी नेतृत्व की भूमिका कमजोर लग रही है। अब विधान सभा अध्यक्ष , उप-मुख्यमंत्री पद , और मंत्रिपरिषद् विभाजन पर दलों के अंदर जंग तेज है विशेष रूप से, BJP-JDU की गठबंधन दरम्यान छोटी पार्टियों की दावेदारी, क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरण भी ध्यान में हैं। 3. विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव – नए समीकरण राजनीति की लेवल पर जब नेतृत्व परिवर्तन होता है, तो विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) का पद अक्सर शक्ति का संकेतक होता है। बिहार में अभी इस पद के लिए बहस चल रही है कि इसे किसको दिया जाए। JDU का तर्क है कि मुख्यमंत्री पार्टी होने के नाते उन्हें यह पद मिलना चाहिए। वहीं BJP और अन्य सहयोगी इससे अलग राय रख रहे हैं। इस तरह यह पद केवल प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि गठबंधन शक्ति-संतुलन का चिन्ह बन गया है। 4. उप-मुख्यमंत्री और मंत्रिमण्डल बंटवारा दूसरी ओर, उप-मुख्यमंत्री पदों और मंत्रिमण्डल में हिस्सेदारी भी विवाद का विषय बनी है। उदाहरण के लिए, Chirag Paswan की पार्टी LJP(RV) उप-मुख्यमंत्री पद की मांग कर रही है, जिसे BJP-JDU ने फिलहाल खारिज कर दिया है। मंत्रिपरिषद् गठन में यह देखा गया कि BJP ने 14 मंत्री सीटें लीं, वहीं JDU को कम संख्या में मंत्री मिले। इससे संकेत मिला है कि गठबंधन में शक्ति केंद्र अब बदल रहा है। 5. क्या JDU की पकड़ कमजोर हो रही है? बहुत से विश्लेषक कह रहे हैं कि JDU हालाँकि मुख्यमंत्री का पद तो बरकरार रखे हुए है, लेकिन असल मायने में अब राजनीतिक नियंत्रण BJP के हाथ में जा रहा है। उदाहरण के लिए, गृह विभाग, शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों पर अब BJP की मांग ज्यादा दिख रही है। यही कारण है कि JDU को “सहायक” समर्थन देने वाली पोजीशन में देखा जा रहा है। 6. आगामी चुनौतियाँ और अवसर इस पावर संतुलन बदलाव से गठबंधन के भीतर विवाद बढ़ सकते हैं। छोटे सहयोगी दलों की दावेदारी और संतुष्टि बनाए रखना नीतिगत स्थिरता के लिए अहम होगा। विधानसभा अध्यक्ष, उप-मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद् पुनर्गठन पर आगे भी नजर बनी रहनी चाहिए। जनता-वोट बैंक, विकास एजेंडा और राजनीति-मीडिया में कैसे यह बदलाव दिखेगा, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा। 7. निष्कर्ष बिहार में नई सरकार गठन ने सिर्फ संख्या का खेल नहीं बदला है, बल्कि शक्ति के हिस्से , निर्णय लेने की क्षमता , और राजनीतिक लीडरशिप के स्वरूप में बदलाव संकेत दिए हैं। JDU ने मुख्यमंत्री पद बरकरार रखा है, पर अब भाजपा का दबदबा और जिम्मेदारी बढ़ती दिख रही है। अगले कुछ महीनों में ये देखने योग्य होगा कि गठबंधन कितनी मजबूती के साथ चल पाता है और जनता-हित कार्यक्रमों पर इसका असर क्या पड़ता है।

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