पटना। बिहार में कई नदियों का जलस्तर घटने के बावजूद बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। गंगा, गंडक, कोसी और सोन के जलस्तर में कई स्थानों पर कमी आई है, लेकिन निचले इलाकों में स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। राज्य के 13 जिलों में 27 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी है। कई इलाकों में लोग अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं और गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से प्रभावित है।
कुछ इलाकों में पानी घटा, लेकिन खतरा बरकरार
ताजा जानकारी के अनुसार बक्सर, भोजपुर और पटना में गंगा के जलस्तर में 12 से 25 सेंटीमीटर तक कमी दर्ज की गई है। इससे कुछ इलाकों में लोगों को राहत मिली है।
लेकिन दूसरी तरफ मुंगेर और भागलपुर के कई हिस्सों में गंगा का जलस्तर अभी बढ़ने की स्थिति में है। इसका असर निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों पर पड़ रहा है।
बाढ़ की स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है क्योंकि एक क्षेत्र में पानी घटने के बावजूद दूसरे क्षेत्र में जलस्तर बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन को लगातार नदी के जलस्तर और तटवर्ती इलाकों की निगरानी करनी पड़ रही है।
पटना के कई प्रखंड बाढ़ से प्रभावित
राजधानी पटना भी बाढ़ की स्थिति से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाई है। जिले के 11 प्रखंड प्रभावित बताए गए हैं।
मनेर, दानापुर, राघोपुर और पनापुर के दियारा इलाकों की कई पंचायतें अब भी बाढ़ के पानी से घिरी हुई हैं। गंगा, सोन और पुनपुन नदियों के जलस्तर में बदलाव का सीधा असर इन क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है।
कई ग्रामीण इलाकों में आवागमन की समस्या बनी हुई है। मोकामा, अथमलगोला, फतुहा और बख्तियारपुर के कुछ क्षेत्रों से जिला मुख्यालय तक संपर्क भी प्रभावित हुआ है।
सारण, वैशाली और बेगूसराय में भी असर
बाढ़ का प्रभाव केवल पटना और भागलपुर तक सीमित नहीं है। सारण, वैशाली, बेगूसराय, मुंगेर और भागलपुर के कई इलाकों में भी बाढ़ का पानी पहुंचा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के सामने आवागमन, पशुओं के लिए चारा, भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक रसोई और राहत शिविरों के माध्यम से लोगों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
भागलपुर में नाव पलटने की घटना
भागलपुर के नौगछिया प्रखंड के राघोपुर दियारा इलाके में बाढ़ के दौरान चारा लेकर जा रही एक नाव गंगा में पलट गई। SDRF की टीम ने नाव पर सवार सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
इस घटना ने एक बार फिर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नाव से आवागमन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान खींचा है।
बाढ़ के दौरान छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए प्रशासन की ओर से लोगों से सुरक्षित रास्तों और अधिकृत नावों का इस्तेमाल करने की अपील की जाती रही है।
मुख्यमंत्री ने राहत कार्यों का जायजा लिया
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वैशाली और सारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई का निरीक्षण किया तथा प्रभावित लोगों से बातचीत की।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत कार्यों को और तेज करने का निर्देश दिया है।
अब चुनौती है पानी घटने के बाद की स्थिति
बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी प्रभावित लोगों की परेशानी तुरंत खत्म नहीं होती। पानी उतरने के बाद सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य और खेती से जुड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
कई जगह खेतों में पानी जमा रहने से फसल को नुकसान हो सकता है। वहीं घरों में पानी घुसने के कारण लोगों को वापस लौटने में भी परेशानी होती है।
स्वास्थ्य विभाग के सामने भी बड़ी चुनौती रहती है क्योंकि बाढ़ का पानी उतरने के बाद दूषित पानी और मच्छरों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
Seemanchal के लिए भी महत्वपूर्ण खबर
बाढ़ और बारिश का असर उत्तर-पूर्वी बिहार के कई जिलों पर भी पड़ रहा है। पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, सुपौल और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को नदी और जलभराव की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।
विशेषकर निचले इलाकों और नदी किनारे रहने वाले परिवारों को प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए।
फिलहाल राहत की खबर यह है कि राज्य की कुछ प्रमुख नदियों का जलस्तर कई स्थानों पर घटा है। लेकिन भागलपुर और मुंगेर समेत कुछ डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है।
इसलिए बिहार में बाढ़ का संकट पूरी तरह समाप्त मानना अभी जल्दबाजी होगी।
आपकी राय
आपके इलाके में बाढ़ और जलभराव की स्थिति कैसी है? क्या राहत शिविर, सामुदायिक रसोई और प्रशासन की मदद समय पर पहुंच रही है? अपनी जानकारी और राय कमेंट में बताएं।












