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बिहार विधानसभा में उठा पत्रकार पेंशन नियमावली 2015 का मामला

Published: 16/02/2026, 05:55:27 pm15 viewsSeemanchal Live

20 साल की अनिवार्य सेवा शर्त पर बहस, सरकार बोली– नियम के अनुसार ही मिल रही पेंशन पटना, 16 फरवरी 2026: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दसवें दिन सदन में पत्रकार पेंशन नियमावली 2015 को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि राज्य में बड़ी संख्या में पत्रकार पेंशन के दायरे से बाहर है

बिहार विधानसभा में उठा पत्रकार पेंशन नियमावली 2015 का मामला
20 साल की अनिवार्य सेवा शर्त पर बहस, सरकार बोली– नियम के अनुसार ही मिल रही पेंशन पटना, 16 फरवरी 2026: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दसवें दिन सदन में पत्रकार पेंशन नियमावली 2015 को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि राज्य में बड़ी संख्या में पत्रकार पेंशन के दायरे से बाहर हैं, क्योंकि अधिकांश के पास 20 वर्ष का अनिवार्य अनुभव नहीं है। इस पर सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि पेंशन नियमावली के तहत न्यूनतम सेवा अवधि की शर्त के अनुसार ही लाभ दिया जा रहा है और बिहार अन्य कई राज्यों की तुलना में अधिक पेंशन प्रदान कर रहा है। सदन में इस मुद्दे को लेफ्ट विधायक अजय कुमार ने उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवल 75 पत्रकारों को ही पेंशन मिल रही है, जबकि राज्य में पत्रकारों की संख्या इससे कहीं अधिक है। उनका तर्क था कि पीएफ और टीडीएस के आधार पर सेवा अवधि का निर्धारण किया जा रहा है, जिससे कई फ्रीलांस या छोटे संस्थानों में काम करने वाले पत्रकार वंचित रह जाते हैं। उन्होंने सरकार से नई समिति गठित कर नियमों की समीक्षा करने की मांग की। मंत्री विजय कुमार चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि पेंशन वितरण की पद्धति अन्य राज्यों में भी लगभग समान है और सेवा अवधि की शर्त को हटाना या कम करना फिलहाल संभव नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार सुझावों पर विचार करने को तैयार है। बजट सत्र में अन्य मुद्दों पर भी गरमाहट विधानसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नकाल से शुरू हुई। गृह विभाग, वित्त विभाग, उद्योग विभाग, आईटी विभाग समेत कई विभागों से जुड़े प्रश्न पूछे गए। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की। इस दौरान जदयू विधायक श्याम रजक ने इथेनॉल प्लांट से जुड़े मुद्दे को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के इथेनॉल उत्पादन कोटे में कटौती से प्लांट बंद होने की स्थिति बन गई है, जिससे मजदूरों की नौकरियां खतरे में हैं। इस पर उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि एग्रीमेंट के अनुसार 1060 किलोलीटर प्रतिदिन इथेनॉल खरीदने की बाध्यता है, लेकिन उत्पादन अधिक होने पर भी सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर अतिरिक्त खरीद का अनुरोध किया है। विपक्ष की रणनीति और सदन की स्थिति सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही। विपक्षी खेमे से सरकार पर हमले जारी रहे, लेकिन तेजस्वी यादव के लगातार अनुपस्थित रहने से विपक्ष की रणनीति कमजोर पड़ती दिखी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाकर सरकार को घेरना चाहता है। स्वास्थ्य विभाग के बजट पर चर्चा दोपहर के दूसरे सत्र में स्वास्थ्य विभाग के बजट पर चर्चा प्रस्तावित है। चर्चा के बाद स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे सरकार की ओर से जवाब देंगे। इसके अलावा समाज कल्याण, आपदा प्रबंधन, विधि, परिवहन और योजना एवं विकास विभाग के बजट प्रस्तावों पर भी चर्चा होनी है। पत्रकार पेंशन नियमावली पर आगे क्या? पत्रकार पेंशन नियमावली 2015 के तहत 20 वर्षों की सेवा अनिवार्य है। कई पत्रकार संगठनों का कहना है कि बदलते मीडिया परिदृश्य में यह शर्त व्यवहारिक नहीं है, क्योंकि बड़ी संख्या में पत्रकार अनुबंध या असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं। यदि सरकार समीक्षा समिति बनाती है तो संभव है कि नियमों में आंशिक संशोधन पर विचार हो। फिलहाल सरकार का रुख स्पष्ट है कि वर्तमान नियमावली के अनुसार ही पेंशन दी जाएगी। लेकिन सदन में उठी बहस से यह संकेत जरूर मिला है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है।

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