अररिया। बिहार के अररिया जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिलने का दावा किया गया है। महलगांव थाना क्षेत्र में पुलिस ने छापेमारी कर कथित साइबर ठगी से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप और फिंगरप्रिंट स्कैनर समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस अब बरामद उपकरणों की जांच के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि कथित साइबर गतिविधियों का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कितने लोग शामिल हो सकते हैं।
कुर्सेल गांव में हुई छापेमारी
पुलिस के अनुसार 21 सितंबर 2026 को गश्ती और सूचना संकलन के दौरान महलगांव थाना क्षेत्र के कुर्सेल गांव में कथित साइबर गतिविधि की जानकारी मिली थी।
सूचना का सत्यापन करने के बाद पुलिस टीम ने वार्ड संख्या सात में एक घर पर छापेमारी की। पुलिस के मुताबिक मौके से छह लोगों को पकड़ा गया।
पुलिस का आरोप है कि वहां आधार कार्ड नंबर और फिंगरप्रिंट स्कैनर की मदद से साइबर ठगी से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
12 मोबाइल और चार फिंगरप्रिंट स्कैनर बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 12 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, चार फिंगरप्रिंट स्कैनर, एक कार और इंटरनेट से जुड़े अन्य उपकरण बरामद किए हैं।
इन उपकरणों की जांच अब पुलिस के लिए महत्वपूर्ण होगी। मोबाइल फोन और लैपटॉप में मौजूद डिजिटल जानकारी से कथित लेनदेन, संपर्क और दूसरे लोगों से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी मिलने की संभावना है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था और क्या इनके जरिए किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते या पहचान संबंधी जानकारी का दुरुपयोग किया गया।
छह लोगों की गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार लोगों की पहचान राशिद, कुर्बान आलम, मनजर, राबरेरा, राजा कुमार और हुसैन राजा के रूप में हुई है।
पुलिस के मुताबिक इनमें पांच आरोपी अररिया जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के रहने वाले हैं, जबकि राजा कुमार छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले का निवासी बताया गया है।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर कथित साइबर गतिविधियों की पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है।
बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच
साइबर अपराध की जांच में केवल मोबाइल और लैपटॉप की बरामदगी पर्याप्त नहीं होती। पुलिस को डिजिटल साक्ष्यों की जांच के साथ बैंक खातों और लेनदेन की जानकारी भी जुटानी पड़ती है।
इसी दिशा में पुलिस बरामद उपकरणों से डिजिटल डेटा निकालने और संबंधित बैंकिंग गतिविधियों की जांच कर रही है।
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी होगा कि अगर किसी व्यक्ति की पहचान या बायोमेट्रिक जानकारी का गलत इस्तेमाल हुआ है तो उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और उससे किसे आर्थिक नुकसान हुआ।
आईटी एक्ट के तहत भी मामला
मामले में महलगांव थाना कांड संख्या 183/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D के तहत भी मामला दर्ज किया है।
गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की प्रक्रिया की जानकारी पुलिस की ओर से दी गई है।
आधार और बायोमेट्रिक डेटा को लेकर बढ़ी चिंता
इस मामले ने आम लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा किया है। आज आधार नंबर, मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक जानकारी कई सरकारी और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी होती है।
अगर किसी व्यक्ति की पहचान संबंधी जानकारी गलत हाथों में पहुंचती है तो उसके दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए आधार की जानकारी, बैंकिंग विवरण, OTP और फिंगरप्रिंट आधारित किसी भी प्रमाणीकरण प्रक्रिया के दौरान सावधानी जरूरी है।
किसी अनजान व्यक्ति को आधार की फोटो कॉपी, OTP या बैंकिंग जानकारी देना जोखिम पैदा कर सकता है।
पुलिस अब नेटवर्क की तलाश में
छह लोगों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण कथित नेटवर्क का पता लगाना है।
पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि गिरफ्तार लोगों के संपर्क किन लोगों से थे, कथित साइबर गतिविधियों का संचालन कहां-कहां से किया जाता था और क्या इस मामले का संबंध दूसरे जिलों या राज्यों से भी है।
मोबाइल और लैपटॉप की डिजिटल जांच से इस मामले में आगे कई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
सीमांचल में साइबर अपराध पर निगरानी जरूरी
अररिया के अलावा पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जैसे सीमांचल के जिलों में भी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ साइबर अपराध के नए तरीके सामने आने की चुनौती भी बढ़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बैंकिंग, आधार और डिजिटल भुगतान के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर जागरूक करना महत्वपूर्ण है।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि गिरफ्तार लोगों के कथित नेटवर्क की पहुंच कितनी दूर तक थी और क्या इस मामले में और गिरफ्तारियां होंगी।
फिलहाल जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
आपकी राय
क्या गांव और छोटे शहरों में आधार, बैंकिंग और साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान और तेज करने की जरूरत है? क्या आपके इलाके में भी आधार या साइबर ठगी से जुड़ी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं? अपनी राय कमेंट में बताएं।












